Rajasthan

जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार! कंपनियों और अधिकारियों की मिलीभगत के मिले ठोस सबूत, 5 गिरफ्तार

जयपुर. राजस्थान पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बुधवार को मिलीभगत से टेंडर हासिल करने के मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार आरोपियों में ठेकेदार कंपनियों के मालिक, उनके परिजन, लायजनर और पीएचईडी विभाग का एक अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं. इन पर सरकारी धन के गबन का आरोप है. एसीबी की एसआईटी ने जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया, उनमें मेसर्स गणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोप्राइटर महेश कुमार मित्तल, उनके पुत्र हेमंत मित्तल उर्फ गोलू, मेसर्स श्याम ट्यूबवेल कंपनी के मैनेजर व लायजनिंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा, पीएचईडी का लेखाधिकारी गोपाल कुमावत और श्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोप्राइटर पदमचंद जैन के पुत्र पीयूष जैन शामिल हैं.

ये गिरफ्तारियां केस नंबर 215/23 के आधार पर की गई. इस केस में श्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोप्राइटर पदमचंद जैन और गणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोप्राइटर महेश कुमार मित्तल पर पीएचईडी बहरोड़ खंड के पूर्व एक्जीक्यूटिव इंजीनियर मायालाल सैनी, नीमराना उपखंड के सहायक अभियंता राकेश चौहान और जूनियर इंजीनियर प्रदीप कुमार से मिलीभगत कर जल जीवन मिशन के दो टेंडर (नंबर 15/21-22 और 33/21-22) हासिल करने का आरोप है.

कंपनी और अधिकारियों की मिलीभगत के ठोस सबूत मिले

एसीबी को दोनों कंपनियों और पीएचईडी अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच मिलीभगत के ठोस सबूत मिले हैं. सबूतों के अनुसार, इन कंपनियों ने जल जीवन मिशन के कार्यों में अनियमितताएं बरतीं, घटिया गुणवत्ता का काम किया और मनमाने मेजरमेंट बुक भरकर बिल पास कराए, जिन्हें विभागीय अधिकारियों ने मिलीभगत से मंजूरी दी. इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ.ACB ने आरोपियों की आपसी टेलीफोनिक बातचीत रिकॉर्ड की, जिनसे मिलीभगत के पुख्ता प्रमाण मिले. साथ ही, 2 लाख 20 हजार रुपये के लेन-देन के सबूत भी सामने आए, जो भ्रष्टाचार की पुष्टि करते हैं.

900 करोड़ से अधिक के गबन के मिले सुराग

खास बात यह है कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना में राजस्थान में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. प्रदेशभर में इस योजना से जुड़े करीब 900 करोड़ रुपये से अधिक के गबन के सुराग मिले हैं. इस मामले की गूंज देशभर में सुनाई दी और पिछली कांग्रेस सरकार में जलदाय मंत्री रहे महेश जोशी भी जांच के दायरे में आए. कई महीने जेल में रहने के बाद हाल ही में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है.

फास्ट ट्रैक जांच के लिए एसआईटी का किया गया था गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने जल जीवन मिशन के सभी मामलों की फास्ट ट्रैक जांच के लिए एसआईटी का गठन किया.  एसआईटी के प्रमुख  एसपी महावीर सिंह राणावत हैं, जबकि अतिरिक्त एसपी हिमांशु कुलदीप, भूपेंद्र और महावीर प्रसाद शर्मा टीम में शामिल हैं. पीएचईडी के जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार मामले की परतें लगातार खुल रही है और आगे भी कई गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया जा सकता है.

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