आमेर-जयगढ़ रोप-वे पर अचानक लगी ब्रेक, हाईकोर्ट पहुंचा मामला, टेंडर प्रक्रिया बनी विवाद की वजह

Last Updated:May 08, 2026, 23:33 IST
Amer Nahargarh Jaigarh Ropeway Project: राजस्थान हाईकोर्ट ने आमेर नाहरगढ़ जयगढ़ रोप वे परियोजना पर रोक लगा दी है. इस प्रोजेक्ट में टेंडर और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं. राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान टेंडर प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए. अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मई को होगी.
राजस्थान के सबसे बड़े रोपवे प्रोजेक्ट पर रोक, टेंडर में अनियमितता के आरोप
जयपुर. जयपुर से जुड़ी एक बड़ी परियोजना फिलहाल कानूनी अड़चन में फंस गई है. राजस्थान हाईकोर्ट ने आमेर-नाहरगढ़-जयगढ़ रोप-वे परियोजना पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने 2 फरवरी 2026 को दी गई प्रारंभिक अनुमति को फिलहाल स्थगित करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मई को होगी. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पर्यटन और विकास से जुड़ी इस परियोजना पर नई बहस शुरू हो गई है.
मामला उस समय कोर्ट पहुंचा जब शिवम प्राइम इंफ्रा प्रोजेक्ट्स ने रोप-वे की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए. कंपनी ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और पारदर्शिता नहीं बरती गई. याचिका में यह भी कहा गया कि बिना उचित विज्ञापन के काम आगे बढ़ाया गया और RTPP एक्ट का पालन नहीं किया गया. इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभि गोयल ने पैरवी की.
टेंडर प्रक्रिया पर सवाल, कोर्ट ने मांगा जवाबराजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान टेंडर प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए. याचिका में दावा किया गया कि इतनी बड़ी परियोजना के लिए जरूरी प्रक्रियाओं को ठीक तरह से नहीं अपनाया गया.
याचिकाकर्ता का कहना है कि रोप-वे परियोजना से जुड़ी अनुमति और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता दिखाई नहीं दी. आरोप लगाया गया कि नियमों के तहत जिस तरह सार्वजनिक सूचना और प्रक्रिया होनी चाहिए थी, वह पूरी तरह नहीं अपनाई गई. कोर्ट ने इन दावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है.
पर्यावरण को लेकर भी उठी चिंताइस मामले में सिर्फ टेंडर प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को लेकर भी चिंता जताई गई है. याचिका में कहा गया कि करीब 80 करोड़ रुपये की इस योजना में पर्यावरणीय पहलुओं को नजरअंदाज किया गया. साथ ही यह भी दावा किया गया कि प्रतिवादी कंपनी का लगभग 350 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकता है.
आमेर, नाहरगढ़ और जयगढ़ का इलाका ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है. यहां बड़ी परियोजनाओं को लेकर पहले भी पर्यावरण से जुड़े सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में रोप-वे परियोजना पर रोक लगने के बाद अब पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है.
19 मई की सुनवाई पर टिकी नजरेंफिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद परियोजना से जुड़ी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी. अब सभी की नजर 19 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर है. उसी दिन यह साफ हो सकता है कि कोर्ट आगे क्या रुख अपनाता है और परियोजना का भविष्य किस दिशा में जाएगा.
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास परियोजनाओं में नियमों और पर्यावरणीय संतुलन को कितना महत्व दिया जा रहा है. जयपुर के ऐतिहासिक क्षेत्र से जुड़ी इस परियोजना पर अब कानूनी लड़ाई और तेज होती दिख रही है.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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