Indian Railway : बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार और संख्या, जोधपुर स्टेशन के लिए रेलवे का मास्टर प्लान तैयार

जोधपुर. उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर और जयपुर रेलवे स्टेशनों पर लगातार बढ़ रही ट्रेनों और यात्रियों की संख्या को देखते हुए रेलवे ने इन स्टेशनों की संचालन क्षमता को दोगुना करने की दिशा में एक व्यापक योजना प्रस्तावित की है. इस योजना के तहत स्टेशनों के ढांचागत विकास के साथ-साथ नई ट्रेनों के संचालन की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की जाएगी. इसका उद्देश्य भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेल संचालन को अधिक सक्षम और व्यवस्थित बनाना है.
रेलवे द्वारा इस उद्देश्य से देश के 48 प्रमुख रेलवे स्टेशनों की आधारभूत संरचना के विकास के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया जा रहा है. इस सूची में जोधपुर रेलवे स्टेशन को भी शामिल किया गया है. योजना के माध्यम से यात्री सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ ट्रेनों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा.
अल्पकालिक और मध्यम अवधि के उपायों पर फोकसउत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकिरण ने बताया कि व्यस्त स्टेशनों पर यातायात को सुव्यवस्थित करने और क्षमता वृद्धि के लाभ शीघ्र प्राप्त करने के लिए अल्पकालिक और मध्यम अवधि के उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. यह प्रक्रिया उपनगरीय और गैर उपनगरीय दोनों प्रकार के यातायात के लिए लागू की जाएगी. इसमें दोनों श्रेणियों की अलग-अलग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजना बनाई जाएगी.
उन्होंने बताया कि सूचीबद्ध 48 प्रमुख शहरों के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर योजना निदेशालय को प्रस्तुत की जाएगी. इस कार्ययोजना में ट्रेनों की संचालन क्षमता को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नियोजित, प्रस्तावित और पहले से स्वीकृत कार्यों का पूरा विवरण शामिल होगा.
वर्ष 2030 तक क्षमता दोगुनी करने का लक्ष्यरेलवे की योजना के अनुसार वर्ष 2030 तक संचालन क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. हालांकि, इसके लाभ यात्रियों को जल्द मिल सकें, इसके लिए अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से क्षमता में वृद्धि की जाएगी. बढ़ती यात्री मांग को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए कार्यों को तत्काल, अल्पकालिक और दीर्घकालिक श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा.
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि यात्रा की मांग में हो रही तेज वृद्धि को देखते हुए आने वाले पांच वर्षों में प्रमुख शहरों से नई ट्रेनों के संचालन की क्षमता को वर्तमान स्तर से दोगुना करना आवश्यक हो गया है. इसके लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे का विस्तार और उन्नयन किया जाएगा, ताकि भविष्य की जरूरतों को समय रहते पूरा किया जा सके.
जोनल रेलवे को कार्ययोजना बनाने का सुझावप्रस्तावित योजना स्पष्ट समयसीमा और परिभाषित परिणामों के साथ तैयार की जाएगी. हालांकि यह अभ्यास चयनित स्टेशनों के लिए किया जा रहा है, लेकिन प्रत्येक जोनल रेलवे को अपने-अपने मंडलों में ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने के लिए अलग से कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया गया है. इससे न केवल टर्मिनल क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि स्टेशनों और यार्डों में परिचालन से जुड़ी बाधाओं का समाधान भी संभव हो सकेगा.
प्रस्तावित प्रमुख कार्य और विकास योजनाएंवर्ष 2030 तक संचालन क्षमता को दोगुना करने के लिए रेलवे द्वारा कई प्रमुख कार्य प्रस्तावित किए गए हैं. इनमें मौजूदा टर्मिनलों पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, स्टेबलिंग लाइन, पिट लाइन और पर्याप्त शंटिंग सुविधाओं का विकास शामिल है. इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों और उनके आसपास नए टर्मिनलों की पहचान और निर्माण की योजना भी बनाई गई है.
इसके अलावा रखरखाव सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया जाएगा, जिसमें मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स की स्थापना शामिल है. ट्रेनों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए यातायात सुविधा कार्य, सिग्नलिंग सिस्टम का उन्नयन और मल्टीट्रैकिंग के माध्यम से अनुभागीय क्षमता बढ़ाई जाएगी. टर्मिनलों की क्षमता बढ़ाते समय आसपास के स्टेशनों की क्षमता को भी ध्यान में रखा जाएगा, ताकि संतुलित और समग्र क्षमता विकास सुनिश्चित किया जा सके.



