डिजिटल अरेस्ट का खौफ, करोड़ों की ठगी… CBI ने खोली साइबर गैंग की परतें

Last Updated:September 07, 2026, 19:29 IST
Jhunjhunu News: डिजिटल अरेस्ट के जरिए 7.67 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पिलानी की BITS महिला प्रोफेसर को करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखकर ठगी की गई थी. जांच में बैंक खातों, APK फाइल और रकम की लेयरिंग के जरिए संगठित साइबर नेटवर्क चलाने का खुलासा हुआ है. CBI अब ठगी की रकम के पूरे ट्रेल और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है.
झुंझुनूं. डिजिटल अरेस्ट के जरिए देशभर में की जा रही साइबर ठगी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है. सीबीआई ने ऑपरेशन चक्र-VI के तहत डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामले में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह मामला पिलानी की BITS की महिला प्रोफेसर श्रीजाता डे से हुई करोड़ों रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा है. आरोप है कि साइबर ठगों ने प्रोफेसर को करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा और पुलिस अधिकारी बनकर डराते हुए उनसे 7.67 करोड़ रुपये की ठगी की.
सीबीआई के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर महिला प्रोफेसर को जांच और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया. वीडियो कॉल और दूसरे डिजिटल माध्यमों के जरिए उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया. इस दौरान आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाकर कुल 7.67 करोड़ रुपये की ठगी की.
20 राज्यों में 89 ठिकानों पर हुई थी छापेमारी
डिजिटल अरेस्ट के संगठित नेटवर्क का पता लगाने के लिए सीबीआई ने इससे पहले देशभर में तीन मामलों को लेकर एक साथ बड़ा तलाशी अभियान चलाया था. ऑपरेशन चक्र-VI के तहत 20 राज्यों में 89 स्थानों पर कार्रवाई की गई थी, इनमें पिलानी के अलावा गुजरात और कर्नाटक से जुड़े मामले भी शामिल थे. जांच के दौरान सीबीआई ने आकाश, राजा करमाकर और ज्योति रानी को पहले गिरफ्तार किया था. अब एजेंसी ने संकेत बस्तवार और पंकज दमाड़े, दोनों इटारसी, के अलावा आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और शशांक सिंह उर्फ रवि को गिरफ्तार किया है.
7.67 करोड़ की रकम का सुराग तलाश रही सीबीआई
सीबीआई के अनुसार, संकेत बस्तवार और पंकज दमाड़े पर ठगी की रकम हासिल करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने और रकम को आगे ट्रांसफर कर उसकी पहचान छिपाने में भूमिका निभाने का आरोप है। वहीं आरिफ, हरीश यादव और शशांक सिंह पर ऐसे बैंक खातों की व्यवस्था करने और रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर उसकी लेयरिंग करने का आरोप है. जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने बैंक खाताधारकों के मोबाइल फोन में APK फाइल इंस्टॉल कर बैंक से आने वाले SMS अलर्ट को इंटरसेप्ट किया. इसके बाद कथित तौर पर बैंक खातों को दूर से संचालित किया गया और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया. अब सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि प्रोफेसर से ठगी गई 7.67 करोड़ रुपये की रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची. एजेंसी इस पूरे डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों और उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
September 07, 2026, 19:29 IST



