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एग्रीकल्चर न्यूज: अपने अमरूद के लिए जाना जाता है यह गांव, हर घर में होती है अमरूद की खेती

Last Updated:December 16, 2025, 18:43 IST

एग्रीकल्चर न्यूज : भीलवाड़ा जिले का गुरला गांव अब अमरूद की मिठास से अपनी पहचान बना रहा है. नेशनल हाईवे 758 पर बसे इस गांव के किसान बड़े पैमाने पर अमरूद की खेती कर रहे हैं, जिससे न सिर्फ राहगीर आकर्षित हो रहे हैं, बल्कि किसानों की आमदनी और गांव की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है.

भीलवाड़ा : भीलवाड़ा जिले के नेशनल हाईवे 758 पर स्थित गुरला गांव अपने आप में एक नई पहचान बन चुका है. यहां से गुजरने वाले राहगीर अक्सर यहां के अमरूद की मिठास के लिए रुक जाते हैं. इस गांव की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यहां पर बड़ी तादात में अमरूद की खेती की जाती है और यहां पर ज्यादातर फार्मर अमरूद की खेती करते हैं. गुरला गांव में अमरूद की खेती का स्तर इतना बढ़ा है कि यहां के किसान अब इस फल को स्थानीय बाजारों के अलावा पास के जिलों उदयपुर, राजसमंद और चित्तौड़गढ़ तक भेजते हैं.

गुरला के किसान राम लाल कहते हैं कि इस क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु अमरूद की पैदावार के लिए अनुकूल है, जिससे फल अधिक मीठा और रसदार होता है. गुरला गांव नेशनल हाईवे 758 पर स्थित है. यहां से रोजना हजारों वाहन गुजरते हैं.  राहगीर भी अक्सर यहां रुक कर ताज़ा अमरूद खा कर जाते हैं, जिससे गांव का नाम और पहचान दोनों बढ़ रहे हैं. गुरला के किसान अमरूद की खेती को अपनाते समय पारंपरिक कृषि पद्धतियों के साथ आधुनिक तकनीकों को भी अपनाने लगे हैं. खेतों में सही समय पर पानी देना, उर्वरक का संतुलित उपयोग और सावधानीपूर्वक कटाई जैसी तकनीकें किसानों को बेहतर उपज दिला रही हैं. अमरूद जैसे नकदी फसल पर ध्यान केंद्रित करने से ग्रामीण किसानों की आय में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है, क्योंकि एक अच्छी बागवानी से प्रति एकड़ अधिक लाभ कमाया जा सकता है, जैसा कि देश के अन्य भागों में भी देखा गया है.

अमरूद की खेती से गुरला गांव की बदली किस्मतकिसान रामलाल में बताया कि पहले हम गांव में अनार की खेती करते थे बाद में कृषि विभाग द्वारा यहां पर एक शिविर लगाया गया जिसमें कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा बताया गया कि किस तरह किसान हमारे गांव की जमीन पर उन्नत खेती कर सकते हैं जिसमें उन्होंने बताया कि अमरूद की खेती भी इस मिट्टी के लिए काफी सही साबित हो सकती है इसके बाद छोटे स्तर पर अमरूद की खेती की शुरुआत की और अब धीरे-धीरे पूरे गांव में ज्यादातर लोग अपने खेतों में अमरूद की खेती कर रहे हैं जिसके वजह से किसानों को बहुत फायदा मिल रहा है.

शिविर से समृद्धि तक, अमरूद ने किसानों को दी नई राहगुरला गांव की पहचान सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है. अमरूद के व्यवसायिक उत्पादन ने यहां के छोटे किसानों को बड़े बाजारों से जोड़ दिया है, जिस कारण पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक आय और रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं. कुछ किसान जो पहले केवल अनाज उगाते थे, अब उन्होंने अमरूद के बाग लगाए हैं और फल की बिक्री से मिली कमाई से अपने घरों के खर्च, बच्चों की शिक्षा और कृषि यंत्रों पर निवेश कर रहे हैं.

About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal

A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें

Location :

Bhilwara,Rajasthan

First Published :

December 16, 2025, 18:43 IST

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भीलवाड़ा के गुरला गांव में अमरूद की खेती से किसानों की आय में बढ़ोतरी

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