ये हैं राजस्थान के ‘करोड़पति’ किसान, रेतीली जमीन पर उगा रहे ‘सोना’, जानें इनकी कमाई का राज

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राजस्थान के करोड़पति किसान! रेतीली जमीन पर उगा रहे ‘सोना’, जानें कमाई का राज
Last Updated:June 19, 2026, 10:18 IST
Rajasthan Crorepati Farmers: राजस्थान में पारंपरिक को छोड़कर आधुनिक खेती जिसमें पॉलीहाउस और जैविक तरीका अपनाने वाले कई किसान सालाना 1 से 17 करोड़ रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. उन्नत तकनीकों की बदौलत इन किसानों ने रेगिस्तान और रेतीली जमीन को मुनाफे का केंद्र बना दिया है. ड्रिप इरिगेशन, पॉलीहाउस खेती और ऑर्गेनिक फार्मिंग जैसी तकनीकों ने कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है. इससे न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. राजस्थान के कई जिलों में ऐसे सफल और प्रगतिशील किसान सामने आए हैं, जिन्होंने खेती को एक लाभदायक व्यवसाय में बदल दिया है. आइए राजस्थान के उन टॉप किसानों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने खेती को सफल व्यवसाय में परिणत कर करोड़ों में सालाना मुनाफा कमा रहे हैं.
जयपुर के किसान लेखराम यादव ने पारंपरिक खेती को छोड़कर जैविक खेती, डेयरी और एग्रोटूरिज्म को सफल व्यवसाय में बदल दिया है. उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती को लाभ का बड़ा साधन बना दिया है. ड्रिप इरिगेशन, ऑर्गेनिक फार्मिंग और बेहतर पशुपालन तकनीकों के जरिए उन्होंने उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया है. लेखराम यादव का फार्म आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है. उनके एग्रोटूरिज्म मॉडल ने खेती को पर्यटन से जोड़कर नई संभावनाएं खोली हैं. इन सभी प्रयासों के दम पर उनका अनुमानित सालाना टर्नओवर लगभग 17 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो उनकी मेहनत और नवाचार का परिणाम है.
जयपुर जिले के गुड़ा कुमावतान गांव के किसान खेमाराम चौधरी ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर खेती में नया मुकाम हासिल किया है. खेमाराम चौधरी ने इजरायली तकनीक की मदद से पॉलीहाउस खेती की शुरुआत की, जिससे पारंपरिक खेती की तुलना में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. खेमाराम चौधरी मुख्य रूप से खीरा और शिमला मिर्च जैसी उच्च मूल्य वाली सब्जियों की खेती करते हैं. नियंत्रित वातावरण में की जाने वाली इस खेती के कारण उन्हें सालभर बेहतर उत्पादन मिलता है और बाजार में अच्छी कीमत भी प्राप्त होती है. उनकी इस तकनीक आधारित खेती से सालाना 2 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा होता है, जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है.
भरतपुर के रहने वाले 12वीं पास किसान गोविंद सिंह ने पारंपरिक खेती को छोड़कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए सफलता की नई मिसाल कायम की है. उन्होंने मुख्य रूप से भिंडी की वैज्ञानिक तरीके से खेती शुरू की, जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता प्राप्त हुई है. आधुनिक सिंचाई प्रणाली, उन्नत बीज और सही फसल प्रबंधन के जरिए वे सालभर अच्छी पैदावार हासिल कर रहे हैं. पारंपरिक खेती की तुलना में उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई है. गोविंद सिंह की मेहनत और नवाचार का परिणाम है कि वे भिंडी की खेती से सालाना लगभग 2 करोड़ रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं. उनकी कहानी अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है.
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जयपुर के रहने वाले किसान रमेश चौधरी ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती में नई सफलता हासिल की है. वे पॉलीहाउस में टमाटर, खीरा और फूलों की उन्नत खेती करते हैं, जिससे उन्हें सालभर बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता मिलती है. नियंत्रित वातावरण में की जाने वाली इस खेती के कारण फसलें कम नुकसान के साथ अधिक मुनाफा देती हैं. ड्रिप इरिगेशन और वैज्ञानिक खेती के तरीकों ने उनकी आय को कई गुना बढ़ा दिया है. रमेश चौधरी की मेहनत और आधुनिक सोच का परिणाम है कि उनकी सालाना कमाई लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये के बीच पहुंच चुकी है. उनकी सफलता ने आसपास के किसानों को भी प्रेरित किया है.
दिलराज मीणा जयपुर की बस्सी तहसील के रतनपुर गांव के 20 वर्षीय युवा प्रगतिशील किसान हैं. उनके पास कुल 10 पॉलीहाउस हैं जिनमें वे आधुनिक तकनीक से खेती करते हैं. वे मुख्य रूप से टमाटर, खीरा और अन्य सब्जियों की उन्नत किस्मों का उत्पादन करते हैं. वैज्ञानिक पद्धति, ड्रिप इरिगेशन और बेहतर प्रबंधन के कारण उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बहुत बेहतर हैं. दिलराज मीणा साल भर खेती से लगभग 80 से 90 लाख रुपये का कारोबार कर रहे हैं. उनकी सफलता क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है. वे कृषि में नए प्रयोग और तकनीक अपनाकर लगातार आगे बढ़ रहे हैं और भविष्य में कृषि क्षेत्र. में निर्यात की योजना भी बना रहे हैं.



