सलीम-जावेद की कलम से निकली आइकॉनिक कहानी, ससुर के नाम पर रखा किरदार, ऑलटाइम ब्लॉकबस्टर हुई 50 साल पहले आई फिल्म

Last Updated:September 08, 2026, 21:43 IST
सलीम खान और जावेद अख्तर की जोड़ी ने कई क्लासिक फिल्मों की कहानी लिखी हैं. दोनों ने साथ मिलकर एक ऐसी फिल्म दी जिसने इंडस्ट्री को एक नई दिशा और आयाम दिया. 50 साल बाद भी फिल्म की लोकप्रियता में कमी नहीं आई है. आज भी अगर आप इस फिल्म को देखने बैठेंगे तो बोरियत आपके आस-पास भी नहीं भटक सकती है. ये क्लासिक कल्ट शोले है. आज आपको यहां इस आर्टिकल में शोले से जुड़े ऐसे मजेदार किस्से बताने जा रहे हैं जिनके बारे में आपको बिलकुल भी अंदाजा नहीं होगा.सलीम-जावेद ने लिखी थी क्लासिक कल्ट फिल्म की कहानी.
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में सिर्फ फिल्में नहीं रहतीं, बल्कि एक दौर की पहचान बन जाती हैं. ऐसी फिल्मों के डायलॉग्स लोगों की आम बातचीत का हिस्सा बन जाते हैं. उनके डायलॉग मुहावरों की तरह इस्तेमाल होने लगते हैं और कहानी दशकों बाद भी उतनी ही फ्रेश लगती हैं. ऐसी ही एक फिल्म ‘शोले’ है. ‘शोले’ 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी. 50 साल बाद भी इसका जादू कायम है. फिल्म के कहानी और किस्से आज भी बिलकुल नए हैं.
मजेदार बात ये है कि इस फिल्म की कहानी और किरदारों के पीछे कई ऐसे किस्से छिपे हैं, जो पर्दे पर दिखाई गई फिल्म की कहानी से भी काफी दिलचस्प हैं. शोले का जिक्र होते ही जहन में कई किरदार आते हैं. ठाकुर, गब्बर सिंह, जय और वीरु, बसंती समेत कई किरदारों ने फिल्म को यादगार बना दिया. 50 साल पहले आई शोले एक क्लासिक कल्ट है जो आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है.
सलीम-जावेद ने लेखकों को दिलाई अलग पहचान
80 के दशक की सबसे हिट जोड़ी सलीम और जावेद की थी. उस दौर में लेखकों और स्क्रीनराइटर्स की उतनी स्टार वैल्यू नहीं थी. उनको न इतना भाव मिलता था और न ही इतने पैसे. शोले ने सलीम और जावेद की तकदीर बदलकर रख दी थी. दोनों ने साथ मिलकर ‘शोले’ की कल्पना की थी. वो उस दौर में बतौर स्क्रीनराइटर्स पहचान हासिल करने की जद्दोजहद से गुजर रहे थे. दोनों ने साथ मिलकर ऐसी कहानी तैयार की, जिसमें दोस्ती, बदला, प्यार, अपराध, एक्शन और इमोशन सब कुछ था. इन सब चीजों ने मिलकर ‘शोले’ को पर्दे पर अमर बना दिया.
असली लोगों से प्रेरित है फिल्म के नाम
आज इस यादगार फिल्म से जुड़ा एक मजेदार किस्सा बताते हैं. सलीम-जावेद की इस आइकॉनिक फिल्म के लगभग सारे किरदार अपने आप में एक कहानी हैं. फिल्म में जय और वीरु का किरदार सलीम खान के कॉलेज के दोस्तों से प्रेरित थे. सलीम खान ने खुद बताया था कि उनके दोस्त जय और वीरू उनके साथ वक्त बिताते थे. फिल्म में इन दोनों नामों ने दोस्ती की ऐसी मिसाल कायम की कि आज भी दो गहरे दोस्तों को देखकर लोग उन्हें ‘जय-वीरू’ कह देते हैं.
ससुर के नाम पर बनाया आइकॉनिक किरदार
अब अगर दूसरे सबसे दिलचस्प किरदार की बात करें तो वो ठाकुर साहब का था जिनकी कहानी पर शोले की नींव रखी गई थी. अगर आपको फिल्म याद है तो आपको याद होगा कि शोले की कहानी की नींव ठाकुर और गब्बर सिंह की दुश्मनी पर रखी गई थी. फिल्म को लगभग सबने देखी है लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमर हो चुके किरदार ठाकुर का नाम किसके नाम पर रखा गया था. जी हां, ये किरदार भी असली नाम से प्रेरित था.
सलीम खान ने अपने ससुर के नाम पर ठाकुर का नाम रखा था. सलीम खान की पहली पत्नी सलमा खान का असली नाम सुशीला चरक है. उनके पिता जम्मू के रहने वाले राजपूत थे और उनकी मां महाराष्ट्र की थीं. सुशीला चरक के पिता का नाम ठाकुर बलदेव सिंह था. सलीम खान ने अपने ससुर के नाम पर फिल्म का किरदार ठाकुर रखा था. फिल्म में संजीव कुमार ने इस किरदार को निभाया था. सलीम खान का कहना था कि उनके ससुर इस बात से बेहद खुश थे कि उनकी फिल्म के जरिए उनका नाम पूरी दुनिया में फैल गया था.
बचपन की कहानी से निकला विलेन का आइडिया
अब आपको एक ऐसी बात बताते हैं जिसे सुनकर शायद आपके होश उड़ जाएंगे. फिल्म का सबसे खतरनाक किरदार गब्बर सिंह भी पूरी तरह काल्पनिक नहीं था. जी हां, आपने बिलकुल सही पढ़ा. सलीम खान के पिता पुलिस अधिकारी थे और उन्होंने अपने बेटे को एक कुख्यात डकैत की कहानियां सुनाई थीं. इसी कहानी में गब्बर सिंह का जिक्र था. सलीम खान को पिता से सुना वो किस्सा याद रहा और उन्होंने उसे भी अपनी फिल्म में उतार दिया.
About the AuthorPranjul SinghSub-Editor
From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…
New Delhi,Delhi
First Published :
September 08, 2026, 21:43 IST



