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शुगर और बीपी में रामबाण, दिल और इम्यूनिटी के लिए दुर्लभ है यह फल, दून में ₹800 प्रति किलो बिक रहा पहाड़ी चेस्टनट

Last Updated:August 26, 2026, 19:27 IST

Pangar Fruit Uttarakhand: उत्तराखंड की ऊंची पहाड़ियों की गोद में प्राकृतिक रूप से उगने वाला दुर्लभ फल ‘पांगर’ (चेस्टनट) इन दिनों दून घाटी के बाजारों में अपनी खास चमक बिखेर रहा है. स्वाद में लाजवाब और सेहत के लिए कुदरती वरदान माना जाने वाला यह कांटेदार फल न केवल सैलानियों और स्थानीय लोगों की पहली पसंद बना हुआ है, बल्कि ₹800 प्रति किलो तक बिककर पहाड़ी काश्तकारों के लिए मुनाफे का नया जरिया भी साबित हो रहा है.

उत्तराखंड की पहाड़ियों में उगने वाला प्राकृतिक और पौष्टिक फल ‘पांगर’ अब राजधानी देहरादून के बाजारों में अपनी खास पहचान बना रहा है. फेगेसी प्रजाति के इस दुर्लभ फल को दुनियाभर में ‘चेस्टनट’ के नाम से जाना जाता है. स्थानीय भाषा में इसे ‘अज्ञैर’ नाम से भी पहचाना जाता है. इन दिनों देहरादून के फल बाजारों में इसकी आवक बढ़ने से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों में भी इसे खरीदने की जबरदस्त होड़ मची हुई है.

पांगर का इतिहास बेहद दिलचस्प और समृद्ध रहा है. सदियों से पहाड़ी इलाकों में खाए जाने वाले इस फल का बाहरी आवरण कांटों से ढका होता है. हरे और नुकीले कांटों के कारण पेड़ों से इसे तोड़ना और इसके फल को सुरक्षित बाहर निकालना एक खासी मेहनत भरा काम होता है. इस कठिन प्रक्रिया के बावजूद, इसके अद्भुत स्वाद और अनगिनत गुणों के कारण लोग इसे बड़े चाव से खरीदते हैं.

औषधीय गुणों से भरपूर पांगर स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह फल शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए रामबाण माना जाता है. इसके अलावा दिल को सेहतमंद रखने और हृदय रोगों के खतरे को कम करने में भी यह बेहद प्रभावी है. जो लोग नियमित रूप से इसका सेवन करते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता है.

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चेस्टनट में कई जरूरी पोषक तत्वों का भंडार होता है. इसमें कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और भरपूर मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है. यही वजह है कि यह डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में अत्यंत फायदेमंद साबित होता है. यह ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों को नियंत्रित रखने में मददगार होता है.

पहाड़ में पांगर को कच्चा खाने के बजाय पकाकर खाने की परंपरा है. इसे खाने का सबसे लोकप्रिय तरीका उबालकर या रोस्ट करके सेवन करना है. इसे गर्म पानी में उबालने या आग पर भूनने के बाद इसका कांटेदार और सख्त बाहरी छिलका बेहद आसानी से उतर जाता है. छीलने के बाद इसके अंदर का नरम, स्वादिष्ट और पौष्टिक हिस्सा खाने के लिए तैयार हो जाता है, जिसका स्वाद लोगों को खूब भाता है.

इस अनोखे पहाड़ी पेड़ का जीवन चक्र भी बड़ा खास है. मई और जून के महीनों में पांगर के पेड़ों पर खूबसूरत फूल आने शुरू होते हैं. इसके बाद पूरी गर्मी भर यह फल आकार लेता है और अगस्त से सितंबर के महीनों तक पूरी तरह पककर तैयार हो जाता है. मानसून के खत्म होते-होते यह फल पूरी तरह से बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाता है.

देहरादून के बाजारों में पांगर इन दिनों 600 रुपये से लेकर 800 रुपये प्रति किलो तक के भाव में आसानी से बिक रहा है. बाजार में इसकी इतनी भारी मांग और ऊंचे दामों के कारण यह उत्तराखंड के पहाड़ी किसानों के लिए स्वरोजगार का एक बेहतरीन और लाभदायक जरिया बनकर उभरा है.

देहरादून हो या कुमाऊं क्षेत्र, यहां आने वाले सैलानी इस दुर्लभ पहाड़ी फल का स्वाद चखना कभी नहीं भूलते हैं. स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच पांगर की बढ़ती लोकप्रियता ने इसके व्यापार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है. सेहत के लिए बेमिसाल और स्वाद में लाजवाब यह फल आज उत्तराखंड की आर्थिकी और सेहत दोनों के लिए एक चमकता हुआ सितारा साबित हो रहा है.

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August 26, 2026, 19:27 IST

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