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2 रन देकर चटकाए 5 विकेट…डेब्यू पर नाइट वॉचमैन बनकर किया कमाल, गुमनामी के अंधेरे में खो गया वो चालाक क्रिकेटर

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2 रन देकर लिए 5 विकेट, डेब्यू पर नाइट वॉचमैन बनकर किया कमाल, गुमनामी में खोया

Last Updated:July 09, 2026, 05:16 IST

Venkatapathy Raju birthday: 90 के दशक में अनिल कुंबले और राजेश चौहान के साथ भारत की खतरनाक स्पिन तिकड़ी बनाने वाले बाएं हाथ के चतुर स्पिनर वेंकटपति राजू का आज जन्मदिन है.दुबले शरीर के कारण ‘मसल्स’ के नाम से मशहूर राजू अपनी जादुई ‘फ्लाइट’ से बल्लेबाजों को चकमा देने में माहिर थे. चंडीगढ़ टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ महज 2 रन देकर 5 विकेट झटकने का उनका वो ऐतिहासिक स्पेल आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे घातक स्पेल में गिना जाता है.2 रन देकर लिए 5 विकेट, डेब्यू पर नाइट वॉचमैन बनकर किया कमाल, गुमनामी में खोया Zoomवेंकटपति राजू ने 16 टेस्ट में उन्होंने 71 विकेट लिए.

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 90 का दशक स्पिन गेंदबाजी के एक नए पुनरुत्थान का गवाह था. एक दौर था जब मनिंदर सिंह के टीम से बाहर होने के बाद भारतीय स्पिन डिपार्टमेंट को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी, जो अनिल कुंबले के आक्रामक अंदाज और राजेश चौहान के सटीक लेंथ के साथ मिलकर विरोधी बल्लेबाजों की गिल्लियां बिखेर सके. ऐसे समय में भारतीय क्रिकेट के क्षितिज पर उदय हुआ हैदराबाद के एक दुबले-पतले, शांत स्वभाव के लेकिन बेहद चतुर बाएं हाथ के स्पिनर का नाम था वेंकटपति राजू. आज इस जादुई स्पिनर का जन्मदिन है, जिन्होंने अपनी फ्लाइट और टर्न से दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था.

‘मसल्स’ नाम की दिलचस्प कहानी और वो बेखौफ फ्लाइटवेंकटपति राजू (Venkatapathy Raju) का शारीरिक ढांचा किसी पारंपरिक तेज गेंदबाज या गठीले खिलाड़ी जैसा नहीं था. वे बेहद दुबले-पतले और सामान्य कद-काठी के थे. उनकी इसी शारीरिक बनावट को देखकर दक्षिण अफ्रीका के खूंखार ऑलराउंडर ब्रायन मैक्मिलन ने मजाकिया लहजे में उन्हें ‘मसल्स’ निकनेम दिया था. मैदान पर भले ही राजू के पास बाहुबलियों जैसी ताकत न हो, लेकिन उनकी उंगलियों और कलाई में जो ताकत थी, उसने बड़े-बड़े दिग्गजों के पसीने छुड़ा दिए. राजू की सबसे बड़ी यूएसपी थी गेंद को हवा में फ्लाइट देना. वे किसी भी परिस्थिति में बल्लेबाज को ललचाने और हवा में गेंद को तैरता हुआ छोड़ने से पीछे नहीं हटते थे. हालांकि, इस आक्रामक शैली के कारण कभी-कभी उन्हें रन भी पड़ते थे, लेकिन वे विकेट चटकाने की अपनी जिद कभी नहीं छोड़ते थे.

वेंकटपति राजू ने 16 टेस्ट में उन्होंने 71 विकेट लिए.

डेब्यू पर ‘नाइट वॉचमैन’ का अनोखा रिकॉर्डसाल 1990 में न्यूजीलैंड दौरे पर क्राइस्टचर्च टेस्ट से राजू ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया था. दिलचस्प बात यह है कि इस मैच में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से पहले बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोरीं। भारत ने उन्हें पहली पारी में ‘नाइट वॉचमैन’ बनाकर भेजा. राजू ने क्रीज पर खूंटा गाड़ दिया और लगभग दो घंटे तक बल्लेबाजी करते हुए जुझारू 31 रन बनाए. विडंबना देखिए कि दूसरे छोर पर सीनियर बल्लेबाज आते और जाते रहे, लेकिन राजू टिके रहे। उनकी इस पारी के दौरान दूसरे छोर पर भारत के छह बल्लेबाज आउट हो गए. राजू के बल्ले से निकला यह 31 रन का स्कोर उनके पूरे टेस्ट करियर का सर्वोच्च स्कोर साबित हुआ. उन्होंने अपने करियर के 28 टेस्ट मैचों में 10 की औसत से कुल 240 रन बनाए.

