सांड बना मौत का कारण! अदालत ने ठोका नगरपालिका पर 1 लाख का जुर्माना, 2 महीने में नहीं दिए पैसे तो बढ़ेगा ब्याज

रिपोर्टर- हरवीर.
धौलपुर: धौलपुर जिले की बाड़ी नगरपालिका क्षेत्र में आवारा सांडों के कारण हो रही दुर्घटनाओं की हानि के मामले में स्थाई लोक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने नगरपालिका को इस समस्या के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. इस फैसले से स्थानीय प्रशासन पर आवारा पशुओं को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी और भी सख्ती से लागू हो गई है.
यह मामला वर्ष 2022 का है, जब धनोरा रोड पर एक आवारा सांड की टक्कर से एक निर्दोष शिक्षक की मौत हो गई थी. इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया था और लोगों ने नगरपालिका की लापरवाही को लेकर सवाल उठाए थे. 19 सितंबर 2022 को धौलपुर जिले के बाड़ी क्षेत्र में स्थित धनोरा रोड पर एक हृदयविदारक घटना घटी. स्थानीय शिक्षक बहादुर सिंह सड़क से गुजर रहे थे, तभी एक आवारा सांड ने उन पर जोरदार टक्कर मार दी. इस टक्कर में बहादुर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई.
बहादुर सिंह एक सम्मानित शिक्षक थे, जो समाज में शिक्षा प्रसार के कार्य में लगे हुए थे. उनकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया. परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि नगरपालिका बाड़ी ने आवारा सांडों को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए थे, जिसके कारण ऐसी दुर्घटनाएं लगातार हो रही थीं. क्षेत्र में आवारा पशुओं की समस्या वर्षों से चली आ रही थी, लेकिन प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन ही मिलते रहे.
निर्दोष नागरिकों की जान न जाएमृतक शिक्षक बहादुर सिंह की पत्नी भूरोदेवी ने न्याय की गुहार करते हुए स्थाई लोक अदालत में मुकदमा दायर किया. उन्होंने नगरपालिका बाड़ी, तत्कालीन चेयरमैन और अधिशाषी अधिकारी को मामले में जिम्मेदार ठहराया. मुकदमे में कहा गया कि आवारा सांडों को सड़कों पर बिना रोक-टोक घूमने देने के कारण उनकी पति की मौत हुई है. भूरोदेवी ने मांग की कि नगरपालिका को इस लापरवाही के लिए दंडित किया जाए और परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए. उन्होंने अदालत से अपील की कि ऐसे मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में अन्य निर्दोष नागरिकों की जान न जाए.
एक लाख रुपये का जुर्माना लगायास्थाई लोक अदालत के न्यायाधीश सुरेश प्रकाश भट्ट ने मामले की सुनवाई के बाद नगरपालिका बाड़ी के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. अदालत ने नगरपालिका को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुए तत्कालीन चेयरमैन और अधिशाषी अधिकारी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.
यह फैसला आवारा पशुओं की समस्या से निपटने में स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है. अदालत ने कहा कि नगरपालिका का कर्तव्य है कि वह क्षेत्र में आवारा सांडों, कुत्तों और अन्य पशुओं को नियंत्रित रखे. यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो प्रशासनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा.
भुगतान न करने पर ब्याज भी लगेगाअदालत के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जुर्माना राशि दो माह के अंदर भुगतान करनी होगी. यदि 2 महीने के अंदर राशि जमा नहीं की गई, तो उस पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी लगेगा. यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि फैसला केवल कागजी नहीं रहे, बल्कि व्यावहारिक रूप से लागू भी हो. न्यायाधीश सुरेश प्रकाश भट्ट ने अपने फैसले में नगरपालिका को निर्देश दिए कि वह आवारा पशुओं के नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए. इसमें पशु चिकित्सा विभाग के साथ समन्वय, पकड़ने की व्यवस्था और उचित आश्रय स्थलों का निर्माण शामिल है.
अदालत के इस सख्त रवैये की सराहना कीयह फैसला केवल एक मामले का समाधान नहीं है, बल्कि पूरे राजस्थान में आवारा पशुओं की समस्या से जूझ रहे अन्य नगर निकायों के लिए भी एक मिसाल है. कई शहरों और कस्बों में आवारा सांड और कुत्ते सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बन चुके हैं. इस फैसले से उम्मीद की जा रही है कि अन्य स्थानीय निकाय भी अपनी जिम्मेदारी समझेंगे और सक्रिय रूप से कार्य करेंगे.भूरोदेवी और उनके परिवार ने फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके पति की आत्मा को शांति देगा और अन्य परिवारों को ऐसी त्रासदी से बचाएगा. वहीं, स्थानीय नागरिकों ने भी अदालत के इस सख्त रवैये की सराहना की है.



