Unique Temple: राजस्थान का रहस्यमयी सुख देवी मंदिर, जहां मन्नत पूरी होने पर जिंदा मुर्गा चढ़ाने की है परंपरा

Last Updated:October 14, 2026, 12:14 IST
Unique Temple: उदयपुर के सुख देवी मंदिर की मान्यता बेहद अनोखी है, यहां मन्नत पूरी होने पर भक्त माता को जिंदा मुर्गा अर्पित करते हैं और उसे मंदिर परिसर में ही छोड़ देते हैं. सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर में नवरात्र के दौरान भक्तों की भीड़ उमड़ती है. जानिए इस प्राचीन मंदिर का इतिहास और जिंदा मुर्गा चढ़ाने की अनूठी परंपरा.
उदयपुर. शहर को झीलों और ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ यहां के प्राचीन मंदिरों और उनसे जुड़ी अनूठी मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है. शहर में माता रानी के कई ऐसे मंदिर हैं, जहां भक्त अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां मन्नत पूरी होने पर भक्त जिंदा मुर्गा चढ़ाते हैं. इस मंदिर को सुख देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि सुख देवी अपने भक्तों को सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं.
सुख देवी मंदिर की सबसे खास और अलग पहचान यहां निभाई जाने वाली जिंदा मुर्गा चढ़ाने की परंपरा है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब किसी भक्त की मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वह माता के दरबार में जिंदा मुर्गा लेकर पहुंचता है और उसे अर्पित करता है. यहां मुर्गे को काटकर चढ़ाने के बजाय जीवित ही मंदिर में छोड़ा जाता है. इसके बाद वह मुर्गा मंदिर परिसर में ही रहता है और अपना जीवन बिताता है. यही परंपरा इस मंदिर को दूसरे मंदिरों से अलग पहचान दिलाती है. भक्तों की मान्यता है कि माता सुख देवी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होने पर वे अपनी श्रद्धा के अनुसार माता के प्रति आभार व्यक्त करते हैं. जिंदा मुर्गा अर्पित करना भी इसी आस्था और परंपरा का हिस्सा माना जाता है.
मन्नत पूरी होने पर जिंदा मुर्गा चढ़ाने की परंपरा
उदयपुर शहर के बेतला ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित सुख देवी मंदिर को सैकड़ों वर्ष पुराना बताया जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर शहर के उस छोर पर बनाया गया था, जहां से शहर की सीमा शुरू होती थी. ऐसी मान्यता है कि माता का मंदिर शहर की रक्षा से भी जुड़ा रहा है. इसी वजह से यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र भी है. समय के साथ उदयपुर शहर का विस्तार हुआ और यहां की आबादी बढ़ी, लेकिन इस प्राचीन मंदिर से जुड़ी मान्यताएं आज भी कायम हैं. स्थानीय लोग अपनी श्रद्धा के साथ माता के दर्शन करने पहुंचते हैं और परिवार की सुख-शांति व खुशहाली की कामना करते हैं.
नवरात्र में उमड़ते हैं भक्त, सजता है मंदिर
नवरात्र के दिनों में सुख देवी मंदिर में विशेष रौनक देखने को मिलती है, माता के दर्शन के लिए भक्त पहुंचते हैं और मंदिर को भी सजाया जाता है. इस दौरान मंदिर के आसपास मेले जैसा माहौल भी देखने को मिलता है. श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता से प्रार्थना करते हैं. उदयपुर के इस प्राचीन मंदिर की पहचान इसकी ऐतिहासिक मान्यता और जिंदा मुर्गा अर्पित करने की अनोखी परंपरा से जुड़ी है. सुख देवी मंदिर बताता है कि राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में आस्था और लोक परंपराओं के अपने विशिष्ट रूप हैं, जो पीढ़ियों से लोगों की धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा बने हुए हैं.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
October 14, 2026, 12:14 IST



