Udaipur News | Agriculture News | उदयपुर में पहली बार काली अदरक की खेती, नागालैंड से मंगवाया 700 किलो बीज

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उदयपुर में पहली बार शुरू हुई काली अदरक की खेती, किसानों के लिए खुले नए रास्ते
Last Updated:June 19, 2026, 13:58 IST
Farming Of Ginger In Rajasthan : हल्दी और अदरक उत्पादन के लिए पहचान रखने वाला उदयपुर जिला अब औषधीय खेती के क्षेत्र में भी नई पहल कर रहा है. मावली क्षेत्र के सनवाड़-छाहीड़ी गांव के प्रगतिशील किसान शंकरलाल डांगी ने पहली बार काली अदरक की खेती शुरू कर किसानों के सामने एक नया विकल्प पेश किया है. उन्होंने नागालैंड से करीब 700 किलोग्राम बीज मंगवाकर मार्च महीने में 0.2 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बुवाई की. फसल की बेहतर बढ़वार और पानी की बचत के लिए खेत में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया गया है, जिस पर उद्यान विभाग ने अनुदान भी दिया है. विशेषज्ञों के मुताबिक काली अदरक में सामान्य अदरक की तुलना में अधिक औषधीय गुण पाए जाते हैं और आयुर्वेदिक दवाओं, हर्बल उत्पादों तथा स्वास्थ्य संबंधी उपयोगों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो उदयपुर के किसानों के लिए बेहतर आय का नया रास्ता खुल सकता है.
उदयपुर. उदयपुर जिले के नाम अब कृषि क्षेत्र में एक और नई उपलब्धि जुड़ने जा रही है. हल्दी और अदरक के उत्पादन के लिए प्रदेशभर में पहचान रखने वाले जिले में पहली बार औषधीय गुणों से भरपूर काली अदरक की खेती शुरू की गई है. इस प्रयोग के सफल रहने पर किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ एक नया और लाभदायक विकल्प मिल सकता है.
जिले के मावली क्षेत्र के सनवाड़-छाहीड़ी गांव के प्रगतिशील किसान शंकरलाल डांगी ने यह पहल की है. उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग हटकर काली अदरक की खेती का प्रयोग किया है. शंकरलाल का कहना है कि कुछ समय पहले उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में इस फसल के बारे में जानकारी जुटाई. इसके बाद उन्होंने अपने खेत में इसका ट्रायल शुरू करने का निर्णय लिया.
नागालैंड से मंगवाया 700 किलो बीजकिसान शंकरलाल डांगी ने बताया कि उन्होंने नागालैंड से काली अदरक का करीब 700 किलोग्राम बीज मंगवाया. इसके बाद मार्च माह में करीब 0.2 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बुवाई की गई. फसल की बेहतर बढ़वार और पानी की बचत के लिए खेत में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया गया है. आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से फसल की निगरानी भी की जा रही है. उद्यान विभाग ने भी इस नवाचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. विभाग की ओर से ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाने पर अनुदान दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि जिले में पहली बार काली अदरक की खेती का यह प्रयास किया गया है. यदि इसके परिणाम सकारात्मक रहते हैं तो अन्य किसानों को भी इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
औषधीय गुणों के कारण बढ़ रही मांगविशेषज्ञों के अनुसार काली अदरक सामान्य अदरक की तुलना में अधिक औषधीय गुणों वाली मानी जाती है. आयुर्वेदिक दवाओं, हर्बल उत्पादों और स्वास्थ्य संबंधी कई उपयोगों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन तंत्र को मजबूत करने और कई अन्य औषधीय उत्पादों में इसका उपयोग किया जाता है. यही वजह है कि बाजार में इसकी कीमत भी सामान्य अदरक की तुलना में अधिक मिलती है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय में किसानों को ऐसी नकदी और औषधीय फसलों की ओर भी कदम बढ़ाना चाहिए, जिनसे कम क्षेत्र में बेहतर आमदनी प्राप्त की जा सके. काली अदरक ऐसी ही फसलों में शामिल है, जिसकी मांग देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बढ़ रही है. फिलहाल मावली क्षेत्र के सनवाड़-छाहीड़ी गांव में शुरू हुई यह खेती किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. यदि उत्पादन और बाजार दोनों स्तरों पर अच्छे परिणाम मिलते हैं तो उदयपुर जिले के किसानों के लिए यह फसल आय बढ़ाने का नया माध्यम बन सकती है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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Udaipur,Rajasthan



