Rajasthan

Goat Rearing : इस नस्ल की बकरीपालन करने से होगी दोगुना कमाई…किसानों के लिए बन सकती है शानदार कमाई का जरिया

नागौर. वर्तमान समय में हर कोई अलग-अलग तरह से व्यवसाय कर रहा है, कोई गोपालन कर रहा है तो कोई बकरी पालन. लेकिन क्या आपको पता है कि बकरी पालन में एक ऐसी नस्ल है जो अन्य बकरियों की मुकाबला देती है और डबल कमाई का मौका देती है? सिरोही नस्ल की बकरी सिर्फ एक आम बकरी नहीं है, बल्कि किसानों के लिए एक संपत्ति है, पशुपालकों के लिए जीवन-यापन का जरिया है और गांव के घरों में पैसों की बचत करने वाला एक बैंक है. किसान खेती के साथ इस नस्ल की बकरी या बकरे का पालन करके इसे बेचने पर हजारों-लाखों रुपए कमा सकते हैं.

इसके अलावा, गांव के घरों में इसके दूध, छाछ और दही बनाई जाती है, जिससे उन्हें डेयरी या दुकानों से ये चीजें खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती. सिरोही नस्ल का पालन-पोषण आसान होता है और इसके दूध देने की क्षमता भी अन्य बकरियों से अधिक होती है, इसलिए यह गांव के घरों में पैसों की बचत करने वाला बैंक है.

2 से 3 लीटर रोजाना दूध देती है सिरोही बकरी

पिछले कई सालों से सिरोही नस्ल की बकरियों का पालन करने वाले पशुपालक हनुमान प्रसाद ने बताया कि इस नस्ल में दूध उत्पादन क्षमता, सहनशीलता और रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है. बकरियों का शरीर मध्यम आकार का होता है. इनके कान लंबे और लटकते हुए होते हैं, जबकि सींग छोटे और पीछे की ओर मुड़े होते हैं. एक स्वस्थ सिरोही बकरी प्रतिदिन 2 से 3 लीटर दूध दे सकती है, जिसकी वसा की मात्रा लगभग 4-5 प्रतिशत होती है.

बेहद आसान है सिरोही बकरियों का पालन-पोषण

पशुपालक हनुमान प्रसाद की पत्नी बिदामी देवी ने बताया कि सिरोही बकरियों का पालन-पोषण काफी आसान है, क्योंकि यह नस्ल कठिन परिस्थितियों में भी अच्छी तरह से ढल जाती है. यह बकरी राजस्थान की जलवायु के लिए उपयुक्त है, यह कम पानी और चारे पर भी जीवित रह सकती है. इन्हें पालने के लिए विशेष देखभाल की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन संतुलित आहार, साफ पानी और नियमित टीकाकरण से इनकी उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है. सिरोही बकरियां हरी घास, पत्तियों, चारे और अनाज के मिश्रण पर पाली जा सकती हैं.

कम लागत में कमा सकते हैं अधिक मुनाफा

बिदामी देवी ने बताया कि सिरोही नस्ल की बकरियां प्रजनन के लिए भी अच्छी मानी जाती हैं, यह एक बार में 1 से 2 बच्चों को जन्म देती हैं और इनके बच्चे जल्दी बड़े होते हैं. सिरोही बकरियां 6 से 8 महीने में ही प्रजनन के लिए तैयार हो जाती हैं। इस नस्ल का पालन छोटे और बड़े किसान दोनों के लिए फायदेमंद है, क्योंकि यह कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है. सिरोही बकरियों का दूध, मांस और खाद बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है.

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