पैकेट के फ्रंट पर लिखा होगा बीमारियों का हिसाब! प्रोसेस्ड फूड के पैकेट पर SC का ऐतिहासिक आदेश, अब न पचेंगी छिपी सामग्रियां

हर रोज आप चिप्स, बिस्कुट, नमकीन, भुजिया जैसी न जानें कितनी चीजों का सेवन करते हैं. इनमें अधिकांश प्रोसेस्ड फूड होता है. प्रोसेस्ड फूड को बनाने में कई तरह के हानिकारक केमिकल्स मिलाए जाते हैं लेकिन क्या कभी आपको इस बात का पता चलता है. अब आपको चलेगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर चाबुक चला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से फूड पैकेट के फ्रंट पर उसमें मौजूद सामग्रियों की लिस्ट या लेबलिंग लगाने की व्यवस्था करने को कहा है. इससे उपभोक्ताओं को यह पता चल सकेगा कि वह जो चीज खा रहा है उसमें क्या-क्या मिला है. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है. कोर्ट ने कहा कि राज्य का दायित्व केवल ऐसे कदमों से बचना नहीं है, जो लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सकारात्मक कदम उठाना भी है. कोर्ट के मुताबिक फ्रंट-ऑफ-पैकेज न्यूट्रिशन लेबलिंग एक सहायक व्यवस्था के रूप में काम करेगी. इससे पैकेट खरीदते समय उपभोक्ता को खाद्य पदार्थ में मौजूद पोषक तत्वों और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की जानकारी आसानी से समझ आ सकेगी. आखिर इसका हमारी सेहत पर क्या असर पड़ेगा इसके लिए हमने अपोलो अस्पताल की पूर्व चीफ डायटीशियन डॉ. प्रियंका रोहतगी से बात की.
कितना नुकसानदेह है छुपी हुई सामग्रियां
डॉ. प्रियंका रोहतगी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का यह महान फैसला है. दरअसल, प्रोसेस्ड फूड हमारी सेहत के लिए अति खतरनाक है. इसमें कई तरह के इतने खतरनाक केमिकल मिलाए जाते हैं जिनसे ब्रेन सहित प्रमुख अंगों पर सीधा असर होता है. जितने भी पैकेट में बंद फूड आते हैं, उनमें सामग्रियों की सूची बमुश्किल ही होती है. अगर होती भी है तो बहुत बारीक अक्षरों में पीछे की ओर होती है. सबसे चिंता की बात यह है कि कुछ कंपनियां सामग्रियों का नाम तो लिखती है लेकिन इतने कोड भाषा में लिखती है जिसका मतलब शायद ही किसी को चलता है. जैसे चिप्स, कुरकुरे आदि में हिडेन सॉल्ट मिलाया जाता है. इसके साथ ही बच्चों के कई फूड में खतरनाक कलर मिलाए जाते हैं. जब लिखने की बारी आती है तो पैकेटबंद डिब्बे पर कलर के रूप में ई-2, ई-21 या ई-26 जैसे शब्द लिखे होते हैं. अब इन चीजों का मतलब कौन जानें. लेकिन ये सब खतरनाक केमिकल होते हैं. जैसे E-211 सोडियम बेंजोएट होता है जो सॉस, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और डिब्बा बंद आचार में फंगस और बैक्टीरिया को पनपने से रोकने के लिए मिलाया जाता है. जब सोडियम बेंजोएट विटामिन सी के साथ मिलता है तो यह बेंजीन नामक कैंसरकारी तत्व बना सकता है. यह लिवर, किडनी और ब्रेन पर बहुत बुरा असर करता है और इससे बच्चों को ज्यादा खतरा है. इसलिए इसका ज्यादा सेवन हमारे लिए बेहद नुकसानदेह है. इसी तरह E-260 एसेटिक एसिड को कहा जाता है. यह खाद्य पदार्थों में अम्लीयता बनाए रखने और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उपयोग