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Indians In Australia : Product Manager Job | 1 करोड़ की नौकरी छोड़ी, भारतीय महिला विदेश में कर रही झाड़ू-पोछा

Last Updated:May 07, 2026, 20:09 IST

मुंबई की श्वेता देसाई की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, जिन्होंने लंदन में 1 करोड़ रुपये के सालाना पैकेज वाली ‘हेड ऑफ प्रोडक्ट’ की नौकरी छोड़कर मेलबर्न में Airbnb अपार्टमेंट्स की सफाई और लॉन्ड्री का काम शुरू किया. वो सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए अपनी इस जर्नी को ‘सेल्फ-डिस्कवरी’ बताते हुए लोगों को समझा रही हैं कि पैसा ही असली आजादी है.1 करोड़ की नौकरी छोड़ी, भारतीय महिला विदेश में कर रही झाड़ू-पोछा, VideoZoomभारतीय महिला ने सोशल मीडिया पर शेयर की स्टोरी

मेलबर्न: कहते हैं कि वक्त का पहिया कब घूम जाए, कोई नहीं जानता. ऐसा ही कुछ हुआ मुंबई की रहने वाली श्वेता देसाई के साथ, जो कभी लंदन में 1 करोड़ रुपये की सैलरी पाती थीं और ‘क्वीन साइज’ लाइफ जीती थीं. उनके पास ब्रांडेड बैग्स, महंगा मेकअप और लग्जरी लाइफस्टाइल सब कुछ था, लेकिन आज वही श्वेता सात समंदर पार मेलबर्न में झाड़ू-पोछा करने पर मजबूर हैं. जब श्वेता ने खुद सोशल मीडिया पर अपनी ये कहानी सुनाई तो सुनने वाले दंग रह गए. अब वो वीडियो बनाकर लोगों को पैसा, पावर और लाइफ पर ‘ज्ञान’ दे रही हैं.

लंदन की ‘क्वीन’ से मेलबर्न की ‘क्लीनर’ तक का सफर

श्वेता की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. साल 2008 में वे पढ़ाई के लिए लंदन गई थीं. वहां 15 साल तक दिन-रात एक करके उन्होंने कॉर्पोरेट जगत में अपनी धाक जमाई और एक बड़ी वेबसाइट में ‘हेड ऑफ प्रोडक्ट’ जैसा ऊंचा पद हासिल किया. साल 2023 तक उनकी सलाना कमाई करीब 1 लाख पाउंड यानी 1 करोड़ रुपए थी.एक दिन अचानक उनकी जिंदगी ने पलटी मारी. श्वेता के पति को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में नौकरी मिल गई और वो ने अपने परिवार और बच्चों की खातिर अपना जमा-जमाया करियर और करोड़ों का पैकेज कुर्बान कर दिया.

मेलबर्न पहुंचते ही बदल गई पहचान

लंदन की ‘हाई-फ्लाइंग’ लाइफ मेलबर्न पहुंचते ही जमीन पर आ गई. श्वेता ने महसूस किया कि ऑस्ट्रेलिया का जॉब मार्केट लंदन से बिल्कुल अलग है. वहां आपकी डिग्री और पुराने अनुभव से ज्यादा ‘लोकल एक्सपीरियंस’ को अहमियत दी जाती है. महीनों तक बेरोजगार रहने के बाद, श्वेता ने वो काम चुना जिसे करने में शायद बड़े-बड़े लोग हिचकिचाएं. उन्होंने Airbnb अपार्टमेंट्स की सफाई और लॉन्ड्री का काम शुरू कर दिया.श्वेता का कहना है कि जब उनके नाम के आगे से ‘बड़ा टाइटल’ और ‘बड़ा वेतन’ हट गया, तब उन्हें पता चला कि असली श्वेता कौन है.

‘पैसा मतलब आजादी’

अक्सर लोग कहते हैं कि पैसा ही सबकुछ नहीं होता, लेकिन श्वेता की सोच अब बदल चुकी है. वे साफ कहती हैं कि ‘पैसा मतलब आजादी है’. श्वेता अब खुद को एक लाइफ कोच के तौर पर पेश कर रही हैं. सफाई के काम के साथ-साथ वे बच्चों को पढ़ाती भी हैं और उन्होंने ‘द रीबिल्ड रूम’ नाम से एक वॉट्सऐप कम्युनिटी भी शुरू की है.वो अब उन महिलाओं और प्रवासियों को रास्ता दिखा रही हैं जो आइडेंटिटी क्राइसेस से जूझ रहे हैं. जिसे दुनिया ‘स्किल वेस्टेज’ कहती है, श्वेता ने उसे ‘सेल्फ-डिस्कवरी’ यानी खुद को खोजने का जरिया बना लिया है.

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