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महराजगंज के चौक बाजार में गोरक्षनाथ का मंदिर, हड़प्पा सभ्यता जितना प्राचीन माना जाता है नाथ संप्रदाय, जानें

Last Updated:August 16, 2026, 11:19 IST

महराजगंज के चौक बाजार में गोरक्षनाथ का मंदिर है. नाथ संप्रदाय की प्राचीनता हड़प्पा सभ्यता तक मानी जाती है. गोरक्षनाथ ने तंत्रयान व पंचमाकर का विरोध किया और पूरे भारत का भ्रमण किया. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि हड़प्पा सभ्यता के उत्खनन में मिली पुजारी की मूर्ति आदि योगी के रूप में थी. हालांकि, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि वह मूर्ति गोरक्षनाथ की थी, लेकिन वह किसी योगी समुदाय के व्यक्ति की रही होगी. इस प्रकार, नाथ संप्रदाय की प्राचीनता उस काल तक मानी जाती है.

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महराजगंज: जिले के चौक बाजार में गोरक्षनाथ का एक मंदिर स्थित है. इसी तरह महराजगंज जिले से सटे नेपाल और गोरखपुर में भी गोरखनाथ के मंदिर मौजूद हैं. यह मंदिर नाथ संप्रदाय से जुड़ा हुआ है और गोरक्षनाथ की प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ा रहा है. जिले के निचलौल स्थित राजेंद्र प्रसाद ताराचंद महाविद्यालय में इतिहास के प्रवक्ता डॉ. बृजेश पांडेय के अनुसार, नाथ संप्रदाय की प्राचीनता बहुत पुराने समय तक जाती है.

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि हड़प्पा सभ्यता के उत्खनन में मिली पुजारी की मूर्ति आदि योगी के रूप में थी. हालांकि, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि वह मूर्ति गोरक्षनाथ की थी, लेकिन वह किसी योगी समुदाय के व्यक्ति की रही होगी. इस प्रकार, नाथ संप्रदाय की प्राचीनता उस काल तक मानी जाती है. आपकों बता दें कि नाथ संप्रादाय जुड़े कई स्थल महराजगंज के आसपास के इलाकों में पाया जाता है. जहां भारी संख्या में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं. नाथ संप्रदाय से जुड़े लोग हमेशा इन चीजों का विरोध करते आए हैं.

मंत्रयान और तंत्रयान का विरोध

समय के साथ मंत्रयान और तंत्रयान जैसी नई प्रवृत्तियां विकसित हुईं, जो पंचमकारी विचारधारा पर आधारित थीं. इनमें मदिरा, मैथुन, मुद्रा जैसी चीजें शामिल थीं, जिससे धर्म में कई विकृतियां उत्पन्न हुईं. इन विकृतियों का विरोध करने के लिए नाथ संप्रदाय और सिद्ध परंपरा का उदय हुआ. इसी परंपरा में नौ नाथ आए, जिनमें गोरक्षनाथ भी शामिल थे. गोरक्षनाथ जी ने विशेष रूप से तंत्रयान जैसी तामसिक प्रवृत्ति का कड़ा विरोध किया.

उन्होंने इस विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने और पंचमाकर का विरोध करने के लिए पूरे भारत का भ्रमण किया. इस दौरान उन्होंने उत्तर भारत का भी दौरा किया. अपनी यात्रा के क्रम में वे नेपाल भी गए, फिर चौक बाजार आए और उसके बाद गोरखपुर चले गए. गोरखपुर पहुंचने के बाद उन्होंने वहीं अपना स्थान स्थापित कर लिया.

About the AuthorRajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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Maharajganj,Mahrajganj,Uttar Pradesh

First Published :

August 16, 2026, 11:19 IST

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