गांव-गांव में मचा धमाल! नीली रावी और मुर्रा भैंसों ने खोला लाखों की कमाई का दूध वाला खजाना…

Last Updated:October 28, 2025, 17:33 IST
Bhilwara News Hindi : कम खर्च में ज्यादा मुनाफा कमाने का सपना देख रहे हैं? तो डेयरी फार्मिंग आपका रास्ता बदल सकती है! नीली रावी और मुर्रा जैसी भैंसें सिर्फ दूध ही नहीं, बल्कि सुनहरा कारोबार साबित हो रही हैं. सही देखभाल और सरकारी मदद से किसान सालाना लाखों की कमाई कर रहे हैं.
भीलवाड़ा – अगर आप गांव या शहर में कम खर्च में ज्यादा मुनाफे वाला बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो डेयरी फार्मिंग यानी दूध का व्यवसाय एक शानदार ऑप्शन हो सकता है. आज के समय में प्रदेश में भैंस के दूध की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि इसका स्वाद, गाढ़ापन और पोषण मूल्य गाय के दूध से ज्यादा माना जाता है. ऐसे में अगर सही नस्ल की भैंस चुनी जाए तो यह काम कम खर्च में बड़ी आमदनी देने वाला साबित हो सकता है. क्योंकि भैंस को पालने में कम खर्च होता है और भैंस दूध उत्पादन भी अच्छा देती है.

अगर आप एक आसान और सबसे सस्ता दूध का उत्पादन करने का बिजनेस की सोच रहे हैं तो भैंस के दूध की इन दोनों सबसे ज्यादा डिमांड होती है. यह दूध आसानी से मिल जाता है और इसकी खपत भी अच्छी होती है नीली रावी नस्ल की भैंस पाकिस्तान के सिंध इलाके से आई है और अब भारत के कई राज्यों में पाई जाती है. यह नस्ल अपने अधिक दूध उत्पादन और सहनशक्ति के लिए जानी जाती है. नीली रावी भैंस रोजाना औसतन 12 से 15 लीटर तक दूध देती है और उसका दूध 6 से 8 प्रतिशत तक फैट वाला होता है, जिससे उससे बने उत्पाद जैसे घी, मलाई और पनीर की क्वालिटी बेहद अच्छी होती है.

मुर्रा नस्ल की भैंस भारतीय पशुपालकों की पुरानी और सबसे भरोसेमंद नस्ल मानी जाती है. यह नस्ल मूल रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के इलाकों में पाई जाती है. मुरहा भैंस रोजाना 10 से 14 लीटर दूध तक दे सकती है और इसकी खासियत यह है कि यह हर मौसम में अनुकूल रहती है. गर्मी, सर्दी या बरसात इसकी उत्पादन क्षमता पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता.

इन दोनों नस्लों का एक बड़ा फायदा यह है कि ये कम बीमार पड़ती हैं और इनकी देखभाल में ज्यादा खर्च नहीं आता. इन्हें रोजाना पर्याप्त पानी, सूखी व हरी चारा व्यवस्था और साफ सुथरा बाड़ा दिया जाए तो ये लंबे समय तक दूध देती रहती हैं. सही पोषण और नियमित टीकाकरण से इनकी उम्र 15 से 20 साल तक रहती है.

नीली रावी और मुर्रा नस्ल पालने वाले किसान और छोटे पशुपालक सालाना लाखों रुपये तक की आमदनी कमा रहे हैं. एक भैंस की औसतन लागत 60 से 80 हजार रुपये तक आती है और दूध बिक्री के साथ-साथ गोबर से भी जैविक खाद बनाकर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है.

अगर कोई नया व्यक्ति दूध का बिजनेस शुरू करना चाहता है, तो शुरुआत में दो भैंसों से काम शुरू करना बेहतर रहेगा. इससे अनुभव के साथ-साथ नियमित ग्राहक बनते हैं और धीरे-धीरे डेयरी को बड़े स्तर पर बढ़ाया जा सकता है. आजकल कई सरकारी योजनाओं में पशुपालकों को सब्सिडी और लोन की सुविधा भी दी जा रही है, जिससे शुरुआती खर्च काफी कम हो जाता है.
First Published :
October 28, 2025, 17:33 IST
homerajasthan
भैंसों से बना लाखों का बिजनेस! नीली रावी-मुर्रा दे रहीं कमाई का मौका