किया जाता है. लेकिन अधिक मात्रा में सेवन से पेट की परत में सूजन, अल्सर, पेट दर्द और गंभीर एसिड रिफ्लक्स हो सकती है. खाद्य पदार्थों में एसिड रेगुलेटर मिलाए जाते हैं जिसे आईएनएस 330 लिखा जाता है या साइट्रिक एसिड लिखा होता है. लेकिन यह नेचुरल साइट्रिक एसिड से बहुत अलग है. आर्टिफिशियल कलर भी बहुत घातक है. ये सारे हानिकारक रसायन सीधे लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं. लिवर को नियमित कामों में बाधा पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं, ये रसायन पेट में गुड बैक्टीरिया को भी मार देते हैं. इससे धीरे-धीरे लिवर खराब होने लगता है. इसलिए इन चीजों का कभी भी लगातार सेवन नहीं करना चाहिए. अगर कुरकुरे-मुरमुरे की आदत लग गई तो लिवर को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
क्या होता है अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड
डॉ प्रियंका रोहतगी ने बताया कि जब हम लोग गेंहू की रोटी बनाते हैं तो यह एकदम नेचुरल होता है. लेकिन जब हम गेंहू से छिल्के को हटाकर उसका दरदरा बनाते हैं तो यह सूजी हो गई. यह प्रोसेस्ट चीज है. लेकिन जब इसी गेंहू से छिल्के भी हटा लिए और उसे साफ करने के लिए और ज्यादा सफेद बनाने के लिए उसमें केमिकल डाले और ज्यादा स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें अन्य केमिकल डाले तो यह अल्ट्रा प्रोसेस्ड हो गया. कुरकुरे, चिप्स, बिस्कुट जैसी ज्यादातर पैकेटबंद फूड मैदा से ही बने होते हैं और ये सब प्रोसेस्ड फूड हो गया. इसी तरह मक्के को चक्की में पीसकर जब आटा बनाते हैं तो यह नेचुरल हुआ लेकिन जब इससे पॉपकॉर्न बनाते हैं तो यह प्रोसेस्ड हो गया लेकिन जब इससे कॉर्न फ्लेक्स बनाते हैं तो यह अल्ट्रा प्रोसेस्ड हो गया. चिप्स, नमकीन, कोल्ड्रिंक्स, फ्रोजन पिज्जा या फ्रोजन फूड्स, बीयर, बेकरी आइटम, साइडर, पनीर, बिस्कुट, आइसक्रीम, केक मिक्स, जेली, जैम, शर्बत, सॉस, मिठाई, सूप, वाइन, प्रिजर्व सब्जियां, डिब्बाबंद फल, भोजन आदि कई अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड के उदाहरण हैं.
प्रोसेस्ड फूड से नुकसान
डॉ. प्रियंका रोहतगी ने बताया कि प्रोसेस्ड फूड का सबसे ज्यादा नुकसान बच्चों को होता है. इसमें मिले एसिड रेगूलेटर, फूड रेगुलेटर, एडेड आईएनएस 330 जैसी चीजें सीधे कई बीमारियों को दावत देती है. सबसे पहले ये लिवर के काम को प्रभावित करता है. इसके बाद लंबे समय तक यह ब्रेन पर असर डालता है. आगे जाकर ऐसे बच्चों में जो बहुत ज्यादा इन चीजों का सेवन करते हैं, उनमें बौद्धिक विकास नहीं हो पाता. लिवर का फंक्शन प्रभावित होता है. इन एसिडिक केमिकल से पेट में गुड बैक्टीरिया मरने लगते हैं जिससे पेट की लाइनिंग कमजोर होती है जिससे ब्रेन को सही से सिग्नल समझने में दिक्कत होती है. इस कारण बच्चों में अटेंशन डेफिसीट हो सकता है. बच्चों को किसी चीज पर फोकस करने में परेशानी होती है. वहीं अक्सर बच्चा स्ट्रेस में रहता है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि इससे पता चलेगा कि फूड में कितनी खतरनाक चीजें मौजूद है.



