Rajasthan

Natural Pesticide Farming in Dausa | Organic Farming Success

Last Updated:October 23, 2025, 12:13 IST

Organic Farming Dausa: डोलीका गांव के किसान गिर्राज मीणा ने नीम, धतूरा, आंकड़ा और कनेर की पत्तियों से प्राकृतिक जैविक घोल तैयार कर जहरमुक्त खेती अपनाई. इस विधि से फसल की पैदावार और गुणवत्ता बढ़ी है, लागत कम हुई है और स्थानीय किसान भी इसे सीखने आ रहे हैं. यह पहल जैविक कृषि की मिसाल है.

दौसा: जिले के डोलीका गांव में किसान गिर्राज प्रसाद मीणा ने पारंपरिक खेती को विज्ञान और अनुभव के साथ जोड़कर एक नई मिसाल कायम की है. उन्होंने रासायनिक खाद और कीटनाशकों से पूरी तरह दूरी बनाई और एक शुद्ध जैविक खेती की पद्धति अपनाई है. गिर्राज मीणा ने सिद्ध कर दिया है कि जहरमुक्त खेती भी न केवल संभव है, बल्कि यह आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी भी है.

गिर्राज मीणा की खेती का सबसे बड़ा रहस्य उनका प्राकृतिक जैविक घोल है. इस घोल को तैयार करने के लिए वे आसपास मिलने वाले नीम, धतूरा, आंकड़ा (मदार) और कनेर जैसे औषधीय और तीखे पौधों की पत्तियों को काटकर गोबर और पानी के साथ एक बड़े ड्रम में डालते हैं.

इस मिश्रण को लगभग 15 दिन तक सड़ने दिया जाता है, जिससे इन पत्तियों के कीट-नियंत्रक गुण और पोषक तत्व पानी में घुल जाते हैं. धीरे-धीरे यह मिश्रण एक शक्तिशाली प्राकृतिक जैविक घोल बन जाता है, जो कीटनाशक और फफूंदनाशक दोनों का काम करता है. इस घोल की एक ड्रम मात्रा को छह ड्रम सादे पानी में मिलाकर खेतों में स्प्रे किया जाता है.

खेती की संपूर्ण जैविक प्रक्रिया

गिर्राज मीणा के जैविक कृषि चक्र की शुरुआत खेत की गहरी जुताई से होती है.
मिट्टी का शुद्धिकरण: जुताई के बाद तुरंत प्राकृतिक घोल का छिड़काव किया जाता है ताकि मिट्टी जहरमुक्त हो और उसमें सजीवता बनी रहे.
उर्वरक: इसके बाद खेत में वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) डालकर मिट्टी को पोषक तत्वों से समृद्ध किया जाता है.
बुवाई: फिर स्वस्थ बीजों की बुवाई की जाती है. एक बीघा भूमि में लगभग 25 किलो बीज बोया जाता है.
परिणाम: इस विधि से न केवल फसल की पैदावार बढ़ती है, बल्कि उसकी गुणवत्ता, स्वाद और पौष्टिकता भी शानदार रहती है.

लाभ और सकारात्मक प्रभावगिर्राज मीणा के अनुसार इस जैविक विधि से मिट्टी की सेहत लगातार सुधर रही है. अब उनके खेतों में रासायनिक खाद का नामोनिशान नहीं है, जिससे मिट्टी फिर से उपजाऊ हो गई है. फसल हरी-भरी होती है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसकी लागत भी आधी रहती है. किसानों को अपनी उपज का अच्छा बाजार मूल्य भी मिल रहा है, क्योंकि जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है.

ग्रामीणों और अधिकारियों की प्रतिक्रियास्थानीय किसानों में गिर्राज की पहल अब चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है. कई किसान उनके खेत देखकर तकनीक सीखने और मार्गदर्शन लेने आ रहे हैं. कृषि विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि इस तरह की पहल जिले के कृषि परिदृश्य को जैविक दिशा में ले जा सकती है और सरकारी योजनाओं के अनुरूप है.

भविष्य की योजनागिर्राज मीणा का लक्ष्य अब केवल अपने खेत तक सीमित नहीं है. उनका सपना है कि वे गांव के अन्य किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित करें ताकि पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्यवर्धक और रासायनिक मुक्त अन्न उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके.

Location :

Dausa,Dausa,Rajasthan

First Published :

October 23, 2025, 12:13 IST

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