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‘अन्न का कटोरा’ प्यासा! श्रीगंगानगर में पानी के बिना रुकी धान की रोपाई, किसानों ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

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किसानों पर दोहरी मार! सिंचाई का पानी गायब, प्रदूषित जल से फसल बर्बादी का खतरा

Last Updated:July 08, 2026, 10:03 IST

Sri Ganganagar Water Crisis: श्रीगंगानगर जिले में कमजोर मानसून और घग्गर नदी में पर्याप्त पानी नहीं आने से भीषण जल संकट गहरा गया है. इसका सीधा असर खरीफ सीजन की खेती पर पड़ रहा है. खेतों में धान की पनीरी तैयार होने के बावजूद सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं होने से रोपाई का काम ठप पड़ा है. किसानों का आरोप है कि रंगमहल स्केप में सेम नाले का खारा और प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है, जिसकी लैब जांच में खेती के लिए अनुपयुक्त होने की बात सामने आई है. इससे खेतों की उर्वरता प्रभावित होने और भूमि के बंजर होने का खतरा बढ़ गया है. जिन किसानों के पास ट्यूबवेल हैं, वे किसी तरह फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अन्य किसान बारिश और नहरों में स्वच्छ पानी आने का इंतजार कर रहे हैं.

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किसानों पर दोहरी मार! सिंचाई का पानी गायब, प्रदूषित जल से फसल बर्बादी का खतराZoomश्रीगंगानगर के सूरतगढ की घग्घर में जल संकट, दूषित पानी से संकट में धान की खेती,

श्रीगंगानगर. राजस्थान के सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में शुमार और ‘अन्न का कटोरा’ के नाम से प्रसिद्ध श्रीगंगानगर जिला इन दिनों इतिहास के सबसे गंभीर जल संकटों में से एक का सामना कर रहा है. कमजोर मानसून की बेरुखी और घग्गर नदी में पानी की भारी कमी ने पूरे इलाके में त्राहि-त्राहि मचा दी है. इस संकट का सबसे सीधा और घातक असर मौजूदा खरीफ सीजन की फसलों पर पड़ रहा है, जिससे अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं.

खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान (चावल) की बुवाई का समय तेजी से निकला जा रहा है. किसानों ने भारी लागत लगाकर खेतों में धान की पनीरी (पौध) तो तैयार कर ली है, लेकिन सिंचाई के लिए पानी की एक-एक बूंद मयस्सर नहीं हो रही है. पर्याप्त पानी न मिलने के कारण खेतों में रोपाई का काम पूरी तरह ठप पड़ा है. किसान लाचार होकर अपनी आंखों के सामने तैयार पौध को सूखते हुए देखने को मजबूर हैं.

प्रदूषित पानी का कहर: बंजर होने की आशंकासंकट के इस दौर में किसानों की मुसीबतें तब और बढ़ गईं, जब रंगमहल स्केप में सेम नाले का खारा और बेहद प्रदूषित पानी छोड़ दिया गया. आक्रोशित किसानों का आरोप है कि इस जहरीले पानी की जब लैब (प्रयोगशाला) में जांच कराई गई, तो यह खेती के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त और जानलेवा पाया गया. किसानों का दावा है कि यदि इस प्रदूषित पानी से सिंचाई की गई, तो उपजाऊ जमीन हमेशा के लिए बंजर हो जाएगी. यह स्थिति क्षेत्र के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा टाइम बम साबित हो सकती है.

ट्यूबवेल बनाम कुदरत का इंतजारवर्तमान में जिले के किसान दो गुटों में बंट गए हैं. जिन गिने-चुने संपन्न किसानों के पास निजी ट्यूबवेल की सुविधा है, वे जैसे-तैसे भारी खर्च उठाकर अपनी फसलों को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं. इसके विपरीत, क्षेत्र का एक बहुत बड़ा बहुसंख्यक और सीमांत किसान वर्ग पूरी तरह बेबस है. उनके पास कोई वैकल्पिक साधन नहीं है और वे केवल आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का या फिर नहरों में स्वच्छ पानी छोड़े जाने का इंतजार कर रहे हैं.

किसानों की मांग: त्वरित कार्रवाई और निष्पक्ष जांचहालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय किसान संगठनों और ग्रामीणों ने सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि:

खेतों को बचाने के लिए तुरंत नहरों के माध्यम से स्वच्छ सिंचाई जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.

रंगमहल स्केप में प्रदूषित और खारा पानी छोड़ने के जिम्मेदार अधिकारियों व तत्वों के खिलाफ कड़ी और निष्पक्ष जांच हो.

यदि समय रहते प्रशासन ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो ‘अन्न का कटोरा’ कहलाने वाला यह क्षेत्र इस साल बड़े आर्थिक और खाद्यान्न संकट की चपेट में आ सकता है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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