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ISIS की ‘मेमसाहबों’ का काला सच: सीरिया में महिला को बनाया था गुलाम, लौटते ही कानून के पंजे में फंसी

नई दिल्‍ली. सात साल तक सीरिया के तपते रेगिस्तानों और शरणार्थी शिविरों की कैद काटने के बाद जब कौसर अहमद और उनकी बेटी ज़ैनाब ने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर कदम रखा तो उन्हें लगा था कि सफर खत्म हो गया. लेकिन असल में उनके गुनाहों का हिसाब अब शुरू हुआ है. दोनों पर आरोप है कि उन्होंने सीरिया में आईएसआईएस के साये में न केवल आतंक का साथ दिया बल्कि मानवता को शर्मसार करते हुए एक महिला को गुलाम बनाकर रखा. आज सिडनी और मेलबर्न की अदालतें उस खौफनाक सच का सामना कर रही हैं, जिसने आधुनिक युग में मध्यकालीन क्रूरता को जिंदा कर दिया था.

सिडनी और मेलबर्न में हुई इन गिरफ्तारियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है. शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस (AFP) ने कौसर अहमद (54) और उनकी बेटी ज़ैनाब अहमद (31) पर मानवता के खिलाफ अपराध और गुलामी से संबंधित आरोप तय किए हैं. पुलिस के अनुसार ये महिलाएं 2014 में अपने परिवार के साथ सीरिया गई थीं, जहां उन्होंने कथित तौर पर अपने घर में एक महिला को गुलाम बनाकर रखा था.

क्‍या है पूरा मामला?· गंभीर धाराएं: कौसर और ज़ैनाब पर गुलामी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है जिसमें दोषी पाए जाने पर अधिकतम 25 साल की जेल की सजा हो सकती है.

· आतंकवाद का आरोप: इनके अलावा 32 वर्षीय जनई सफर को सिडनी एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया. उस पर आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में शामिल होने का आरोप है, जिसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है.

· स्वदेश वापसी: यह समूह (4 महिलाएं और 9 बच्चे) गुरुवार को ही सीरिया के शरणार्थी शिविरों से ऑस्ट्रेलिया पहुंचा था. ये लोग पिछले 7 सालों से वहां हिरासत में थे.

· सरकार का रुख: प्रधानमंत्री अल्बनीज ने स्पष्ट किया कि नागरिक होने के नाते उन्हें पासपोर्ट और प्रवेश का अधिकार है लेकिन उनके द्वारा किए गए अपराधों के लिए उन पर सख्त कार्रवाई होगी.

· बच्चों की स्थिति: सरकार ने बच्चों के प्रति सहानुभूति जताई है, उन्हें अपने माता-पिता के फैसलों का शिकार बताया गया है और उन्हें पुनर्वास सहायता दी जाएगी.

सवाल-जवाब

इन महिलाओं पर ‘गुलामी’ के आरोप क्यों लगे हैं?

ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस के अनुसार कौसर और ज़ैनाब अहमद ने 2014 से सीरिया में रहने के दौरान अपने घर पर एक महिला को जबरन बंधक बनाकर रखा था और उससे गुलामों की तरह व्यवहार किया था. यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है.

क्या ऑस्ट्रेलिया सरकार ने इन महिलाओं को वापस लाने में मदद की?

नहीं, सरकार के अनुसार इन 13 महिलाओं और बच्चों ने बिना किसी आधिकारिक सहायता के स्वदेश लौटने की योजना बनाई थी. हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां उनकी गतिविधियों पर पहले से नजर रख रही थीं.

वर्तमान में कानूनी स्थिति क्या है?

अहमद मां-बेटी को सोमवार तक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि जनई सफर की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है. उनकी अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी.

सीरियाई शिविरों में अभी भी कितने ऑस्ट्रेलियाई नागरिक मौजूद हैं?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब भी लगभग 21 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अल-रोज कैंप (al-Roj camp) में मौजूद हैं. 2022 में भी सरकार ने कुछ महिलाओं और बच्चों को वहां से निकाला था.

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