जब 39 गेंदों में सिर्फ 2 रन देकर ढहा दिया श्रीलंका का किलावेंकटपति राजू के करियर का सबसे सुनहरा अध्याय साल 1990 में चंडीगढ़ टेस्ट में श्रीलंका के खिलाफ लिखा गया. यह उनके करियर का महज तीसरा टेस्ट था. इस मैच में राजू ने ऐसी फिरकी फेंकी कि श्रीलंकाई बल्लेबाज चकरी की तरह घूमते नजर आए. उन्होंने पहली पारी में सिर्फ 17.5 ओवर की गेंदबाजी की, जिसमें से 13 ओवर मेडन थे और महज 12 रन देकर उन्होंने 6 विकेट चटकाए. इस कातिलाना स्पेल का सबसे रोमांचक हिस्सा वह था जब उन्होंने केवल 39 गेंदों के भीतर महज 2 रन खर्च करके 5 श्रीलंकाई बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखा दी. इस दौरान श्रीलंका के चार बल्लेबाज खाता तक नहीं खोल सके, जबकि अरविंदा डी सिल्वा और अर्जुन रणतुंगा जैसे दिग्गज बल्लेबाज बोल्ड हो गए. श्रीलंका की पूरी टीम पहली पारी में सिर्फ 82 रनों पर सिमट गई और भारत ने यह मैच पारी और 8 रनों से जीता. राजू को उनके इस अविश्वसनीय प्रदर्शन के लिए करियर में पहली और इकलौती बार ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया.

घरेलू मैदानों के ‘सुल्तान’राजू के करियर का एक सच यह भी था कि वे भारतीय पिचों पर जितने खतरनाक थे, विदेशी पिचों पर उनका जादू उतना नहीं चल पाता था.आंकड़े गवाह हैं कि भारत में खेले 16 टेस्ट मैचों में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 71 विकेट चटकाए, वहीं विदेशी पिचों पर खेले 12 टेस्ट मैचों में उनके हाथ सिर्फ 22 विकेट ही लगे. इसी असंतुलन की वजह से वे लगातार टीम के अंदर-बाहर होते रहे. इसके बावजूद, साल 1994-95 में वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज में उन्होंने एक बार फिर अपना पुराना रंग दिखाया और 3 टेस्ट में 20 विकेट लेकर कैरेबियाई टीम की कमर तोड़ दी. साल 1999-2000 के रणजी सीजन में उन्होंने हैदराबाद को फाइनल तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका निभाई और उस सीजन में 52 विकेट झटके. घरेलू क्रिकेट में उनके नाम कुल 589 विकेट दर्ज हैं.

वर्ल्ड कप का सफर और आखिरी सलामराजू ने भारत के लिए 28 टेस्ट में कुल 93 विकेट हासिल किए. वहीं, वनडे क्रिकेट में भी उनका योगदान सराहनीय रहा. उन्होंने 1990 से 1996 के बीच भारत के लिए 53 वनडे मैच खेले, जिसमें उन्होंने 63 विकेट चटकाए. वे 1992 और 1996 के वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के मुख्य स्पिनर के रूप में खेले थे. एक और दिलचस्प आंकड़ा यह है कि वनडे में उनके कुल रन (32) उनके द्वारा लिए गए विकेटों की संख्या से लगभग आधे थे. साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता का वह ऐतिहासिक टेस्ट मैच उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच साबित हुआ, जहां उन्होंने मार्क वॉ के रूप में अपना आखिरी विकेट लिया था. दिसंबर 2004 में क्रिकेट को पूरी तरह अलविदा कहने के बाद भी राजू खेल से दूर नहीं हुए. उन्होंने कई टीमों को कोचिंग दी और भारतीय क्रिकेट टीम के चयनकर्ता की भूमिका भी बखूबी निभाई.

About the AuthorKamlesh Raiचीफ सब एडिटर

कमलेश राय वर्तमान में इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें

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