अब दूर होगी थानों की दूरी, 200 पुलिस स्टेशनों का बदलेगा दायरा, अपराध पर कसेगा शिकंजा

Last Updated:August 12, 2026, 09:37 IST
Rajasthan Police Station Reorganization: राजस्थान पुलिस ने रेस्पॉन्स टाइम में सुधार और अपराध पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए 200 थानों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की है. बढ़ती आबादी, शहरीकरण और असमान कार्यभार को देखते हुए डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने एडीजी बीजू जॉर्ज जोसफ की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है. यह कमेटी 10 दिनों में धरातलीय अध्ययन और एसपी के सुझावों के आधार पर रिपोर्ट देगी. इससे पुलिस कार्यप्रणाली सुव्यवस्थित होगी, मुकदमों की पेंडेंसी घटेगी और साइबर व महिला अपराधों पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी.
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राजस्थान पुलिस में बड़ा बदलाव, 200 थानों का सीमांकन होगा नए सिरे से, जानें क्या होगा फायदा
Jaipur: राजस्थान की पुलिसिंग में अब एक बड़ा सुधार देखने को मिलने वाला है. राज्य पुलिस मुख्यालय ने ज़मीनी हकीकत को समझते हुए एक ऐसा कदम उठाया है, जो आम जनता की सुरक्षा और पुलिस की कार्यशैली दोनों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. प्रदेश में तेज़ी से फैलते शहर, बढ़ती आबादी, नए औद्योगिक इलाके और बदलते दौर में अपराध के नए-नए तरीकों को देखते हुए लगभग 200 थानों के क्षेत्राधिकार (सीमाओं) को नए सिरे से तय किया जाएगा. इस पूरी व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने एक विशेष पहल की है. उन्होंने एडीजी कार्मिक बीजू जॉर्ज जोसफ की अगुवाई में 5 पुलिस अधिकारियों की एक टीम बनाई है, जो अगले 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें पुलिस मुख्यालय को सौंपेगी.
अक्सर देखा जाता है कि एक ही शहर में किसी एक थाने में दिन-रात फाइलों का ढेर लगा रहता है, जबकि पास ही के किसी दूसरे थाने में काम काफी कम होता है. राजस्थान के 50 से ज्यादा थाने ऐसे हैं जहाँ साल भर में महज 200 से 300 केस दर्ज होते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ शहरी या औद्योगिक थानों में मुकदमों की संख्या 1,000 के आंकड़े को भी पार कर जाती है. काम के इस असमान बोझ की वजह से पुलिसकर्मियों पर मानसिक दबाव तो बढ़ता ही है, साथ ही पेंडिंग मामलों की संख्या भी बढ़ती जाती है. काम का बँटवारा बराबर होने से अफसरों को मामलों की जांच (इन्वेस्टिगेशन) के लिए पूरा वक्त मिल सकेगा और पेंडिंग केसों का जल्दी निस्तारण हो पाएगा.
अब थानों से दूरी नहीं बनेगी मुसीबत, घटेगा रेस्पॉन्स टाइमजब किसी घटना की सूचना पुलिस को मिलती है, तो मौके पर पहुँचने में लगा एक-एक मिनट मायने रखता है. कई बार थानों का दायरा इतना अटपटा और लंबा होता है कि पुलिस को अपने ही इलाके के आखिरी कोने तक पहुँचने में काफी वक्त लग जाता है. इस नई योजना के तहत कमेटी कागजी आंकड़ों पर बैठने के बजाय ज़मीन पर उतरकर स्थिति को समझेगी. थाने से सबसे दूर वाले गांव या मोहल्ले तक पहुँचने में कितना समय लगता है, नेशनल हाईवे की क्या स्थिति है और पर्यटन स्थलों या धार्मिक स्थलों पर भीड़ का प्रबंधन कैसे होता है. इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर नए सिरे से नक्शा खींचा जाएगा. इसके लिए संबंधित जिलों के एसपी (SP) से भी सीधी फीडबैक ली जा रही है.
5 सदस्यीय कमेटी की ज़िम्मेदारी और मुख्य प्राथमिकताएंडीजीपी द्वारा गठित इस कमेटी में एडीजी बीजू जॉर्ज जोसफ के साथ आईजी अजयपाल लांबा, डीआईजी राष्ट्रदीप, शंकर दत्त शर्मा और राशि डोगरा डूडी जैसे अनुभवी अधिकारी शामिल हैं. यह कमेटी सिर्फ सीमाएं ही नहीं तय करेगी, बल्कि जहाँ ज़रूरत होगी वहाँ नए थाने बनाने और अतिरिक्त पुलिस बल या संसाधनों को उपलब्ध कराने का खाका भी तैयार करेगी. इसके अलावा साइबर क्राइम, संगठित गिरोहों पर लगाम, महिला सुरक्षा, वीआईपी मूवमेंट और इलाके की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ठोस रणनीति बनाई जाएगी.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
August 12, 2026, 09:37 IST



