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राजस्थान की भेड़ें दुनिया में छा गईं! ऊन, दूध और मांस में नंबर-1, मारवाड़ी से जैसलमेरी तक हिट नस्लों का जलवा

Last Updated:November 27, 2025, 17:52 IST

Rajasthan sheep breeds : राजस्थान की भेड़ नस्लें देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी खास पहचान रखती हैं. मारवाड़ी से लेकर जैसलमेरी तक, हर नस्ल गर्मी सहन करने में सक्षम, ऊन, दूध और मांस उत्पादन में बेहतरीन होती है. प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाने वाली ये भेड़ें किसानों के लिए आय का बड़ा साधन बनी हुई हैं और अपनी विशिष्ट खूबियों के लिए मशहूर हैं.

मारवाड़ी भेड़ का मूलस्थान जोधपुर,पाली, नागौर, को माना जाता है. इसका मुंह काले रंग का होता है और लंबी दूरी तक चलने में सक्षम और फुर्तीली होती है. मारवाड़ी भेड़ में तापमान सहन करने की क्षमता सर्वाधिक होती है. भेड़ की यह नस्ल राजस्थान में सबसे ज्यादा पाई जाती है और यह भेड़ की त्रिप्रयोजनी नस्ल होती है क्योंकि इसे ऊन दूध और मांस उत्पादन के लिए पाला जाता है और यूरोपीय देशों में इसकी ऊन को जोरिया के नाम से जाना जाता है.

चोकला भेड़ मुख्य रूप से शेखावाटी के सीकर, झुंझुनू चूरू में पाई जाती है इसे शेखावाटी भेड़ और छापर भेड़ भी कहते हैं. चौकला भेड़ की ऊन महीन और उन्नत किस्म की होने के कारण इसे राजस्थान की मेरिनो भी कहते हैं. इस नस्ल की भेड़ की लम्बाई और ऊचाई बराबर होती है. इसलिए यह भेड़ वर्गाकार दिखाई देती है. यह प्रतिवर्ष 2kg से लेकर 3kg तक ऊन का उत्पादन करती है.

मालपुरा भेड़ की नस्ल मुख्य रूप से टोंक अजमेर जयपुर कोटा बूंदी जिलों में पाई जाती है. इस नस्ल की भेड़ के मुंह और पैरों पर ऊन नहीं पाई जाती है और यह भेड़ मुख्य रूप से मांस उत्पादन के लिए पाली जाती है. इससे प्रतिवर्ष 1kg ऊन का उत्पादन होता है.

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सोनाड़ी नस्ल की भेड़ मुख्य रूप से मेवाड़ क्षेत्र के उदयपुर,चित्तौड़गढ़,बांसवाडा, जिलों में पाई जाती है. राजस्थान में सबसे अधिक मारवाड़ी भेड़ के बाद राजस्थान में पाई जाने वाली भेड़ की 2nd नस्ल है जो राजस्थान में सबसे ज्यादा पाई जाती है. इससे सुनहरी रंग की ऊन प्राप्त होती है. यह भेड़ की द्वीप्रयोजनी नस्ल है. जो ऊन और दूध उत्पादन के लिए पाली जाती है. इससे ऊन का उत्पादन 2kg से 3kg तक होता है.

जैसलमेरी नस्ल की भेड मुख्य रूप से जैसलमेर में ही पाई जाती है. यह भेड़ की सबसे बड़ी आकार की नस्ल होती है और इसके तोतामुखी नाक होती है. इसका सिर काला और भूरा होता है और यह भेड़ की पूर्णतया रेगिस्तानी नस्ल होती है. इससे ऊन का उत्पादन 2kg से 3kg तक होता है.

First Published :

November 27, 2025, 17:52 IST

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राजस्थान में पाई जाती है भेड़ की यह नस्ल जिनसे होता है ऊन का भारी उत्पादन

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