दौसा निकाय चुनाव: दौसा में चुनाव चिन्ह पर बवाल, 14 निर्दलीयों को मिली ‘चप्पल’, इसी निशान से मांगेंगे वोट

दौसा. निकाय चुनाव की प्रक्रिया के बीच दौसा में चुनाव चिन्ह आवंटन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. दौसा नगर परिषद के 14 निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह के रूप में ‘चप्पल’ आवंटित की गई है. इनमें से किसी भी प्रत्याशी ने नामांकन के दौरान चप्पल चुनाव चिन्ह की मांग नहीं की थी, इसके बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग की निर्धारित सूची में चप्पल का क्रमांक दूसरा होने के कारण उन्हें यह चिन्ह आवंटित कर दिया गया. इसको लेकर कई प्रत्याशियों ने नाराजगी जताते हुए सवाल उठाए हैं. प्रत्याशियों का कहना है कि चप्पल को आमतौर पर शुभ प्रतीक नहीं माना जाता, ऐसे में उन्हें इसी नाम से चुनाव प्रचार करना पड़ेगा.
दरअसल, आयोग ने निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए 40 चुनाव चिन्ह निर्धारित किए हैं. नामांकन के दौरान कई प्रत्याशियों ने अपनी पसंद के ऐसे चिन्ह भर दिए, जो आयोग की सूची में शामिल नहीं थे. इसके बाद नियम के मुताबिक उपलब्ध चिन्हों का क्रमवार आवंटन किया गया. सूची में पहले नंबर पर अलमारी और दूसरे नंबर पर चप्पल होने से दूसरे क्रम के प्रत्याशियों को चप्पल मिली. अब दौसा के 14 वार्डों में प्रत्याशी इसी चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे.
14 प्रत्याशियों को मिला चप्पल चुनाव चिन्ह
दौसा नगर परिषद में कुल 14 निर्दलीय प्रत्याशियों को चप्पल चुनाव चिन्ह आवंटित हुआ है. इनमें वार्ड 2 से रजनी बाला, वार्ड 21 से पूरन, वार्ड 22 से गीता, वार्ड 23 से मजीद खान, वार्ड 24 से सुरेश, वार्ड 25 से अम्बर बेगम, वार्ड 30 से रेखा शर्मा, वार्ड 34 से श्रेयांश शर्मा, वार्ड 36 से सुनीता शर्मा, वार्ड 39 से अजीजन बेगम, वार्ड 40 से मेहनाज खान, वार्ड 41 से नवाब खान, वार्ड 42 से रवीना बैरवा और वार्ड 51 से मनीषा शामिल हैं. इन प्रत्याशियों के सामने अब चप्पल चुनाव चिन्ह के साथ मतदाताओं के बीच जाने की चुनौती है. कुछ प्रत्याशियों ने इसे लेकर विरोध जताया है और कहा कि चुनाव चिन्ह का असर मतदाताओं की धारणा पर भी पड़ सकता है.
अपनी पसंद के चिन्ह नहीं थे आयोग की सूची में
रिटर्निंग अधिकारी संजू मीणा ने बताया कि चुनाव चिन्हों का आवंटन राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल करते समय आयोग की निर्धारित चुनाव चिन्ह सूची के बजाय अपनी पसंद के ऐसे चिन्ह भर दिए, जो अधिकृत सूची में शामिल नहीं थे. ऐसी स्थिति में नियम के मुताबिक उपलब्ध चुनाव चिन्हों का आवंटन क्रमवार किया जाता है. इसी प्रक्रिया के तहत पहले क्रम पर अलमारी और दूसरे क्रम पर चप्पल होने से संबंधित प्रत्याशियों को चप्पल चिन्ह मिला है. अधिकारी के मुताबिक इसमें प्रशासन की ओर से किसी तरह की मनमानी नहीं की गई है.
40 चुनाव चिन्हों में जूता, कैंची और हरी मिर्च भी
राज्य निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए 40 चुनाव चिन्ह निर्धारित किए हैं. इस सूची में अलमारी और चप्पल के साथ चारपाई, तकिया, चूड़ियां, जंजीर, हरी मिर्च, टॉफियां, कैंची और जूता जैसे अलग-अलग चुनाव चिन्ह भी शामिल हैं. चप्पल सूची में दूसरे नंबर पर है, जबकि जूता बाद के क्रम में आता है. यही वजह है कि दौसा में कई निर्दलीय प्रत्याशियों को चप्पल चुनाव चिन्ह मिल गया, जबकि जूता किसी प्रत्याशी को आवंटित नहीं हुआ है. चुनाव चिन्हों की यह सूची अब दौसा के चुनावी माहौल में चर्चा का विषय बनी हुई है.
प्रत्याशियों ने जताई नाराजगी
निर्दलीय प्रत्याशी श्रेयांश शर्मा और अम्बर बेगम समेत कई प्रत्याशियों ने चप्पल चुनाव चिन्ह मिलने पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि उन्होंने इस चिन्ह की मांग नहीं की थी, लेकिन नियमों के चलते अब उन्हें इसी चिन्ह के साथ चुनाव लड़ना होगा. प्रत्याशियों का तर्क है कि चुनाव चिन्ह मतदाताओं के लिए पहचान का प्रमुख माध्यम होता है, इसलिए इसके चयन को लेकर उनकी पसंद का भी ध्यान रखा जाना चाहिए था. हालांकि निर्वाचन अधिकारी का कहना है कि जब प्रत्याशियों ने ऐसे चिन्हों की मांग की, जो आयोग की सूची में थे ही नहीं, तब उपलब्ध अधिकृत चिन्हों को नियम के मुताबिक क्रमवार देना ही प्रक्रिया है. अब देखना होगा कि चप्पल चुनाव चिन्ह को लेकर शुरू हुआ यह विवाद चुनावी नतीजों तक कितना असर डालता है.



