हैदराबाद का रामगोपालपेट पुलिस स्टेशन विरासत भवन बना

Last Updated:November 28, 2025, 11:06 IST
हैदराबाद का ब्रिटिश कालीन जेम्स स्ट्रीट पुलिस स्टेशन, जिसका निर्माण 1870 में कराया गया था, अब एक हेरिटेज इमारत के रूप में फिर से संवरी हुई पहचान पा रहा है. कभी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिकों का ठिकाना रहा यह भवन समय के साथ जर्जर हो गया था, लेकिन हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा विरासत भवन घोषित किए जाने के बाद इसका व्यापक रेस्टोरेशन किया गया. मीर खान के नेतृत्व में हुए इस संरक्षण कार्य में पुरानी सीमेंट परतों को हटाकर पारंपरिक चूने के प्लास्टर से मूल स्वरूप लौटाया गया.
हैदराबाद. शहर में वैसे तो बहुत सी ऐतिहासिक इमारतें हैं, लेकिन एक ऐसा ऐतिहासिक भवन है जो एक पुलिस स्टेशन है. किसी समय यहां अंग्रेजों की सेना रहा करती थी. समय के साथ यह भवन भी अपनी गरिमा खो रहा था, लेकिन हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने इस भवन को एक विरासत भवन के रूप में नामित किया. अब इस भवन को फिर से रिस्टोर कर दिया गया है, जिसके बाद इतिहास और विरासत में रुचि रखने वाले लोगों की यहां लाइन लगी रहती है.
इतिहासकारों के अनुसार, जब देश में ब्रिटिश शासन का दौर चल रहा था, तब करीब 1870 में जेम्स स्ट्रीट ने इस पुलिस स्टेशन का निर्माण कराया था, जहां ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिक शहर में बसने के बाद आकर ठहरे थे. इस पुलिस स्टेशन का नाम भी जेम्स स्ट्रीट के नाम पर रखा गया, फिर बाद में इस स्टेशन का नाम बदलकर दीवान बहादुर सेठ रामगोपाल के नाम पर रामगोपालपेट पीएस कर दिया गया, जो हैदराबाद की तत्कालीन रियासत में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे, उन्होंने जेम्स स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के निर्माण के लिए पैसे दान किए थे.
रेस्टोरेशन का कामपिछले दो दशकों में जेम्स स्ट्रीट पुलिस स्टेशन की हालत बहुत खराब हो गई थी और इसे मरम्मत की सख्त जरूरत थी. इसे नीले और सफेद रंग से भी रंगा गया था, लेकिन अब इसे हल्का क्रीमी रंग दिया गया है. जेम्स स्ट्रीट पुलिस स्टेशन का रेस्टोरेशन कार्य मीर खान द्वारा किया जा रहा है, जिन्होंने दो साल पहले चारमीनार के पास 16वीं शताब्दी के गुलज़ार हौज़ फव्वारे का भी रेस्टोरेशन किया था.
भवन को दिया नया रूपडेक्कन टेरेन हेरिटेज के मीर खान, जिन्होंने रेस्टोरेशन कार्य किया, उन्होंने बताया कि रेस्टोरेशन के हिस्से के रूप में सीमेंट और सिंथेटिक पेंट जैसी विदेशी सामग्री की कई परतों को सावधानीपूर्वक हटाया गया और प्राचीन चूने के प्लास्टर तकनीक से फिर से बनाया गया. इसमें ईंट की चिनाई पर सजावटी चूने का प्लास्टर घंटाघर के डिजाइन की तरह है, जो ईंट और चूने की महारत के युग को दर्शाता है। यहाँ के घंटाघर की हालत बहुत खराब थी. यहां करीब 400 किलो का पीतल का घंटा था, जिसे एक यादगार के तौर पर ग्राउंड फ़्लोर पर रखा गया है.
Monali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
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Hyderabad,Telangana
First Published :
November 28, 2025, 11:06 IST
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