श्री उदयनाथ धाम बना श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

Last Updated:May 17, 2026, 07:22 IST
Udaynath Dham Alwar: अलवर का श्री उदयनाथ धाम इन दिनों श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण के अनोखे संगम के रूप में पहचान बना रहा है. यह धाम न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि यहां प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी विशेष पहल की जा रही है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और साथ ही पर्यावरण बचाने का संदेश भी लेकर जाते हैं. धाम परिसर में हरियाली, स्वच्छता और वृक्षारोपण पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर दिखाई देता है. स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आध्यात्मिक शांति के साथ प्रकृति के करीब होने का अनुभव मिलता है.
Alwar News: अलवर जिले के थानागाजी से 8 किलोमीटर दूर टोड़ी-जोधावास गाँव के पास सरिस्का में स्थित श्री उदयनाथ धाम दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है. यह हजारों वर्ष पुराना धार्मिक स्थल और यहां पर राजस्थान के अनेक जिलों सहित दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु ढोक लगाने के लिए आते हैं. हर अमावस्या और शनि महाराज की जयंती के पावन पर्व पर कई हजारों की संख्या में श्रद्धालु श्री उदयनाथ धाम पहुंचते हैं. इस दौरान धोक लगाकर भंडारे में प्रसादी ग्रहण करते हैं. इस दौरान लोगों द्वारा पुण्य प्राप्ति के लिए दान-पुण्य भी दिया गया.
इतिहास के शोधार्थी सन्तोष कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि उदयनाथ बाबा को माँ पार्वती का शक्ति स्वरूप माना जाता है तथा इन्हें नव नाथों में स्थान दिया गया है. यहां पर ऊपर पहाड़ की चोटी में श्री उदयनाथ बाबा की मूर्ति लगी हुई है.
श्री उदयनाथ धाम ने गाँव से दूर जंगल में प्राचीन समय में तपस्या की थी और इस स्थान को बसाया था. जहां पर 2 जगह अखण्ड चलने वाले धूणे भी हैं. यहां बड़ी संख्या में श्रद्धलु पहुंचे हैं.
Add as Preferred Source on Google
स्थानीय लोगों के अनुसार श्री उदयनाथ धाम में बन रही नई गौशाला के पास स्थित गुफ़ा में भर्तृहरि बाबा ने शुरुआत में तपस्या की थी. महंत फ़ूलनाथ महाराज सामाजिक समरसता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं. धाम पर आने वाले हर जाति-वर्ग के श्रद्धालु एक ही स्थान पर बैठकर प्रसादी ग्रहण करते हैं. इस धाम में आने वाले भक्त किसी भी शुभ कार्य जैसे – अपने या अपनों के जन्मदिवस, विवाह की सालगिरह इत्यादि पर कम से कम एक वृक्ष लगाने और उसकी सुरक्षा करने का संकल्प लेते हैं.
श्री उदयनाथ धाम पर अमावस्या और पूर्णिमा को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. इस दौरान यहां आने वाले भक्त तथा यहां पर आसपास के गाँवों के रहने वाले सेवक निःशुल्क सेवायें देकर आश्रम की साफ-सफ़ाई रखते हैं. धाम पर गौशाला तथा गोबर गैस बनाने की सुविधा है. गौशाला में राठी और गिर नस्ल की लगभग 70 से अधिक गाय हैं.
वहीं महंत फ़ूलनाथ महाराज की प्रेरणा से आसपास के ग्रामीणों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने मिलकर यहां पर बरगद, पीपल, गूलर और अन्य प्रजाति के लगभग 6 हजार से अधिक वृक्ष लगाये हैं. वृक्षारोपण अभियान पिछले 9 वर्षों से लगातार चलाया जा रहा है जिसके अंतर्गत हर वर्ष 500 से अधिक बरगद के पेड़ लगाने के साथ उसकी सुरक्षा की जाती है.
धाम का महंत फ़ूलनाथ महाराज को पर्यावरण प्रेमी के नाम से जाना जाता है तथा उनकी प्रेरणा से आश्रम की आय का अधिकांश हिस्सा बरगद के पेड़ लगाने और उनकी सुरक्षा करने में ही खर्च किया जाता है. यहाँ लगभग 50 पेड़ 100 साल से अधिक पुराने है, अलवर की रूपारेल नदी इन्हीं पहाड़ियों से निकलती है. जो अलवर जिले की महत्वपूर्ण नदी मानी जाती है.
श्री उदयनाथ धाम पर हर वर्ष 10 दिसंबर को किशननाथ महाराज जी की पुण्यतिथि पर विशाल मेले एवं भंडारे का आयोजन किया जाता है जिसमें दूर-दराज के साधु-संत भी भाग लेने के लिए आते हैं. इस मेले एवं भंडारे में आसपास एवं दूर-दराज के लाखों भक्त भाग लेने के लिए हर वर्ष आते हैं. धाम पर रोजाना लगभग 150 से अधिक श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी बनाई जाती है तथा रोजाना सुबह श्रद्धालुओं को घाट की राबड़ी वितरित की जाती है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|



