तीन पीढ़ियों की मेहनत से बना मॉडल फार्म, किसान ने अपनाई यह खास तकनीक, अब ऑर्गेनिक संतरे से लाखों कमा रहे

Last Updated:December 29, 2025, 13:37 IST
Jhalawar Farmer Success Story: झालावाड़ जिले के सनोरिया गांव में रायल पाटीदार ने 25 एकड़ में ऑर्गेनिक संतरा खेती की मिसाल कायम की. 3000 पौधों से उन्हें लाखों की कमाई हो रही है. उन्होंने पूरी बागवानी में रासायनिक खाद और कीटनाशकों को छोड़कर जैविक तकनीक अपनाई है. बैक्टीरिया आधारित घोल तैयार कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई और उत्पादन में इजाफा किया. इस ऑर्गेनिक प्रणाली से संतरे उच्च गुणवत्ता वाले और बाजार में अच्छे दामों पर उपलब्ध हैं.
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झालावाड़. राजस्थान के झालावाड़ जिले की सुनेल तहसील के छोटे से गांव सनोरिया में रहने वाले रायल पाटीदार ने ऑर्गेनिक संतरा खेती के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है. ये करीब 25 एकड़ भूमि पर ऑर्गेनिक तरीके से आधुनिक खेती कर रहे हैं. इन्होंने अपने खेत में 3000 संतरे के पौधों लगाए थे, जो अब इनको लाखों में कमाई दे रहे हैं. उन्नत किसान रायल पाटीदार ने साबित कर दिया कि वैज्ञानिक सोच, परंपरागत अनुभव और जैविक तकनीक मिलकर खेती को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है.
रायल पाटीदार बताते हैं कि उनके परिवार में संतरा बागवानी की शुरुआत वर्ष 1964 में उनके दादाजी कन्हैयालाल (पूर्व सरपंच) ने की थी. उन्होंने इस समय खेत में 300 पौधों लगाए थे. उस समय सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बागवानी की मजबूत नींव रखी. इसके बाद रायल के पिता ने खेती की बॉर्डर समाधि और इसमें नवाचार किया. फिर वे खुद यानी तीसरी पीढ़ी ने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ इसे बड़े स्तर पर विकसित किया है.
खेती में किया आधुनिक तकनीक का उपयोग
पिछले कुछ सालों में रायल पाटीदार ने सीसीआई नागपुर के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में आलिमों रूटस्टोक माइक्रोबडिंग टेक्नोलॉजी के पौधे लगाए हैं. यह वही तकनीक है जिसे भारतीय वैज्ञानिक वर्ष 2014 में अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से भारत लाए थे. करीब सात वर्षों तक भारतीय परिस्थितियों में परीक्षण और शोध के बाद इसे संतरा उत्पादन का भविष्य माना गया. इस रूटस्टोक से पौधे अधिक स्वस्थ, रोग प्रतिरोधक और दीर्घकालिक उत्पादन देने वाले साबित हो रहे हैं. खास बात यह है कि रायल पाटीदार ने पूरी बागवानी और अन्य फसलों में रासायनिक खाद और कीटनाशकों को छोड़कर पूरी तरह ऑर्गेनिक, बैक्टीरिया आधारित खेती अपनाई है. उन्होंने माइकोराइजा, ट्राइकोडर्मा, एनपीके कल्चर बैक्टीरिया, फूड ग्रेड जैविक इनसेक्टिसाइड, कवच तथा जैविक फंगीसाइड जैसे ब्यूवेरिया बैसियाना का नियमित उपयोग शुरू किया.
ऐसे बना रहे बैक्टीरिया वाला घोल
बैक्टीरिया घोल बनाने की उनकी विधि भी किसानों के लिए बेहद उपयोगी है. रायल पाटीदार ने बताया कि 100 या 200 लीटर के ड्रम में बैक्टीरिया कल्चर डालकर उसमें गुड़ मिलाया जाता है और सात दिनों तक सुबह-शाम हिलाया जाता है. इसके बाद यह घोल उपयोग के लिए तैयार हो जाता है. खास बात यह है कि एक बार बैक्टीरिया तैयार हो जाने के बाद उसे बार-बार गुणा (मल्टीप्लाई) किया जा सकता है, जिससे दोबारा खरीद की जरूरत नहीं पड़ती और लागत लगभग शून्य हो जाती है.
ऑर्गेनिक संतरे को बाजार में मिल रहे अच्छे भाव
उन्होंने बताया कि इस जैविक प्रणाली का असर इतना सकारात्मक रहा कि खेत में बिना केंचुआ डाले ही केंचुओं की संख्या लाखों में पहुंच गई. मिट्टी की उर्वरता बढ़ी, उत्पादन में इजाफा हुआ और कीटनाशकों पर होने वाला भारी खर्च पूरी तरह खत्म हो गया. आज रायल पाटीदार न सिर्फ शुद्ध ऑर्गेनिक संतरे और अन्य उत्पाद स्वयं उपयोग कर रहे हैं, बल्कि बाजार में अच्छे दाम पर बेचकर अपनी आमदनी भी बढ़ा रहे हैं. सनोरिया गांव की यह ऑर्गेनिक संतरा बागवानी अब पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनती जा रही है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
Location :
Jhalawar,Rajasthan
First Published :
December 29, 2025, 13:37 IST
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तीन पीढ़ियों की मेहनत से बना मॉडल फार्म, अब संतरे से लाखों कमा रहे किसान



