जब हौसला टूटने लगा, तब शिव नाम ने बढ़ाए कदम… गोमुख से सोजत तक 1200 KM पैदल पहुंचे पुजारी प्रदीपदास

Last Updated:July 04, 2026, 06:16 IST
Gomukh to Sojat 1200 KM Kanwar Yatra Priest Pradeepdas Vaishnav: सोजत के मलकेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी प्रदीपदास वैष्णव ने गोमुख से सोजत तक की 1200 किलोमीटर की कठिन पैदल कावड़ यात्रा 43 दिनों में पूरी की. महाशिवरात्रि से केवल फलाहार पर रह रहे पुजारी जी ने सावन में होने वाले महारुद्र यज्ञ की सफलता और क्षेत्र की खुशहाली के लिए यह संकल्प लिया था. कड़ाके की ठंड और भीषण गर्मी की चुनौतियों को पार कर सोजत लौटने पर श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया.
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Pali: इरादा अगर पक्का हो और दिल में महादेव का नाम, तो रास्ते की हर मुश्किल आसान हो जाती है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है राजस्थान के पाली जिले के सोजत स्थित मलकेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी प्रदीपदास वैष्णव ने. हिमालय की जमा देने वाली हाड़ कंपाने वाली ठंड से लेकर मैदानी इलाकों की झुलसा देने वाली भीषण गर्मी को मात देकर, 1200 किलोमीटर का लंबा सफर पैरों से नापकर वे सोजत पहुंच चुके हैं. कंधे पर पवित्र कावड़ और दिल में सोजत क्षेत्र की खुशहाली की कामना लिए यह 43 दिनों की वो महायात्रा है, जिसकी गूंज अब पूरे इलाके में सुनाई दे रही है.
पुजारी प्रदीपदास ने बताया कि उन्होंने 12 मई को गंगोत्री ग्लेशियर के पास गोमुख से गंगाजल भरकर अपनी इस यात्रा का संकल्प लिया था. 1200 किलोमीटर की यह अत्यंत कठिन पैदल यात्रा 24 जून को पूरे 43 दिनों में सोजत पहुंचने पर सफलतापूर्वक संपन्न हुई. इस पूरी कठिन यात्रा के दौरान अमृत बंजारा उनके सहयात्री के रूप में बाइक पर जरूरी सामान लेकर साथ चलते रहे और उनकी सेवा में जुटे रहे.
प्रकृति के दो चरम रूपों की चुनौतियाँ और भोलेनाथ की कृपायात्रा के दौरान पुजारी प्रदीपदास को प्रकृति के दो चरम रूपों का आमना-सामना करना पड़ा. एक तरफ जहां शुरुआत में हिमालय की कड़ाके की ठंड थी, वहीं दूसरी तरफ आगे बढ़ने पर मैदानी इलाकों की भीषण और झुलसाने वाली गर्मी का प्रकोप झेलना पड़ा. इस मौसम परिवर्तन के कारण शरीर का संतुलन बनाए रखना बेहद मुश्किल काम हो गया था. अत्यधिक शारीरिक थकान के कारण कई बार मन का हौसला टूटने लगा था, लेकिन भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा और आशीर्वाद से यह कठिन यात्रा पूरी तरह सफल रही.
महाशिवरात्रि से केवल फलाहार पर हैं पुजारी जीपुजारी प्रदीपदास ने इस बड़े आध्यात्मिक अनुष्ठान के लिए बेहद कठोर नियमों का पालन किया है. वे इस साल की महाशिवरात्रि के दिन से ही केवल फलाहार पर हैं और उन्होंने अन्न का पूरी तरह त्याग किया हुआ है. आगामी सावन माह के शुक्ल पक्ष में सोजत के मलकेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित होने वाले महारुद्र कार्यक्रम की सफलता, क्षेत्र की आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाने और जन-जन में श्रद्धा जगाने के लिए उन्होंने यह प्रण लिया था. इस महारुद्र कार्यक्रम के सफल आयोजन और पूर्णता के बाद ही वे पुनः अन्न ग्रहण करेंगे.
साल 2016 में भी की थी 800 किलोमीटर की पैदल यात्रायह पुजारी प्रदीपदास वैष्णव की दूसरी सबसे बड़ी आध्यात्मिक यात्रा है. इससे पहले साल 2016 में भी उन्होंने हरिद्वार से सोजत तक 800 किलोमीटर की कठिन पैदल कावड़ यात्रा की थी और भगवान मलकेश्वर महादेव का पवित्र गंगाजल से जलाभिषेक किया था.
सोजत पहुंचने पर हुआ ऐतिहासिक और भव्य स्वागतपुजारी प्रदीपदास के सोजत की सीमा में पहुंचने पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, महिलाओं और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाकर उनका ऐतिहासिक स्वागत किया. संपूर्ण क्षेत्र ‘हर हर महादेव’ और ‘बम बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठा. श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर पुजारी जी की इस कठिन तपस्या की सराहना की और उनसे आशीर्वाद लिया.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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