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Mango Farming In Barmer | आम की खेती | 3 लाख वाला मियाजाकी आम | Mango Farming in Barmer Miyazaki Variety Rajasthan

Last Updated:April 25, 2026, 06:28 IST

Mango Farming in Barmer: बाड़मेर जिले के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक करणीदान ने थार के रेगिस्तान में आम की खेती कर एक अद्भुत मिसाल पेश की है. 2020 में रिटायरमेंट के बाद उन्होंने 45 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी और भारी जल संकट के बावजूद अपने खेत में आम का बगीचा लगाया. आज उनके यहाँ मियाजाकी, केसर, हापुस और दशहरी जैसी आम की 12 उन्नत किस्में फल दे रही हैं. इनमें शामिल मियाजाकी किस्म दुनिया के सबसे महंगे आमों में शुमार है, जिसकी कीमत करीब 3 लाख रुपये प्रति किलो तक होती है. करणीदान हर साल करीब डेढ़ लाख रुपये केवल सिंचाई के पानी पर खर्च करते हैं ताकि रेगिस्तानी तापमान में पौधों को नमी मिल सके.

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बाड़मेर. राजस्थान का थार रेगिस्तान, जहाँ गर्मियों में आसमान से आग बरसती है और पारा 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है. जहाँ पानी की एक-एक बूंद के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ता है, उसी तपती रेतीली धरती पर एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने ‘असंभव’ को ‘संभव’ कर दिखाया है. बाड़मेर के रहने वाले पूर्व प्रधानाध्यापक करणीदान ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से रेगिस्तान के बीचों-बीच आमों का एक ऐसा नंदनवन तैयार किया है, जिसे देखकर कृषि विशेषज्ञ भी हैरान हैं. साल 2020 में रिटायरमेंट के बाद शुरू हुआ यह सफर आज एक सफल ‘मैंगो फार्म’ में तब्दील हो चुका है.

करणीदान के इस अनोखे बगीचे में आम की कोई एक-दो नहीं, बल्कि 12 दुर्लभ और उन्नत किस्में लहलहा रही हैं. इनमें केसर, हापुस, लंगड़ा, रत्नागिरी, अंबिका और दशहरी जैसे प्रसिद्ध नाम शामिल हैं. लेकिन इस बगीचे का सबसे बड़ा आकर्षण ‘मियाजाकी’ आम है. जापान की मूल प्रजाति का यह आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 3 लाख रुपये प्रति किलो तक की कीमत पर बिकता है. करणीदान ने सिरोही के शिवगंज से करीब 4 हजार रुपये प्रति पौधे की दर से उच्च गुणवत्ता वाले पौधे खरीदकर इस बगीचे की नींव रखी थी. आज उनके खेत में आम के 120 पेड़ों सहित चीकू, अनार और नींबू के कुल 270 फलदार पौधे हरियाली बिखेर रहे हैं.

पानी पर सालाना डेढ़ लाख का खर्चरेगिस्तान में बागवानी करना कोई आसान काम नहीं है, खासकर तब जब यहाँ भूजल स्तर बहुत नीचे हो और लू के थपेड़े पौधों को झुलसाने के लिए तैयार हों. करणीदान बताते हैं कि आम के पौधों को जीवित रखने के लिए नमी और निरंतर सिंचाई की आवश्यकता होती है. पानी की किल्लत के बावजूद वे हार नहीं मानते और हर साल लगभग डेढ़ लाख रुपये सिर्फ पानी के टैंकरों और सिंचाई व्यवस्था पर खर्च करते हैं. 45 डिग्री की चिलचिलाती धूप में पौधों को बचाने के लिए वे विशेष तकनीक और देखभाल का सहारा लेते हैं, जिसका परिणाम आज सैकड़ों क्विंटल आम के उत्पादन के रूप में सामने आ रहा है.

रिटायरमेंट के बाद नया मिशनशिक्षा जगत में दशकों तक ज्ञान का उजियारा फैलाने वाले करणीदान अब कृषि के क्षेत्र में नई इबारत लिख रहे हैं. उनका यह बगीचा केवल आमों तक सीमित नहीं रहेगा; उनका आगामी सपना बालाजी नींबू, लाल चंदन, थार शोभा खेजड़ी और महुआ जैसे बेशकीमती पौधे लगाने का है. वे साबित कर चुके हैं कि अगर आधुनिक सोच और पारंपरिक मेहनत का मेल हो, तो रेगिस्तान की रेतीली मिट्टी भी सोना उगल सकती है. आज उनका यह बगीचा बाड़मेर के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का एक सशक्त केंद्र बन गया है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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Location :

Barmer,Barmer,Rajasthan

First Published :

April 25, 2026, 06:28 IST

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