पारंपरिक कला और शाही लुक का अद्भुत संगम है यह राजस्थानी गहना, महिलाओं के सौंदर्य का है झिलमिलाता ताज

Last Updated:December 09, 2025, 08:35 IST
राजस्थानी पारंपरिक गहना: राजस्थानी झूमर आभूषण न केवल सजावट है, बल्कि संस्कृति, शान और नारीत्व का प्रतीक है. इसकी लटकती नक्काशी, सोने की चमक और बारीक कलाकारी किसी भी लुक को शाही बना देती है. पारंपरिक डिजाइन राजस्थान से जुड़ा है और राजघरानों में रानी-महारानियां इसे पहनती थीं. झूमर हल्के से हिलते ही चेहरे पर झंकार और निखार पैदा करता है. आज की आधुनिक महिलाओं में शादी, फेस्टिवल और फोटोशूट के लिए इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है.
राजस्थानी परंपरा में गहने केवल सजावट नहीं, बल्कि संस्कृति, नारीत्व और शान का प्रतीक माने जाते हैं. इन्हीं में से एक है झूमर आभूषण, जिसे पहनते ही साधारण लुक भी शाही बन जाता है. झूमर की लटकती नक्काशी, सोने की चमक और नाजुक कलाकारी इसे इतना अनोखा बनाती है कि नजरें बस इसी पर ठहर जाती है. झूमर के बारीक लटके, चमकदार गोल्डन काम और नाजुक कलाकारी हर महिला के व्यक्तित्व में सुंदरता, गरिमा और शान का अनोखा स्पर्श जोड़ देते हैं. आज झूमर पहनना सिर्फ एक स्टाइल नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति को गर्व से अपनाने जैसा है.

झूमर एक लंबे, लटकते और आकर्षक डिजाइन वाला कान का आभूषण होता है. इसका नाम झूमर इसलिए पड़ा, क्योंकि कान के पास झूमर जैसी झिलमिलाहट पैदा करता है. इसकी लटकने मोती, कारीगरी और झंकार इसे बेहद खास बनाती है. आज की आधुनिक दुनिया में भी झूमर आभूषण अपनी पारंपरिक खूबसूरती के कारण पहले से कई गुना ज्यादा लोकप्रिय हो चुका है. चाहे शादी का दिन हो या किसी त्योहार की रौनक झूमर इयरिंग्स हर लुक को दमदार और आकर्षक बना देते हैं.

झूमर की जड़ें राजघरानों की परंपराओं में गहराई तक जुड़ी है. झूमर की शुरुआत मुख्य रूप से राजस्थान से ही मानी जाती है. रानी-महारानियां अपने कानों में भारी नक्काशीदार झूमर पहनती थीं, ताकि उनके राजसी व्यक्तित्व में और भी भव्यता जुड़ सके. जिससे उनका शाही रूप और भी प्रभावशाली दिखता था. आज भी यही परंपरागत डिजाइन आधुनिक फिनिश के साथ फेमस है. शिल्पकारों की हाथों की बारीक कारीगरी से बने ये झूमर न सिर्फ गहने, बल्कि कला के अद्भुत नमूने होते थे और आज भी हैं.
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झूमर की सबसे बड़ी खूबी है इसकी लटकन. जब ये चेहरे के पास हल्के से हिलती हैं, तो एक खूबसूरत झंकार और निखार पैदा करती है, जिससे चेहरा और भी चमक उठता है. सोने पर की गई बारीक जालीदार डिजाइन, फिल्री वर्क, पत्ती-पंखुड़ी की नक्काशी और जड़ाऊ काम हर एक झूमर को खास और अनोखा बनाता है. घाघरा-चोली, साड़ी, लहंगा, सूट जो भी पहनें, झूमर पूरे लुक में एक अलग सी नज़ाकत और शाही अंदाज़ जोड़ देता है. आजकल ऐसे झूमर भी उपलब्ध हैं जो बहुत हल्के वजन के होते हुए भी देखने में बेहद भारी और आकर्षक लगते हैं. यह आधुनिक लड़कियों की पहली पसंद बन चुका है.

आज के समय में झूमर इयररिंग्स की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. इसके कई कारण है. शादी और फेस्टिवल में पारंपरिक लुक का बढ़ता ट्रेंड ने इसकी डिमांड को काफी बढ़ा दिया है. इसी के साथ फोटोशूट और रील्स में झूमर की रॉयल झलक ने अपने आकर्षण से बिक्री में बढोत्तरी कर दी है. अभी यह हल्के वजन में भी दमदार डिज़ाइन में उपलब्ध है. और यह हर उम्र और चेहरे की शेप पर सूट करने वाला बेहतर विकल्प है. सोने के साथ कुंदन, मीनाकारी और एंटीक फिनिश में उपलब्धता ने इसकी मांग में चार चांद लगा दिए हैं. आज ज्यादातर ज्वेलरी शो-रूम में झूमर इयरिंग्स सबसे ज्यादा खरीदे जाने वाले आभूषण बन चुके हैं.

महिलाएं झूमर को सबसे ज्यादा शादी, रिसेप्शन और सगाई में पहनना पसंद करती है. इसी के साथ हल्दी–मेहंदी–संगीत में इंडो वेस्टर्न ड्रेस के साथ मैच कर कर पहनना उनकी पहली पसंद है. झूमर को तीज, करवा चौथ, दीवाली, पारंपरिक फोटोशूट और सांस्कृतिक नृत्य और विशेष अवसर पर भी पहनती है. यह आभूषण लुक को सबसे अलग और आकर्षक बनाता है.
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December 09, 2025, 08:35 IST
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पारंपरिक कला और शाही लुक का अद्भुत संगम है यह गहना, डिमांड भी है जबरदस्त



