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Water Crisis | Rajasthan News

Last Updated:June 22, 2026, 14:02 IST

Water Crisis In Karauli : करौली के डांग क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने 155 गांवों में पेयजल संकट पर जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर चंबल परियोजना से स्थायी पानी आपूर्ति की मांग की.ज्ञापन देने पहुंचे लोगों में दौलतपुरा, नैनियाकी, निभेरा, राहिर, बादलपुर, धाधुरेत, कैलादेवी क्षेत्र के सात गांव, श्यामपुर, चंदेलीपुरा, लांगरा, बुगदार, ससेडी, अकोलपुरा, हरनगर मंहूँ और कसेड ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल रहे. उनका कहना है कि इन पंचायतों से जुड़े करीब 155 गांव लंबे समय से पानी की समस्या झेल रहे हैं.पथरीली जमीन ने छीना पानी... करौली में गहराया संकट, चंबल परियोजना आखिरी उम्मीद!Zoomडांग क्षेत्र में पेयजल संकट, 155 गांवों ने चंबल पानी की मांग तेज

करौली. करौली जिले के डांग क्षेत्र में पानी की परेशानी एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन गई है. इलाके के 155 गांवों के लोगों ने अब अपनी मांग को लेकर खुलकर मोर्चा खोल दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि सालों से पेयजल संकट झेल रहे इस क्षेत्र में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है. इसी परेशानी को लेकर डांग क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चंबल के पानी से उनकी प्यास बुझाने की मांग की.

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गर्मियों के मौसम में हालात और ज्यादा बिगड़ जाते हैं, लेकिन इस बार भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया. उनका आरोप है कि जिम्मेदार विभाग केवल अस्थायी इंतजाम कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, जबकि इलाके के लोग पूरे साल पानी के संकट से जूझते रहते हैं.

16 ग्राम पंचायतों के लोगों ने उठाई आवाजज्ञापन देने पहुंचे लोगों में दौलतपुरा, नैनियाकी, निभेरा, राहिर, बादलपुर, धाधुरेत, कैलादेवी क्षेत्र के सात गांव, श्यामपुर, चंदेलीपुरा, लांगरा, बुगदार, ससेडी, अकोलपुरा, हरनगर मंहूँ और कसेड ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल रहे. उनका कहना है कि इन पंचायतों से जुड़े करीब 155 गांव लंबे समय से पानी की समस्या झेल रहे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि इलाके की भौगोलिक स्थिति भी उनकी मुश्किल बढ़ा रही है. डांग क्षेत्र में जमीन काफी पथरीली है. ऐसे में नए बोरवेल खुदवाने पर भी पानी नहीं मिल पाता. कई जगह बोरवेल खोदे गए, लेकिन वे कुछ समय बाद ही जवाब दे गए. इसके कारण लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए भटकना पड़ रहा है.

चंबल परियोजना से उम्मीदें, समाधान की मांग तेजग्रामीणों का कहना है कि चंबल नदी का पानी इस पूरे इलाके के लिए स्थायी राहत बन सकता है. उनका मानना है कि अगर चंबल परियोजना के जरिए डांग क्षेत्र तक पेयजल पहुंचाया जाए तो हजारों परिवारों की परेशानी दूर हो सकती है. महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत झेलनी पड़ती है, क्योंकि कई बार उन्हें दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ता है. ज्ञापन में मांग की गई है कि सरकार डांग क्षेत्र की पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द योजना बनाए और चंबल के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे. ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जा सकता है. फिलहाल जिला प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर लिया है. अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि बरसों से चली आ रही इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन और सरकार क्या कदम उठाती है.

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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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