‘फैमिली को खतरा था, 25 साल नहीं… मेरे पास हथियार नहीं थे’, आर्म्स एक्ट में संजय दत्त ने काटी जेल, अब दी सफाई

Last Updated:December 03, 2025, 16:30 IST
संजय दत्त ने 1993 के मामले को लेकर अपनी बात रखी है, जो उनके जीवन का सबसे मुश्किल दौर था. उन्होंने कहा कि उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया, जबकि कोई हथियार बरामद नहीं हुआ. संजय ने पांच साल की जेल की सजा काटी थी. संजय ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद के तनावपूर्ण माहौल और उस समय अपने परिवार को मिली धमकियों को याद किया. 
संजय दत्त ने आर्म्स एक्ट के तहत पांच साल की सजा पूरी की और 2016 में रिहा हुए. हाल ही में एक पॉडकास्ट में 1993 के उथल-पुथल भरे वक्त में उनकी फैमिली पर भी बहुत दवाब रहा. उनके करीबियों पर बी असर पड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को 25 साल क्यों लगे समझ नहीं आया. उनके पास बंदूक भी नहीं मिली फिर भी उन्हें दोषी ठहराया गया.

संजय दत्त ने ‘द हिमांशु मेहता शो’ में अपने एक्सपीरिएंस शेयर किए. उन्होंने कहा, “मेरे पिता को धमकी दी जा रही थी, मेरी बहनों को धमकी दी जा रही थी. उन्होंने कहा कि मेरे पास बंदूक है, लेकिन वे इसे साबित नहीं कर सके… मुझे नहीं पता कि उन्हें 25 साल क्यों लगे यह समझने में, और फिर मुझे आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी ठहरा दिया, बिना बंदूक मिले, बिना बंदूक पाए.”

संजय दत्त ने यह भी कहा कि अधिकारियों को यह साबित करने में इतना समय नहीं लगना चाहिए था कि वे टाडा या बम ब्लास्ट केस का हिस्सा नहीं थे. लंबी कानूनी प्रक्रिया और अनिश्चितता के बावजूद, संजय ने कहा कि उन्होंने इस अनुभव से सीखने की कोशिश की.
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संजय दत्त ने कहा, “मैं इसे अपने जीवन का हिस्सा मानता हूं, और इसे एक सीख के तौर पर लेता हूं… मैंने अपनी जेल की सजा गरिमा के साथ काटी.” उन्होंने बताया कि जेल में उन्होंने ज्यादातर समय धार्मिक ग्रंथ पढ़ने, ध्यान करने और कानून की पढ़ाई में बिताया. उन्होंने कहा,”मैंने देश के कानून सीखे… मैंने कानून पर बहुत सारी किताबें पढ़ीं.”

संजय दत्त ने कहा, “जब मैं वहां था, मैंने बहुत सारी किताबें पढ़ीं. मैंने बहुत प्रार्थना की, मंत्र जपे, ध्यान किया. मैंने शिव पुराण, गणेश पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत पढ़ी. मुझे जेल में अपने धर्म, अपने महान देवताओं के बारे में पढ़ने का समय मिला.”

संजय दत्त ने बताया कि उन्होंने बार-बार कोर्ट से केस को जल्दी निपटाने की गुजारिश की. संजय ने कहा, “मेरी सारी गुजारिश यही थी… कृपया केस को जल्दी निपटाएं और खत्म करें, जो भी हो. क्योंकि मैंने देखा है कि वहां कितने लोग बस जेल में पड़े रहते हैं.”

संजय दत्त ने यह भी बताया कि जेल में उन्होंने खुद को कैसे बिजी रखा. संजय ने कहा, “मैंने वहां मजदूरी की… फिर मैंने एक रेडियो स्टेशन भी शुरू किया, जिसका नाम था रेडियो वाईसीपी.” उन्होंने खुलासा किया कि अन्य कैदी शो के लिए स्क्रिप्ट लिखने में मदद करते थे. उन्होंने यह भी बताया कि जेल के अंदर उन्होंने एक छोटा थिएटर ग्रुप बनाया था. संजय ने कहा,”मैं निर्देशक था और हत्या के दोषी मेरे एक्टर्स थे.”

हालांकि, उन्हें सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने कई कैदियों को देखा, जो सिर्फ अपने केस आगे बढ़ने का इंतजार करते-करते कीमती साल गंवा देते हैं. संजय दत्त 2016 में अपनी सजा पूरी करने के बाद रिहा हुए थे. उनकी लीगल जर्नी को बाद में राजकुमार हिरानी की फिल्म ‘संजू’ में दिखाया गया. इसमें उनका किरदार रणबीर कपूर ने निभाया था.
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December 03, 2025, 16:30 IST
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‘फैमिली को खतरा था, 25 साल नहीं… मेरे पास हथियार नहीं थे’, संजय दत्त की सफाई



