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नेपाल की फ्लैश फ्लड देखकर रूह कांप गई? इतिहास में झाकेंगे तो दिल ही बैठ जाएगा, 5 मौके जब लाखों ने गंवाई जान

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नेपाल की फ्लैश फ्लड देखकर रूह कांपी? इतिहास के वो 5 मौके जब लाखों ने गंवाई जान

Last Updated:August 29, 2026, 21:19 IST

नेपाल में इन दिनों बाढ़ का कहर जारी है. इसके चलते बड़े इलाके में इसका असर देखने को मिला है. इतिहास में भी बाढ़ों ने भारी तबाही मचाई है. इन बाढ़ों का सबसे ज्यादा असर चीन पर हुआ है. एक-एक करके जानते हैं वो पांच बड़ी बाढ़ें जिन्होंने लाखों की जान ले ली.

नेपाल में फ्लैश फ्लड ने तबाही मचाई दी है. अब तक मौतों का आंकड़ा बढ़कर कम से कम 626 तक पहुंच गया है, जबकि 4451 लोगों को बचाया गया है. इनमें 187 विदेशी नागरिक शामिल हैं और 114 भारतीय हैं. अभी भी 24 से ज्यादा लोग लापता हैं. बड़े स्तर पर तबाही देखी गई है, लाखों लोग इसे प्रभावित हुए हैं और आगे भी खतरा बना हुआ है. (रॉयटर्स)

लेकिन इतिहास में ऐसी बाढ़ें भी आई हैं, जिन्होंने पूरे शहर, गांव और इलाके तक उजाड़ दिए. कहीं नदियों ने अपना रास्ता बदल दिया, तो कहीं बांध टूटने के बाद पानी ने तबाही मचा दी. इस तबाही में लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. इन आपदाओं में लाखों लोगों की जान गई. कई जगह बाढ़ के पानी के उतरने के बाद असली संकट शुरू हुआ. अब बीमारियां, भुखमरी और विस्थापन ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया. (रॉयटर्स)

इतिहास की सबसे घातक बाढ़ों में 1931 की चीन की बाढ़ का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. अगस्त 1931 में लगातार भारी बारिश और बर्फ पिघलने से यांग्त्से, हुआंग हे यानी येलो रिवर और हुआई नदी उफान पर आ गईं. देखते ही देखते करीब 88 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पूरी तरह पानी में डूब गई, जबकि 21 हजार वर्ग किलोमीटर इलाका आंशिक रूप से प्रभावित हुआ. इस तबाही से करीब 8 करोड़ लोग बेघर हो गए. (AI जेनेरेटेड)

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लेकिन मौत का सिलसिला सिर्फ बाढ़ तक सीमित नहीं रहा. बाढ़ के बाद बीमारियां फैलीं और खाने-पीने के सामान की भारी कमी पैदा हुई. अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक 8 लाख 50 हजार से लेकर 40 लाख तक लोगों की मौत हुई. राष्ट्रीय बाढ़ राहत आयोग की 1931-32 की रिपोर्ट में डूबने से करीब 1 लाख 40 हजार मौतों का जिक्र मिलता है. हालांकि बीमारी और अकाल से हुई मौतों को जोड़ने पर असल आंकड़े इससे कई गुना ज्यादा मानी जाती है. (AI जेनेरेटेड)

साल 1887 में चीन की येलो रिवर ने भयानक रूप धारण कर लिया. सितंबर-अक्टूबर में नदी के तटबंध टूट गए. देखते ही देखते करीब 50 हजार वर्ग किलोमीटर इलाका जलमग्न हो गया. बाढ़ के बाद महामारी और अकाल ने हालात और खराब कर दिए. अनुमानों है कि इस आपदा में 9 लाख से 20 लाख लोगों की मौत हुई. अमेरिकी राजनयिक दस्तावेजों में भी हेनान प्रांत में करीब 25 लाख लोगों के प्रभावित होने और भारी जनहानि की बात कही. (AI जेनेरेटेड)

1938 की बाढ़ प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ युद्ध की रणनीति का भी नतीजा थी. दूसरे चीन-जापान युद्ध के दौरान जापानी सेना चीन की और बढ़ रही थी. उसे रोकने के लिए चीनी राष्ट्रीय सेना ने एक योजना बनाई. 9 जून 1938 को काईफेंग के पास येलो रिवर के तटबंध तोड़ दिए. इसके बाद पानी तेजी से फैल गया और करीब 54 हजार वर्ग किलोमीटर इलाका डूब गया. (AI जेनेरेटेड)

बाढ़ के बाद अकाल और महामारी ने तबाही को और बढ़ा दिया. अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक 5 लाख से 9 लाख लोगों की मौत हुई. कुछ रिसर्च में मरने वालों की गिनती 8 लाख से ज्यादा बताई गई है. करीब 40 लाख लोग विस्थापित हुए. (AI जेनेरेटेड)

अगस्त 1975 में टाइफून नीना ने चीन के हेनान प्रांत में ऐसी बारिश कराई कि स्थिति कंट्रोल से बाहर हो गई. भारी बारिश के बाद बांगकियाओ बांध और 61 अन्य बांध टूट गए. इसके बाद जो पानी आया, वह किसी सामान्य बाढ़ जैसा नहीं था. बाढ़ की लहर करीब 10 मीटर ऊंची और कई किलोमीटर चौड़ी बताई गई. (AI जेनेरेटेड)

आधिकारिक आंकड़ों में बाढ़ से करीब 26 हजार मौतें दर्ज की गईं. इसके बाद महामारी और अकाल से करीब 1 लाख 45 हजार और लोगों की मौत हुई. लेकिन कुछ अनुमानों में कुल मौतों का आंकड़ा 2 लाख 20 हजार से ज्यादा बताया गया है. इस आपदा से 1 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए.

12-13 नवंबर 1970 को बंगाल की खाड़ी में आया भोला चक्रवात इतिहास के सबसे घातक चक्रवातों में शामिल है. तूफान के साथ करीब 10.5 मीटर ऊंची तूफानी लहर उठी. बांग्लादेश उस समय पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था. बाढ़ का पानी बांग्लादेश के तटीय इलाकों में घुस गया.

पानी की इस विशाल लहर ने पूरे गांव और बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया. विश्व मौसम विज्ञान संगठन और एनओएए के अनुसार, इस आपदा में 3 लाख से 5 लाख लोगों की मौत हुई. इसी वजह से भोला चक्रवात को दुनिया का सबसे घातक चक्रवात माना जाता है.

इन सभी घटनाओं में एक बात समान थी. बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी खतरा खत्म नहीं हुआ. बाढ़ के बाद पीने के पानी की कमी, बीमारियां, भोजन की कमी और महामारी फैल जाती है. यही वजह है कि इतिहास की सबसे घातक बाढ़ों का आंकलन करना आसान नहीं है. कई आपदाओं में केवल डूबने से हुई मौतें दर्ज की गईं. (रॉयटर्स)

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August 29, 2026, 19:11 IST

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