“वेजिटेरियन मीट” किसे कहा जाता है? जानिये इसे बनाने का सही तरीका और इसके फायदे

पिछले कुछ वर्षों में “वेजिटेरियन मीट” या “प्लांट-बेस्ड मीट” का चलन तेजी से बढ़ा है. यह ऐसा खाद्य उत्पाद होता है जो देखने, स्वाद और बनावट में मांस जैसा लगता है, लेकिन इसे पूरी तरह पौधों से प्राप्त सामग्रियों से तैयार किया जाता है. इसका उद्देश्य उन लोगों को मांस जैसा अनुभव देना है जो शाकाहारी हैं या स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संबंधी कारणों से मांस का सेवन कम करना चाहते हैं.
वेजिटेरियन मीट बनाने में मुख्य रूप से सोयाबीन, मटर का प्रोटीन, गेहूं का ग्लूटेन (सीटन), चना, मशरूम, दालें और विभिन्न वनस्पति तेलों का उपयोग किया जाता है. इनमें मौजूद प्रोटीन को विशेष तकनीकों की मदद से इस तरह संसाधित किया जाता है कि उसकी बनावट मांस जैसी महसूस हो. कई कंपनियां इसमें प्राकृतिक रंग, मसाले और फ्लेवर भी मिलाती हैं ताकि स्वाद वास्तविक मांस के अधिक करीब लगे.
वेजिटेरियन मीट के प्रकार
वर्तमान में बाजार में कई प्रकार के प्लांट-बेस्ड मीट उपलब्ध हैं, जैसे:
वेज बर्गर पैटीवेज सॉसेजवेज नगेट्सप्लांट-बेस्ड चिकनवेज कबाब और कीमा
इन उत्पादों में प्रोटीन की मात्रा अधिक और संतृप्त वसा अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे इन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है.
घर पर वेजिटेरियन मीट बनाने का तरीका
घर पर भी सरल सामग्री की मदद से वेजिटेरियन मीट तैयार किया जा सकता है.
आवश्यक सामग्री
1 कप सोया चंक्स या सोया ग्रेन्यूल्स1/2 कप उबली हुई दाल या चना2 बड़े चम्मच बेसन1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्टलाल मिर्च, काली मिर्च और अन्य मसाले स्वादानुसार1 बड़ा चम्मच तेलनमक स्वादानुसार
बनाने की विधि
सबसे पहले सोया चंक्स को 10-15 मिनट गर्म पानी में भिगो दें.पानी निकालकर इन्हें अच्छी तरह निचोड़ लें और मिक्सर में पीस लें.उबली हुई दाल या चने को भी पीसकर सोया मिश्रण में मिला दें.इसमें बेसन, नमक, मसाले और थोड़ा तेल डालकर अच्छी तरह गूंथ लें.तैयार मिश्रण को बर्गर पैटी, कबाब या नगेट्स का आकार दें.इन्हें तवे पर हल्के तेल में सेंकें या ओवन में बेक करें.सुनहरा होने पर गरमागरम परोसें.
क्या हैं इसके फायदे?
वेजिटेरियन मीट में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता और यह प्रोटीन, फाइबर तथा कई आवश्यक पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हो सकता है. इसके उत्पादन में पारंपरिक पशुपालन की तुलना में कम पानी और भूमि की आवश्यकता पड़ती है, जिससे पर्यावरण पर दबाव भी कम पड़ता है. यही कारण है कि दुनिया भर में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.



