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1 नाम, 2 फिल्में: पिता को मिली थी ‘फेल्ड प्रोड्यूसर’ की संज्ञा, बेटे ने 22 साल बाद वही टाइटल बना दिया धाकड़ हिट

Last Updated:April 25, 2026, 19:56 IST

1 Name 2 Films: ये कहानी सिर्फ सिनेमा की नहीं, एक टूटे सपने और उसके बदले की है. जब पिता ने पहली बार उस नाम से फिल्म बनाई तो उम्मीदें आसमान छू रही थीं. मगर नतीजा ऐसा रहा कि निर्माता को ‘फेल्ड प्रोड्यूसर’ कहा गया. वक्त बदला, लेकिन उस नाम से जुड़ी कसक नहीं. फिर सालों बाद बेटे उसी टाइटल को नए अंदाज में वापस लाया गया और इस बार इतिहास पलट गया, जिसने कभी दर्द दिया था, वही नाम सफलता की पहचान बन गया. एक ही नाम ने कैसे बदल दी दो पीढ़ियों की किस्मत…यही है इस कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट.

नई दिल्ली. एक ही नाम, दो फिल्में और 22 साल का लंबा फासला… लेकिन कहानी सिर्फ पर्दे की नहीं, किस्मत की भी है. 90 के दशक में इसी टाइटल के साथ बनी फिल्म से काफी उम्मीदें थीं, मगर बॉक्स ऑफिस पर नतीजा निराशाजनक रहा. हालात ऐसे बने कि निर्माता को ‘फेल्ड प्रोड्यूसर’ तक कहा गया. वक्त के साथ फिल्म ने अपनी अलग पहचान जरूर बनाई, लेकिन शुरुआती असफलता का दाग गहरा था. फिर दो दशक बाद बेटे ने उसी नाम को नए अंदाज, बड़े स्केल और दमदार प्रेजेंटेशन के साथ दोबारा लाया गया. इस बार कहानी ने ऐसा पलटा मारा कि बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़ दिए. जिसने कभी ताना दिया था, उसी नाम ने इतिहास पलट दिया. एक टाइटल, दो पीढ़ियां और किस्मत का ऐसा खेल… इस कहानी को खास बनाता है.

बॉलीवुड में अक्सर कहानियां दोहराई जाती हैं, टाइटल्स फिर से इस्तेमाल होते हैं और विरासतों को नए रूप में पेश किया जाता है. कुछ एक जैसे नाम वाली फिल्में हिट हो जाती हैं तो कुछ चुपचाप गुमनामी में खो जाती हैं. लेकिन एक ऐसे ही टाइटल के पीछे सिर्फ सिनेमा की नहीं, बल्कि दिल टूटने, उम्मीद और फिर से उठ खड़े होने की कहानी छुपी है. यह कहानी एक ऐसे पिता की है, जिसने अपनी पूरी जान एक फिल्म में लगा दी, लेकिन वह फिल्म दर्शकों के दिलों तक नहीं पहुंच पाई और वह टूट गए. फिर 22 साल बाद उनके बेटे ने उसी टाइटल को फिर से जिंदा किया, न सिर्फ एक श्रद्धांजलि के तौर पर, बल्कि एक बड़ी जीत के रूप में. ये फिल्म है अग्निपथ और पिता-पुत्र की जोड़ी कोई और नहीं, बल्कि यश जौहर और करण जौहर हैं.

यश जौहर हिंदी सिनेमा के सम्मानित निर्माताओं में गिने जाते थे. उन्होंने धर्मा प्रोडक्शंस के जरिए बॉलीवुड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. अपने करियर की शुरुआत उन्होंने फिल्म फोटोग्राफर के रूप में की थी. सिनेमा के प्रति उनका जुनून इतना गहरा था कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इसी को समर्पित कर दी.

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साल 1990 में धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले ‘अग्निपथ’ रिलीज हुई. मुकुल एस आनंद के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने विजय दीनानाथ चौहान का किरदार निभाया. उनके साथ अमिताभ बच्चन, नीलम कोठारी, डैनी डेनजोंगपा और अर्चना पूरन सिंह भी नजर आए. कहानी एक ऐसे युवक की थी, जो अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए मुंबई के अंडरवर्ल्ड में उतरता है.

फिल्म की प्रीमियर के बाद इसे काफी तारीफें मिलीं, लेकिन जैसे ही यह जनता के सामने आई, दमदार स्टारकास्ट और मजबूत कहानी के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही. इस नाकामी ने यश जौहर को गहरा झटका दिया. बाद में उनकी फिल्म डुप्लिकेट भी अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी, जिसके चलते उन्हें इंडस्ट्री में ‘फेल्ड प्रोड्यूसर’ तक कहा जाने लगा.

इस बात का जिक्र करण जौहर ने अपनी बायोग्राफी एन अनसूटेबल बॉय में भी किया है. उन्होंने लिखा कि ‘अग्निपथ’ की असफलता ने उनके पिता को आर्थिक और भावनात्मक रूप से तोड़ दिया था. पूरी टीम को विश्वास था कि फिल्म मील का पत्थर बनेगी, लेकिन दर्शकों ने उसे नकार दिया. यही दर्द बेटे के दिल में कहीं गहराई से बैठ गया. साल 2012 में करण ने अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करने का फैसला किया. उन्होंने धर्मा प्रोडक्शंस के तहत ‘अग्निपथ’ का रीमेक बनाया, जिसमें उनकी मां हीरू जौहर भी सह-निर्माता रहीं.

इस बार निर्देशन की कमान करण मल्होत्रा के हाथ में थी और ऋतिक रोशन ने विजय दीनानाथ चौहान का किरदार निभाया. फिल्म में संजय दत्त और प्रियंका चोपड़ा भी अहम भूमिकाओं में नजर आए. करीब 58 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई. भारत में इसने लगभग 120 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जबकि दुनियाभर में इसकी कमाई 193 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. यह उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही.

करण जौहर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि यह फिल्म उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि अपने पिता को श्रद्धांजलि देने का जरिया थी. उनका मकसद था उस फिल्म को सफलता दिलाना, जिसने कभी उनके पिता को गहरा दुख दिया था. ‘अग्निपथ’ की यह कहानी सिर्फ दो फिल्मों की नहीं, बल्कि एक पिता के टूटे सपने और बेटे के अटूट संकल्प की कहानी है. यह दिखाती है कि असफलता अंत नहीं होती बल्कि कभी-कभी वही एक नई शुरुआत की वजह बन जाती है.

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April 25, 2026, 19:56 IST

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