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लव ट्रैप, जॉब ट्रैप या इंटरनेशनल ट्रैप? खतरे में बिहार की बेटियां… अब सप्रीम कोर्ट की चौखट पर ‘खतरनाक’ केस!

नई दिल्ली. भारत-नेपाल सीमा से लगे उत्तर बिहार के सीमावर्ती इलाकों में पिछले छह महीनों में हुई 100 से अधिक लड़कियों की संदिग्ध गायब होने की घटनाओं ने अब देश के सर्वोच्च न्यायालय का ध्यान खींचा है. मानवाधिकार अधिवक्ता ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत सुनवाई की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र भेजा है. मामले की एक प्रति पटना उच्च न्यायालय, राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग को भी भेजी गई है. दरअसल, यह मामला अब सिर्फ स्थानीय अपराध नहीं रह गया है, बल्कि यह मानवाधिकार, महिला सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय तस्करी के खतरों की पूरी चेन को खुलासा करता है.

अंतरराष्ट्रीय तस्करी का नेटवर्क सक्रिय
मानवाधिकार वकील एसके झा का कहना है कि मोतिहारी जिले से सटे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में मानव तस्करों का एक संगठित गिरोह सक्रिय है. उनकी जांच से पता चलता है कि गायब लड़कियों को न सिर्फ बिहार के विभिन्न हिस्सों में ले जाया जा रहा है, बल्कि नेपाल, चीन, ब्राज़ील, सऊदी अरब समेत अन्य देशों में बेचने या तस्करी किए जाने की आशंका है. अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट से विशेष जांच दल (SIT) गठित कर इसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रैक-एन्ड-ट्रेस करने की मांग की है.

भय और सामाजिक असुरक्षा, परिवारों में डर
इन घटनाओं ने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों में खौफ बना दिया है. लोग बेटियों को बाहर भेजने से डर रहे हैं. वकील झा और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब अपराध और तस्करी सिर्फ एक-दो इलाकों तक सीमित नहीं रहे; बल्कि यह नेटवर्क पूरे उत्तर बिहार और सीमा के पार देश-विदेश दोनों में फैला हुआ है. उन्हें आशंका है कि पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था की सुस्ती तथा कम-जांच और सीमांचल क्षेत्रों में निगरानी की कमी तस्करों को सक्रिय बनाए रख रही है.

भारत–नेपाल सीमा से गायब हो रही लड़कियां

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जुलाई से नवंबर तक रक्सौल में 10, रामगढ़वा में 3, आदापुर में 4 और अन्य जगहों से कुल 83 (कुछ रिपोर्ट्स में 100 से अधिक है) लड़कियां गायब हुईं. कुछ मामलों में शादीशुदा महिलाएं भी शामिल हैं. तस्कर सोशल मीडिया पर ‘प्रेमिका’ बनकर ललचाते हैं या ‘अच्छी सैलरी वाली जॉब’ का झांसा देते हैं. एक बार बॉर्डर पार, लड़कियां जबरन शादी या रेड-लाइट एरिया में धकेल दी जाती हैं. फिर उनका सफर खत्म होता है नेपाल, चीन, ब्राजील या सऊदी अरब जैसे देशों में, जहां उन्हें लाखों-करोड़ों में बेचा जाता है. यहां तक कि कुछ को नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इसकी गंभीरता को भांप लिया है और आयोग ने उच्चस्तरीय जांच का आदेश दे दिया है.

सुप्रीम कोर्ट में मामला, SIT की मांग

वहीं, यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और अधिवक्ता एसके झा की याचिका में न केवल त्वरित सुनवाई की मांग की गई है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने, विशेष जांच दल की तैनाती और ट्रांसनेशनल नेटवर्क को गति पकड़ने से पहले रोकने की अपील भी की गई है. इसके अलावा राष्ट्रीय एवं राज्य महिला आयोग से भी अनुरोध किया गया है कि वे इस मामले पर अपनी रिपोर्ट तैयार करें, पीड़ित परिवारों को संरक्षण दें और तस्करी शिकार हुई लड़कियों की सुरक्षित वसूली सुनिश्चित करें. अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ये घटनाएं और बढ़ सकती हैं.

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