Kota News: ओम बिरला की पहल पर 300 साल पुराने भीतरिया कुंड का बदलेगा रूप, 23 करोड़ से होगा भव्य पुनर्विकास

Last Updated:August 12, 2026, 11:11 IST
कोटा के करीब 300 साल पुराने ऐतिहासिक भीतरिया कुंड का 23.03 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया जा रहा है. परियोजना के तहत प्राचीन बावड़ियों, मंदिर, यज्ञशाला और घाटों का संरक्षण करते हुए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. सिंह द्वार, पाथवे, पार्किंग, सामुदायिक भवन, कियोस्क, ग्रीन बेल्ट और चंबल तट पर सुरक्षा रेलिंग जैसी सुविधाओं से भीतरिया कुंड को धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है.
कोटा. चंबल नदी के किनारे स्थित कोटा के करीब 300 साल पुराने ऐतिहासिक भीतरिया कुंड की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है. पीढ़ियों से कोटावासियों की आस्था, परंपराओं और पारिवारिक स्मृतियों से जुड़ा यह प्राचीन स्थल जल्द ही आधुनिक सुविधाओं और ऐतिहासिक विरासत के संगम के रूप में विकसित होगा. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर नगर निगम की ओर से करीब 23.03 करोड़ रुपए की लागत से भीतरिया कुंड का जीर्णोद्धार और पुनर्विकास कराया जा रहा है. इस परियोजना के लिए परिसर को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और आकर्षक बनाया जाएगा.
पुनर्विकास कार्य की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि भीतरिया कुंड की ऐतिहासिक पहचान और प्राचीन स्थापत्य शैली को सुरक्षित रखा जाएगा. परिसर में मौजूद करीब 300 साल पुरानी बावड़ियों, यज्ञशाला, मंदिर और घाटों का जीर्णोद्धार किया जाएगा. इन संरचनाओं के संरक्षण के दौरान उनकी मूल वास्तुकला और ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि आधुनिक विकास के बीच स्थल की पुरातन पहचान कायम रहे. श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए परिसर में भव्य मुख्य ‘सिंह द्वार’ का निर्माण किया जाएगा. इसके अलावा आने-जाने में सुविधा के लिए व्यवस्थित फुटपाथ और आधुनिक पाथवे विकसित किए जाएंगे. धार्मिक, सामाजिक और सामुदायिक आयोजनों के लिए सुविधायुक्त सामुदायिक भवन, बैठक हॉल और रसोईघर बनाए जाएंगे. श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुलभ शौचालयों की व्यवस्था भी की जाएगी.
पार्किंग से लेकर चंबल तट तक होगा विकास
परिसर में वाहनों के लिए व्यवस्थित पार्किंग विकसित की जाएगी, पार्किंग की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल बनाई जाएगी. श्रद्धालुओं और पर्यटकों की दैनिक जरूरतों को देखते हुए परिसर में विभिन्न कियोस्क भी विकसित किए जाएंगे. पूरे क्षेत्र को आकर्षक स्वरूप देने के लिए वॉटर फाउंटेन, विशेष शिल्पाकृतियां और डिजाइन फ्लोरिंग का काम होगा. साथ ही ग्रीन बेल्ट विकसित कर परिसर को हराभरा और सुंदर बनाया जाएगा. चंबल नदी की ओर जाने वाले क्षेत्र में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षा रेलिंग लगाई जाएगी. आरसीसी नालों के निर्माण से जल निकासी व्यवस्था को भी बेहतर किया जाएगा. इस तरह परियोजना में धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत, पर्यावरण और आधुनिक सुविधाओं को एक साथ विकसित करने की योजना है.
पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरेगा भीतरिया कुंड
भीतरिया कुंड सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कोटा के लोगों की भावनाओं और बचपन की यादों से जुड़ा ऐतिहासिक स्थान है. चंबल के शांत तट और आध्यात्मिक वातावरण के कारण इसकी अपनी अलग पहचान है. पुनर्विकास कार्य पूरा होने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. साथ ही खूबसूरत और व्यवस्थित परिसर कोटा आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए भी नया आकर्षण बन सकता है. इससे कोटा के धार्मिक और विरासत पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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August 12, 2026, 11:11 IST



