65 वार्डों में BJP-Congress की जंग, CM भजनलाल के गृह जिले में किसकी बनेगी सरकार?

भरतपुर में 65 वार्डों की जंग, सीएम भजनलाल शर्मा के गृह जिले में किसकी बनेगी शहर की सरकार?
भरतपुर. नगर निगम चुनाव को लेकर भरतपुर में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. शहर की सरकार पर कब्जे के लिए भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी है. दो चरणों में होने वाले नगर निकाय चुनाव के पहले चरण में भरतपुर नगर निगम के लिए मतदान होना है. खास बात यह है कि भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है. ऐसे में नगर निगम चुनाव का परिणाम सिर्फ शहर की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे भाजपा के लिए मुख्यमंत्री के गृह जिले में सियासी पकड़ के तौर पर भी देखा जाएगा.
भरतपुर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं. इन्हीं वार्डों से चुने जाने वाले पार्षद शहर की नई सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे. इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर दिखाई दे रही है, लेकिन कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी दोनों प्रमुख दलों के समीकरण बिगाड़ने की स्थिति में हैं. पिछले चुनाव के आंकड़े भी इस मुकाबले को दिलचस्प बनाते हैं. वर्ष 2019 में 65 वार्डों में से 22 पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को भी 22 सीटें मिली थीं. कांग्रेस के खाते में 18 सीटें गई थीं और 3 सीटों पर बसपा प्रत्याशी विजयी रहे थे. यानी पिछली बार किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और निर्दलीयों की भूमिका काफी अहम रही थी. अब नजर इस बात पर है कि इस बार भी निर्दलीय प्रत्याशी प्रमुख दलों का खेल बिगाड़ेंगे या भाजपा-कांग्रेस में से कोई एक दल बढ़त बनाकर शहर की सरकार पर कब्जा करेगा.
गृह जिले में भाजपा के सामने अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौतीभरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है. यही वजह है कि नगर निगम चुनाव पर पूरे प्रदेश की नजर भी है. भाजपा के सामने जहां शहर में अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस पिछली बार मिली सीटों के आधार पर मुकाबले में वापसी की कोशिश कर रही है. निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी दोनों दलों की चिंता बढ़ा रही है. कई वार्डों में टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदार निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं. ऐसे में मुकाबला कई जगह त्रिकोणीय होता दिखाई दे रहा है.
भरतपुर को नगर निगम बने 12 साल
भरतपुर लंबे समय तक नगर परिषद के रूप में संचालित रहा. वर्ष 2004 में नगर परिषद में निर्वाचित अध्यक्ष और 45 पार्षदों की व्यवस्था का उल्लेख मिलता है. इसके बाद 19 फरवरी 2014 को राजस्थान सरकार ने भरतपुर नगर परिषद को नगर निगम में अपग्रेड करने का फैसला किया. नगर निगम बनने के बाद वर्ष 2014 में भाजपा के शिवसिंह भोंट भरतपुर के पहले महापौर बने. वे 2014 से 2019 तक महापौर रहे. इसके बाद वर्ष 2019 के नगर निगम चुनाव के बाद कांग्रेस के अभिजीत कुमार महापौर चुने गए. उनका महापौर चुनाव 27 नवंबर 2019 को हुआ था और उनका पांच साल का कार्यकाल नवंबर 2024 में पूरा हुआ. यानी नगर निगम बनने के बाद भरतपुर को अब तक दो निर्वाचित महापौर मिले हैं. अब तीसरी बार महापौर की कुर्सी पर कौन बैठेगा, इसे लेकर सियासी हलचल तेज है.
सड़क, सफाई और पानी बने चुनावी मुद्देचुनाव में राजनीतिक दल और प्रत्याशी स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंच रहे हैं. सड़क, सफाई, जल निकासी, पेयजल, यातायात, अतिक्रमण और शहर के विकास से जुड़े सवाल इस बार चुनावी चर्चा में हैं. शहर के अलग-अलग वार्डों में प्रत्याशी अपने-अपने मुद्दों के साथ मतदाताओं को साधने में जुटे हैं. वहीं मतदाता भी पिछले कार्यकाल के कामकाज और स्थानीय समस्याओं को ध्यान में रखकर फैसला करने की तैयारी में हैं.
सबसे बड़ा सवाल- किसकी बनेगी शहर की सरकार?भरतपुर नगर निगम चुनाव में इस बार मुकाबला कई स्तरों पर है. भाजपा के सामने मुख्यमंत्री के गृह जिले में अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने की चुनौती है, कांग्रेस के सामने नगर निगम में अपनी स्थिति बनाए रखने और बढ़ाने की चुनौती है, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी दोनों दलों के समीकरण प्रभावित करने की कोशिश में हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 65 वार्डों वाली भरतपुर नगर निगम में इस बार भाजपा वापसी करेगी, कांग्रेस अपना प्रभाव बरकरार रख पाएगी या फिर निर्दलीय प्रत्याशी एक बार फिर दोनों दलों का गणित बिगाड़ देंगे? फिलहाल भरतपुर में चुनावी रण सज चुका है. हर वार्ड में मुकाबला तेज होता जा रहा है और अब नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले की जनता शहर की कमान किसके हाथों में सौंपती है.



