जब सिरोही पर छाया मेवाड़ का परचम! कुम्भा ने बनवाए ऐसे किले, जिन्हें जीतना था नामुमकिन

Last Updated:April 29, 2026, 12:05 IST
Sirohi Hindi News: मेवाड़ के महान शासक महाराणा कुम्भा का इतिहास केवल चित्तौड़गढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका सिरोही से भी गहरा नाता रहा है. 15वीं शताब्दी में सामरिक विस्तार के दौरान कुम्भा ने सिरोही की सेना को परास्त कर इस क्षेत्र पर अपना प्रभाव स्थापित किया था. अपनी विजय को अक्षुण्ण रखने और सीमाओं की सुरक्षा के लिए उन्होंने सिरोही में अचलगढ़ और बसंतगढ़ जैसे अभेद किलों का निर्माण करवाया. ये दुर्ग न केवल सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण थे, बल्कि कुम्भा की बेजोड़ स्थापत्य कला के प्रतीक भी हैं. आज भी ये किले मेवाड़ की वीरता और दूरदर्शिता की कहानी बयां करते हैं.
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सिरोही: राजस्थान के शूरवीर शासकों में मेवाड़ के पराक्रमी शासक महाराणा कुम्भा का नाम जरूर आता है. महाराणा कुम्भा ने राजस्थान में मेवाड़ के अलावा कई जगहों पर किले बनाकर विदेशी आक्रांताओं से मेवाड़ की सुरक्षा करने का काम किया था. ऐसे ही दो किले महाराणा कुम्भा ने राजस्थान के सिरोही जिले में भी बनवाए थे. महाराणा कुंभा ने मालवा और गुजरात के सुल्तानों को हराने के अलावा राजपुताना में भी अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए कई युद्ध लड़े थे.
इनमें से सिरोही के देवड़ा चौहानों के खिलाफ महाराणा कुम्भा ने सैन्य अभियान चलाया था. गुजरात से आने वाले विदेशी आक्रांता सिरोही होकर मेवाड़ में प्रवेश करते थे. यह क्षेत्र गुजरात और राजस्थान के व्यापारिक मार्गों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी था.
सिरोही गुजरात से मेवाड़ पर होने वाले वाले हमलों का प्रवेश द्वारमहाराणा कुंभा के लिए सिरोही को अपने नियंत्रण में रखना इसलिए भी जरूरी था, क्योंकि यह क्षेत्र गुजरात के सुल्तानों के आक्रमण के लिए एक संभावित प्रवेश द्वार बन सकता था. जिसके चलते महाराणा कुंभा ने 1452 ईस्वी में अपने सेनापति डुंडिया के नेतृत्व में एक सेना भेजकर अरावली की पहाड़ियों को पार कर सिरोही की सेना पर हमला कर दिया था. सिरोई की सेनानी हमला झेल नहीं पाई और इस जीत के रूप में मेवाड़ ने आबू क्षेत्र और आसपास के इलाके पर कब्जा कर लिया था. ये क्षेत्र मेवाड़ राज्य की सुरक्षा के लिए काफी महत्त्वपूर्ण था.
महारानी के नाम पर बनवाया था बसंती दुर्गबसंतगढ़ के स्थानीय बुजुर्ग किशन सिंह राव ने बताया कि बसंतगढ़ पहले वटनगर के नाम से जाना जाता था. क्योंकि यहां काफी वट वृक्ष हुआ करते थे. ये एक भव्य धन धान्य से परिपूर्ण नगरी हुआ करती थी. महाराणा कुम्भा ने राजस्थान में कुल 34 किले बनवाए थे. इनमें बसंतगढ़ का किला 31वां किला था. बसंतगढ़ में अपनी महारानी के नाम पर बसंती दुर्ग बनवाया था. इसी तरह माउंट आबू के अचलगढ में भी प्राचीन परमार शासकों द्वारा बसाए गए अचलगढ में अभेद किला बनवाया था. यह दोनो किले गुजरात से मेवाड़ पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए बनवाए गए थे.
बसंतगढ़ में लाहिनी देवी के द्वारा एक प्राचीन बावड़ी भी बनवाया गई थी. जिसे सपनो की बावड़ी के नाम से भी जाना जाता हैं. अचलगढ और बसंतगढ़ में आज भी किले के अवशेष देखने को मिलते हैं. अचलगढ पर्यटक स्थल होने से यहां देशभर से काफी पर्यटक आते हैं, लेकिन बसंतगढ़ का विकास सही तरीके से नहीं होने से इसके बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी है.
About the AuthorJagriti Dubey
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Location :
Sirohi,Rajasthan
First Published :
April 29, 2026, 12:05 IST



