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Last Updated:December 04, 2025, 09:23 IST
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025: मार्गशीर्ष पूर्णिमा और दत्तात्रेय जयंती आज आज मनाई जा रही है. सुबह 8:37 बजे शुरू होकर यह तिथि 5 दिसंबर सुबह 4:43 बजे तक रहेगी. इस दिन भगवान दत्तात्रेय, श्रीविष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है. ज्योतिषियों के अनुसार व्रत, स्नान, दान, मंत्रजप और श्रीसूक्त के पाठ से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है.
मार्गशीर्ष माह की महापूर्णिमा 2025
करौली. हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा का पावन पर्व 4 दिसंबर, यानी आज गुरुवार को मनाई जा रही है. इस दिन भगवान दत्तात्रेय की जयंती भी मनाई जाती है. हिंदू धार्मिक मान्यताओं में भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का संयुक्त अवतार माना गया है मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय की पूजा करने से त्रिदेवों की उपासना का पुण्य प्राप्त होता है. जयपुर की ज्योतिषी डॉ. दीप्ति शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि 4 दिसंबर को सुबह 8 बजकर 37 मिनट से प्रारंभ होकर 5 दिसंबर की सुबह 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगी.
धार्मिक परंपराओं में तिथि के प्रारंभकाल के आधार पर ही व्रत रखा जाता है, इसलिए पूर्णिमा का व्रत 4 दिसंबर को ही रखा जाएगा.इस तिथि को सुख, समृद्धि देने वाली तिथि माना गया है और ऐसा कहा जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आराधना से धन-धान्य की प्राप्ति होती है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर स्नान और दान करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. व्रत का पालन करते हुए भगवान विष्णु की पूजा और कथा श्रवण करने का भी विधान है. इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि जो भक्त इस दिन व्रत रखकर स्नान या दान करता है उसे कई गुना पुण्यफल प्राप्त होता है.
इस मंत्र के जाप से मिलेगा विशेष फल
जयपुर की ज्योतिषी डॉ. दीप्ति शर्मा ने बताया कि आज भगवान विष्णु की पूजा करते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ तथा ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्रों का जप विशेष फल देता है. कहा जाता है कि तुलसी या चंदन की माला से यह मंत्र जप करने वाले पर भगवान श्रीहरि की असीम कृपा बनी रहती है. इसके साथ ही मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है. यदि भक्त माता लक्ष्मी का आशीर्वाद पाना चाहता है तो उनको कमल पुष्प, पीली कौड़ी, कमलगट्टा और गोमती चक्र अर्पित करने के बाद शुद्ध घी का दीपक जलाकर श्रीसूक्त का पाठ करना चाहिए.
हल्के और सात्विक रंग के वस्त्र पहनें
ज्योतिषी ने बताया कि इस पूर्णिमा को मनाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है. तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, लहसुन और प्याज़ का सेवन त्याग देना चाहिए. नशीले पदार्थों से दूर रहने की हिदायत भी दी गई है. इस अवसर पर काले वस्त्र पहनना भी निषेध माना गया है, क्योंकि इसे नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. जो लोग पूजा-अर्चना करते हैं, माता लक्ष्मी और विष्णु की कृपा के लिए उन्हें हल्के और सात्विक रंग के वस्त्र पहनने चाहिए.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
Location :
Karauli,Rajasthan
First Published :
December 04, 2025, 09:20 IST
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मार्गशीर्ष माह की पवित्र महापूर्णिमा आज, जानें व्रत, पूजा और मंत्रजप का महत्व
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



