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पुष्कर की नाग पहाड़ी पर अनोखा नीलकंठ मंदिर, बिना नींव खड़ा है सदियों पुराना शिव धाम, सावन में उमड़ते हैं श्रद्धालु

Last Updated:August 11, 2026, 11:27 IST

Neelkanth Temple in Pushkar: अजमेर से 16 किलोमीटर दूर पुष्कर की नाग पहाड़ी पर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच भगवान नीलकंठ महादेव का प्राचीन मंदिर स्थित है. मान्यता है कि बिना मजबूत नींव के खड़ा यह मंदिर सतयुग से जुड़ा है. मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद प्राकृतिक गोमुख है, जिससे 24 घंटे जल प्रवाह होता रहता है. सावन में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और इसी जल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं.

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अजमेर. जिले से 16 किलोमीटर दूर तीर्थ नगरी पुष्कर की नाग पहाड़ी पर प्रकृति की गोद में भगवान नीलकंठ महादेव का एक प्राचीन और अनोखा मंदिर स्थित है. घने जंगल और पहाड़ियों के बीच बना यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी खास पहचान रखता है. मान्यता है कि यह मंदिर बिना किसी मजबूत नींव के खड़ा है.

मंदिर के महंत बताते है कि इस मंदिर का उल्लेख पद्म पुराण में भी मिलता है. मंदिर में भगवान नीलकंठ महादेव अपने परिवार के साथ विराजमान हैं, यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यही वजह है कि सावन के पवित्र महीने में यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है.

गोमुख से 24 घंटे जल प्रवाह होता हैमंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद प्राकृतिक जलकुंड है, इस कुंड का पानी कभी खत्म नहीं होता. यहां 24 घंटे जल का प्रवाह बना रहता है जिसे गोमुख के नाम से जाना जाता है. श्रद्धालु इसी जल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, पहाड़ी और जंगल के बीच लगातार बहता यह पानी मंदिर की प्राकृतिक खूबसूरती को और बढ़ा देता है. मंदिर के महंत आगे बताते है कि यह स्थान प्राचीन काल से ही तप और साधना की भूमि रहा है. मान्यता है कि सतयुग में महर्षि गौतम ने इसी स्थान पर तपस्या की थी, इसी कारण इस स्थान को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

मनोकामनाएं पूर्ण होती हैयहां मंदिर परिसर में भगवान नीलकंठ के अलावा अन्नपूर्णा माता और भीमा माता के मंदिर भी मौजूद हैं. श्रद्धालु नीलकंठ महादेव के दर्शन के साथ इन दोनों मंदिरों में भी पूजा-अर्चना करते हैं, मान्यता है कि यहां पर आने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. अगर आप भी मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले पुष्कर आना होगा. पुष्कर आने के बाद आपको नाग पहाड़ आना होगा यहां कुछ दूर तक दुपहिया वाहन चले जाते हैं, लेकिन आगे का सफर पैदल ही तय करना होता है. थोड़ा आगे बढ़ते हैं तो पहाड़ी की चढ़ाई चढ़नी होती है. 15 मिनट पैदल चलने के बाद भगवा रंग की दीवार नजर आती है. इस दीवार की बगल से सीढ़ियां ऊपर की ओर जाती हैं और इसी जगह पर महादेव के दर्शन होते हैं.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Ajmer,Rajasthan

First Published :

August 11, 2026, 11:27 IST

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