लॉकहीड मार्टिन का कॉम्बैट सिस्टम और मार्क 48 टॉरपीडो, ताइवान को मिल गया वो कॉम्बो जो चीन को सोने नहीं देगा

नई दिल्ली. ताइवान ने अपनी पहली घरेलू विकसित पनडुब्बी नरवाल से सफलतापूर्वक टॉरपीडो परीक्षण कर अपनी सैन्य शक्ति का लोहा मनवाया है. ड्रैगन (चीन) के बढ़ते खतरों के बीच ताइवान का यह कदम न केवल उसकी आत्मरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि दक्षिण चीन सागर में शक्ति संतुलन को बदलने वाला भी साबित हो सकता है. ताइवान की इस पनडुब्बी की सबसे बड़ी ताकत इसका कॉम्बैट सिस्टम और मारक क्षमता है. इसमें अमेरिकी दिग्गज कंपनी लॉकहीड मार्टिन का एडवांस कॉम्बैट सिस्टम लगा है. इसके साथ ही यह पनडुब्बी अमेरिका निर्मित मार्क 48 हैवीवेट टॉरपीडो से लैस है. यह कॉम्बो इसलिए घातक है क्योंकि लॉकहीड मार्टिन का सिस्टम दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों का सटीक पता लगाने, ट्रैक करने और उन पर निशाना साधने में माहिर है. वहीं, मार्क 48 टॉरपीडो अपनी जबरदस्त रफ्तार और गहरे पानी में मार करने की क्षमता के लिए दुनिया भर में मशहूर है. यह चीन की विशाल नौसेना (PLAN) के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनने वाला है.
प्रमुख विशेषताएं और परीक्षण के नतीजेपनडुब्बी का निर्माण ताइवानी कंपनी CSBC Corp द्वारा किया गया है. हालिया परीक्षण के दौरान निम्नलिखित क्षमताओं की पुष्टि की गई है:
· सटीक निशाना: कॉम्बैट सिस्टम ने सफलतापूर्वक दुश्मन के लक्ष्य का पता लगाया और उसे ट्रैक किया.
· फायर कंट्रोल: टॉरपीडो लॉन्च करने की प्रक्रिया और फायर कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह सुचारू पाया गया.
· गाइडेंस सिस्टम: टॉरपीडो की गाइडेंस और दिशा नियंत्रण का सफल परीक्षण हुआ.
· रणनीतिक बढ़त: ताइवान का लक्ष्य 2027 तक ऐसी दो पनडुब्बियां तैनात करना है, जो बाद में मिसाइलों से भी लैस हो सकती हैं.
क्यों डरा हुआ है चीन?चीन के पास तीन विमानवाहक पोत और कई परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां हैं. इसके बावजूद ताइवान की नरवाल चीन के लिए खतरा है क्योंकि पनडुब्बियां एसिमेट्रिक वारफेयर का सबसे प्रभावी हथियार हैं. ताइवान की समुद्री सीमाएं उथली और जटिल हैं, जहां छोटी और शांत पनडुब्बियां चीन के बड़े युद्धपोतों को आसानी से निशाना बना सकती हैं. यह ताइवान की समुद्री जीवन रेखा की रक्षा करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी.
सवाल-जवाब नरवाल पनडुब्बी का निर्माण किस कंपनी ने किया है?
इसका निर्माण ताइवान की प्रमुख जहाज निर्माण कंपनी CSBC Corp ने किया है.
इस पनडुब्बी में कौन सा अमेरिकी टॉरपीडो इस्तेमाल किया जा रहा है?
इसमें अमेरिका निर्मित मार्क 48 (Mark 48) हैवीवेट टॉरपीडो का इस्तेमाल किया जा रहा है.
ताइवान को इस प्रोजेक्ट में किन देशों से मदद मिली है?
ताइवान को इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञता और तकनीक प्राप्त हुई है.
ताइवान का भविष्य में कितनी पनडुब्बियां बनाने का लक्ष्य है?
ताइवान का लक्ष्य कुल 8 स्वदेशी पनडुब्बियों का एक बेड़ा तैयार करना है.



