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Tirupati In Rajasthan I rajasthan news I jalore news I जालोर में राजस्थान का मिनी तिरुपति

Last Updated:June 16, 2026, 18:17 IST

Tirupati In Rajasthan:सायला में स्थित ओम श्री बालाजी महामंदिर की कहानी एक रहस्यमयी घटना से जुड़ी है. मान्यता है कि घर में रखी गई बालाजी की प्रतिमा के पास मौजूद गेहूं की कोठी अचानक ढह गई, जिसे श्रद्धालुओं ने दिव्य संकेत माना. इसी स्थान पर शुरू हुई आस्था की यह यात्रा आज भव्य ‘मिनी तिरुपति’ के रूप में लाखों भक्तों के विश्वास का केंद्र बन चुकी है.

जालोर. जिले के सायला तहसील में स्थित ओम श्री बालाजी महामंदिर आज न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि आस्था, विश्वास और चमत्कारों का जीवंत केंद्र बन चुका है. दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित यह भव्य मंदिर लोगों के बीच ‘मिनी तिरुपति’ के नाम से प्रसिद्ध हो रहा है. इस मंदिर की शुरुआत की कहानी सायला से कुछ ही दूरी पर स्थित आलासन गांव से जुड़ी है. बताया जाता है कि यहां एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी बालाजी मंदिर स्थापित था, जहां श्रद्धालुओं की गहरी आस्था थी. इसी आस्था के चलते एक पुरोहित परिवार ने वहां से बालाजी की प्रतिमा अपने घर ले आकर स्थापित की. घर में लाकर इस प्रतिमा को पारंपरिक रूप से मिट्टी की गेहूं की कोठी में रखा गया. कुछ महीनों बाद एक ऐसा अद्भुत घटनाक्रम हुआ जिसने पूरे परिवार और क्षेत्र की आस्था को और मजबूत कर दिया. बताया जाता है कि वह कोठी अचानक ढह गई, और इसके बाद यह विश्वास और गहरा हो गया कि यह स्थान स्वयं बालाजी की इच्छा से चुना गया है. इसके बाद उस पुरोहित परिवार ने वहीं पर बालाजी मंदिर की स्थापना कर उनकी विधिवत सेवा शुरू कर दी। यही स्थान आगे चलकर एक भव्य धार्मिक धाम के रूप में विकसित हुआ, जिसे आज लोग ‘सायला का बालाजी धाम’ या ‘मिनी तिरुपति’ के रूप में जानते हैं.

इसकी वास्तुकला में तिरुपति बालाजी मंदिर जैसी झलक

वर्तमान में जहां यह भव्य मंदिर स्थित है, वह भूमि अशोक जी पुरोहित और उनके भाइयों की सायला मुख्य हाईवे रोड पर स्थित पैतृक जमीन थी. खास बात यह रही कि जब मंदिर निर्माण का विचार सामने आया, तो सभी भाइयों ने एकजुट होकर अपने हिस्से की जमीन श्रद्धा भाव से मंदिर के लिए समर्पित कर दी. यह त्याग और आस्था की भावना इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है. ज्योतिषाचार्य प्रकाश शास्त्री ने लोकल 18 को जानकारी दी कि इस भव्य मंदिर का निर्माण दक्षिण भारत के मद्रास से बुलाए गए कुशल कारीगरों द्वारा करवाया गया, जिससे इसकी वास्तुकला में तिरुपति बालाजी मंदिर जैसी झलक स्पष्ट दिखाई देती है. मंदिर की नक्काशी, संरचना और दक्षिण भारतीय शैली इसे राजस्थान में एक अनोखी पहचान देती है. इस मंदिर की एक और विशेषता इसे बेहद खास बनाती है—यहां एक ही स्थान पर नौ ग्रहों की मूर्तियां स्थापित की गई हैं. इन मूर्तियों की स्थापना शास्त्रों और दिशानुसार की गई है, जिससे मंदिर का धार्मिक और वास्तु महत्व और भी बढ़ जाता है.  आज यह मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र बन चुका है. हर मंगलवार और शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और सुंदरकांड का पाठ भी होता है. भक्त यहां बालाजी को सवामणि, दाल-बाटी और चूरमा का भोग अर्पित करते हैं, और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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