आसींद के शिल्पकार ने मिट्टी में फूंकी जान, 45 दिन की साधना, 55 किलो मिट्टी और जीवंत हुआ सिंगोली श्याम का स्वरूप

Last Updated:June 20, 2026, 21:48 IST
भीलवाड़ा जिले के आसींद कस्बे के शिल्पकार राजेंद्र कुमार शर्मा ने 45 दिनों की कड़ी मेहनत से भगवान सिंगोली श्याम की बेहद आकर्षक और जीवंत मिट्टी की प्रतिमा तैयार की है. 55 किलो मिट्टी से बनी इस प्रतिमा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं. बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के अपनी कला को निखारने वाले राजेंद्र शर्मा की यह रचना उनकी साधना, आस्था और अद्भुत शिल्प कौशल का अनूठा उदाहरण बन गई है.
भीलवाड़ा. जिले का आसींद कस्बा एक बार फिर अपनी कला के कारण चर्चा में है. वस्त्र नगरी के रूप में पहचान रखने वाला भीलवाड़ा अब शिल्प कला के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है. आसींद के शिल्पकार राजेंद्र कुमार शर्मा ने भगवान सिंगोली श्याम की बेहद आकर्षक और जीवंत मिट्टी की प्रतिमा तैयार कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. इस प्रतिमा को देखने के लिए नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. प्रतिमा की सुंदरता, चेहरे के भाव और बारीक नक्काशी लोगों को काफी प्रभावित कर रही है, जो भी इस कलाकृति को देख रहा है, वह कलाकार की मेहनत और प्रतिभा की खुलकर सराहना कर रहा है. राजेंद्र शर्मा इससे पहले भी कई प्रसिद्ध धार्मिक धामों और मंदिरों के लिए सांवलिया सेठ, द्वारकाधीश, श्रीनाथजी, बाणमाता, करणी माता, बंक्यारानी माता, पंचमुखी दरबार और वेंकटेश्वर तिरुपति बालाजी सहित अनेक सुंदर प्रतिमाएं तैयार कर चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या रोकने, सांप्रदायिक एकता, विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, गो-रक्षा और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने जैसे सामाजिक विषयों पर भी प्रभावशाली कलाकृतियां बनाई हैं. राजेंद्र शर्मा का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल प्रतिमाएं बनाना नहीं, बल्कि कला के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश देना और युवाओं को इस पारंपरिक शिल्पकला से जोड़कर नई पीढ़ी तक इसे पहुंचाना है. उनकी यह नई रचना आसींद और पूरे भीलवाड़ा जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है.
रोजाना करीब 12 से 13 घंटे लगातार मेहनत कीराजेंद्र शर्मा ने बताया कि इस प्रतिमा को तैयार करने में उन्हें पूरे 45 दिन लगे, इस दौरान उन्होंने रोजाना करीब 12 से 13 घंटे लगातार मेहनत की, प्रतिमा निर्माण में लगभग 55 किलो मिट्टी का उपयोग किया. उन्होंने कहा कि यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि उनकी साधना, मेहनत और भगवान के प्रति आस्था का परिणाम है. प्रतिमा के हर हिस्से को बेहद बारीकी से तैयार किया गया है, जिससे भगवान सिंगोली श्याम का स्वरूप बिल्कुल जीवंत दिखाई देता है. यही कारण है कि प्रतिमा देखने वाले लोग इसकी सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो रहे हैं. इस कलाकृति की सबसे खास बात यह है कि प्रतिमा पूरी तरह हाथों से तैयार की गई है. इसमें किसी भी प्रकार की मशीन का इस्तेमाल नहीं किया गया. प्रतिमा बनाने के लिए मिट्टी में फेविकोल और पानी का विशेष मिश्रण तैयार किया गया, जिससे मजबूती और सुंदरता दोनों बनी रहें.
इतना ही नहीं, प्रतिमा पर बारीक नक्काशी करने के लिए राजेंद्र शर्मा ने अपने हाथों से ही विशेष औजार तैयार किए. इन्हीं औजारों की मदद से उन्होंने प्रतिमा के चेहरे, वस्त्र और आभूषणों की बारीकियों को उकेरा, जो इस कलाकृति को बेहद खास बनाती हैं.राजेंद्र शर्मा ने बताया कि उन्होंने किसी भी संस्थान से मूर्तिकला की औपचारिक शिक्षा नहीं ली है, उन्हें इस कला की पहली प्रेरणा अपने बड़े भाई जगदीश शर्मा से मिली. इसके बाद उन्होंने ‘ॐ’ को अपना आध्यात्मिक गुरु मानकर साधना और निरंतर अभ्यास के माध्यम से अपनी कला को निखारा. उनका मानना है कि सच्ची लगन, मेहनत और ईश्वर में विश्वास हो तो बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के भी व्यक्ति अपनी अलग पहचान बना सकता है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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