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Tips and Tricks: शहद की शुद्धता पर शक है? लाल रंग बताएगा मिलावट का संकेत, जानें जांच का तरीका

Last Updated:August 24, 2026, 13:02 IST

How to Detect Adulteration in Honey: बाजार से खरीदा गया शहद असली है या उसमें चीनी की मिलावट है, इसे लेकर अक्सर सवाल उठते हैं. इसके लिए पानी वाला घरेलू तरीका और कुछ रासायनिक परीक्षण बताए जाते हैं. पानी में शहद डालकर उसके घुलने का तरीका देखा जाता है, जबकि फिएहे परीक्षण में ईथर और रेसॉर्सिनॉल जैसे रसायनों के जरिए रंग में बदलाव की जांच की जाती है. इसी तरह एनिलीन क्लोराइड परीक्षण में भी रंग बदलने को मिलावट का संकेत माना जाता है. चमकीला लाल रंग दिखाई देने पर सावधानी बरतने की बात कही जाती है. हालांकि, सही पुष्टि के लिए खाद्य प्रयोगशाला में जांच कराना ज्यादा भरोसेमंद तरीका है.

शहद को सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है और यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग भी हमेशा बनी रहती है. लेकिन कई बार शहद के नाम पर मिलावटी या नकली उत्पाद भी बाजार में बिक सकते हैं. शहद में चीनी या गुड़ से जुड़ी मिलावट की पहचान के लिए फिएहे परीक्षण का इस्तेमाल किया जाता है. यह एक रासायनिक परीक्षण है, जिसमें शहद के नमूने को कुछ खास रसायनों के साथ मिलाकर रंग में होने वाले बदलाव को देखा जाता है. अगर परीक्षण के दौरान लाल रंग दिखाई देता है, तो शहद में मिलावट होने की आशंका मानी जाती है.

शहद की पहचान के लिए पानी वाला तरीका सबसे देसी तरीकों में से एक है. इसके लिए एक साफ गिलास में सामान्य तापमान का पानी लें और उसमें एक चम्मच शहद डालें. आम तौर पर लोग देखते हैं कि शहद पानी में किस तरह फैलता है. शुद्ध शहद तुरंत पानी में घुलता नहीं है और नीचे जाकर जमा रहता है, जबकि नकली शहद तेजी से पानी में घुल जाता है.

शहद जांचने के लिए फिएहे परीक्षण को बेहतर माना जाता है. इसके लिए सबसे पहले करीब 5 मिलीलीटर शहद का नमूना लिया जाता है. इसमें 5 मिलीलीटर ईथर मिलाया जाता है और दोनों को अच्छी तरह मिलाया जाता है. इसके बाद मिश्रण को कुछ समय के लिए बिना हिलाए रखा जाता है, ताकि उसमें मौजूद ईथर की परत अलग हो सके. जब परत अलग हो जाती है, तो ईथर वाली परत को पेट्री डिश में लिया जाता है. इसके बाद ईथर को पूरी तरह उड़ने दिया जाता है. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की जांच के लिए बचे हुए पदार्थ का इस्तेमाल किया जाता है.

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ईथर की परत हटाने के बाद परीक्षण के अगले चरण में रेसॉर्सिनॉल का इस्तेमाल किया जाता है. करीब 2 से 3 मिलीलीटर रेसॉर्सिनॉल घोल नमूने में मिलाया जाता है. इस घोल को तैयार करने के लिए 5 मिलीलीटर सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड में 1 ग्राम रेसॉर्सिनॉल मिलाने का उल्लेख किया गया है. रसायन मिलाने के बाद मिश्रण में होने वाले रंग के बदलाव को देखा जाता है. अगर इस प्रक्रिया के बाद लाल रंग दिखाई देता है, तो इसे शहद में चीनी या गुड़ से जुड़ी मिलावट की मौजूदगी का संकेत माना जाता है.

शहद में मिलावट की जांच के लिए एक अन्य रासायनिक तरीका एनिलीन क्लोराइड परीक्षण बताया जाता है. इस परीक्षण में भी सबसे पहले करीब 5 मिलीलीटर शहद का नमूना लिया जाता है. इसके बाद इसमें एनिलीन क्लोराइड का घोल मिलाया जाता है. दिए गए तरीके के मुताबिक, यह घोल तैयार करने के लिए 3 मिलीलीटर एनिलीन और हाइड्रोक्लोरिक एसिड का इस्तेमाल किया जाता है. रसायन मिलाने के बाद शहद और घोल को अच्छी तरह मिलाया जाता है. इसके बाद मिश्रण के रंग में होने वाले बदलाव पर ध्यान दिया जाता है.

एनिलीन क्लोराइड परीक्षण में रंग का बदलाव सबसे महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है. दिए गए परीक्षण के अनुसार, अगर शहद और रासायनिक घोल को मिलाने के बाद मिश्रण में चमकीला लाल रंग दिखाई देता है, तो इसे शहद में चीनी के अपमिश्रण का संकेत माना जाता है. यानी सामान्य भाषा में कहें तो परीक्षण के दौरान लाल रंग आने पर शहद के नमूने को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है. हालांकि, ऐसे परीक्षणों में इस्तेमाल होने वाले रसायन सामान्य घरेलू चीजें नहीं हैं और इनमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड तथा ज्वलनशील रसायन शामिल होते हैं.

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August 24, 2026, 13:02 IST

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