जब स्कूल की रसोइया की निकली अंतिम यात्रा, छात्रों की आंखों से छलक पड़े आंसू- ऐसा प्यार आपने पहले कभी नहीं देखा

Last Updated:April 26, 2026, 19:10 IST
Bhilwara Hindi News: एक बेहद भावुक कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्कूल में खाना बनाने वाली एक महिला को छात्रों द्वारा दी गई अंतिम विदाई हर किसी की आंखें नम कर रही है. यह महिला सिर्फ रसोइया नहीं थी, बल्कि बच्चों के लिए मां समान थी, जो रोज उन्हें प्यार से खाना खिलाती थी. उनके निधन के बाद स्कूल के छात्रों ने जिस तरह से उन्हें अंतिम विदाई दी, वह इंसानियत और रिश्तों की गहराई को दर्शाता है. बच्चों की आंखों में आंसू और उनके चेहरे पर दर्द साफ दिखाई देता है. इस घटना ने यह साबित कर दिया कि सच्चा रिश्ता खून से नहीं, बल्कि प्यार और अपनापन से बनता है.
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भीलवाड़ा: आमतौर पर देखा जाता है कि हर व्यक्ति या फिर स्टूडेंट के स्कूल से जुड़ी हर एक याद सबसे यादगार लम्हा होता है और स्कूल में शिक्षक हो चाहे स्कूल का स्टाफ हो उनसे एक अनोखा रिश्ता बन जाता है यही रिश्ता जीवन भर स्टूडेंट को याद रहता है आज इस रिश्ते को चरितार्थ कर देने वाला अनोखा नजारा देखने को मिला है. बदनोर क्षेत्र के पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, चतरपुरा में पिछले 25 वर्षों से बच्चों के लिए पोषाहार बनाने वाली लाडी बाई के आकस्मिक निधन से पूरे गांव में गहरा शोक छा गया.
वे सिर्फ एक कुक कम हेल्पर नहीं थीं, बल्कि बच्चों के लिए मां समान थीं. उनकी रसोई से निकलने वाला हर भोजन सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि ममता और अपनापन से भरा होता था. उनके निधन की खबर मिलते ही विद्यालय सहित पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया और हर आंख नम नजर आई.
हर किसी के दिल को छू गयालाडी बाई वर्ष 2001 से लगातार विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रही थीं. उन्होंने हजारों बच्चों को अपने हाथों से खाना बनाकर खिलाया. वह हर बच्चे का खास ध्यान रखती थीं. कोई बच्चा भूखा न रहे, कोई उदास न बैठे यह उनकी रोज की चिंता होती थी. वे सिर्फ खाना नहीं बनाती थीं, बल्कि बच्चों के सुख-दुख में भी साथ खड़ी रहती थीं. यही कारण है कि उनका जाना पूरे गांव के लिए एक अपूरणीय क्षति बन गया है. उनके निधन के बाद विद्यालय परिसर में भावुक दृश्य देखने को मिला. छात्र-छात्राएं और स्टाफ सदस्य विद्यालय के बाहर पंक्ति में खड़े होकर नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते नजर आए. बच्चों ने हाथों में फूल लेकर अपनी लाडी बाई को अंतिम विदाई दी. कई बच्चों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे, मानो उन्होंने अपने परिवार के किसी सदस्य को खो दिया हो. यह दृश्य हर किसी के दिल को छू गया.
स्नेह, सेवा और त्याग हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगागांव के लोगों का कहना है कि लाडी बाई का स्वभाव बेहद सरल और स्नेहिल था. वे हमेशा मुस्कुराते हुए बच्चों को खाना परोसती थीं और हर किसी से अपनत्व से बात करती थीं. उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा बच्चों की सेवा में समर्पित कर दिया. उनकी मेहनत और समर्पण ने न केवल बच्चों के जीवन को छुआ, बल्कि पूरे गांव में एक मिसाल कायम की. लाडी बाई का जीवन हमें यह सिखाता है कि सेवा और समर्पण का कोई छोटा या बड़ा रूप नहीं होता. उन्होंने बिना किसी दिखावे के, पूरी ईमानदारी और प्रेम से अपना काम किया और सभी के दिलों में खास जगह बनाई.
आज उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना मुश्किल है, लेकिन उनकी यादें और उनके द्वारा दिया गया स्नेह हमेशा जीवित रहेगा. विद्यालय परिवार और ग्रामीणों ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. लाडी बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका स्नेह, सेवा और त्याग हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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Location :
Bhilwara,Rajasthan
First Published :
April 26, 2026, 19:10 IST



