दोस्त के खेत में देखा मुनाफा, किसान ने 18 बीघा में लगाए 2000 आंवले के पौधे; अब 35 लाख कमाई की उम्मीद

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दोस्त से मिली प्रेरणा, किसान ने लगाए 2000 आंवले के पौधे, 35 लाख कमाई की उम्मीद
Last Updated:May 07, 2026, 15:30 IST
Karauli Farmer Success Story: करौली जिले के माढ़ई गांव के किसान विजय सिंह मीणा ने पारंपरिक गेहूं और सरसों की खेती छोड़कर आंवले की बागवानी अपनाई और अब लाखों की कमाई की तैयारी कर रहे हैं. बढ़ती लागत, पानी की कमी और कम मुनाफे से परेशान होकर उन्होंने यह बदलाव किया. दोस्त के खेत में आंवले की सफल खेती देखकर प्रेरित हुए विजय सिंह ने अपनी 18 बीघा जमीन में करीब 2000 पौधे लगाए हैं. ड्रिप सिंचाई और जैविक खाद की मदद से कम खर्च में बेहतर उत्पादन मिल रहा है. अगले साल से फल उत्पादन शुरू होने और भविष्य में 30 से 35 लाख रुपये सालाना आय की उम्मीद है.
कभी गेहूं और सरसों की खेती से मुश्किल से परिवार चलाने वाले विजय सिंह अब आंवले की खेती से सालाना लाखों रुपये कमाने की तैयारी में हैं. कई वर्षों तक पारंपरिक खेती करने के बावजूद बढ़ती लागत, पानी की कमी और कम मुनाफे ने उन्हें आर्थिक परेशानियों में डाल दिया था. इसी बीच उन्होंने पास के एक गांव में अपने दोस्त के खेत में आंवले की बागवानी देखी, जिसने उनकी सोच बदल दी. इसके बाद विजय सिंह ने पारंपरिक फसलों की जगह आंवले की खेती शुरू की. अब कम पानी और कम लागत में बेहतर उत्पादन मिलने से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है.
किसान विजय सिंह का कहना है कि आंवले का पौधा तीसरे साल से फल देना शुरू कर देता है, जबकि पांचवें साल तक यह बंपर उत्पादन देने लगता है. उन्होंने अपने खेत में करीब 2000 पौधे लगाए हैं, जिनसे अगले साल से अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद है. विजय सिंह के अनुसार, आंवले की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम है और बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. यही वजह है कि उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी को अपनाया. उनका अनुमान है कि आने वाले समय में उन्हें इस खेती से हर साल करीब 30 से 35 लाख रुपये तक की आय हो सकती है.
करौली जिले में अब किसान पारंपरिक खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर नई फसलों और बागवानी की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इसी बदलाव की मिसाल बने हैं माढ़ई गांव के किसान विजय सिंह मीणा. कई वर्षों तक गेहूं और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करने के बाद उन्होंने आंवले की बागवानी अपनाई. इसकी प्रेरणा उन्हें अपने दोस्त के खेत में तैयार आंवले का बगीचा देखकर मिली. इसके बाद उन्होंने अपने खेत में बड़े स्तर पर आंवले के पौधे लगाए. अब कम लागत और बेहतर मुनाफे की उम्मीद ने उनकी आर्थिक स्थिति बदलनी शुरू कर दी है.
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विजय सिंह के मुताबिक, पहले गेहूं और सरसों की खेती में काफी पानी और लागत लगती थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अच्छा मुनाफा नहीं मिल पाता था. लगातार बढ़ते खर्च और कम आमदनी के कारण खेती करना मुश्किल होता जा रहा था. वहीं आंवले की खेती में शुरुआती वर्षों के बाद बहुत कम पानी की जरूरत पड़ती है और रखरखाव का खर्च भी कम रहता है. बाजार में इसकी मांग भी अच्छी बनी रहती है. यही वजह रही कि उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी को अपनाने का फैसला लिया, जिससे अब बेहतर आय की उम्मीद है.
दोस्त की बढ़ती आमदनी और कम खर्च वाली खेती ने विजय सिंह को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने भी अपनी खेती का तरीका बदलने का फैसला कर लिया. किसान विजय सिंह बताते हैं कि शुरुआत में उन्होंने प्रयोग के तौर पर कुछ आंवले के पौधे लगाए थे. जब पौधों की बढ़त अच्छी रही और शुरुआती उत्पादन बेहतर मिला, तो उनका भरोसा और मजबूत हो गया. इसके बाद उन्होंने चित्तौड़गढ़ से करीब 2000 आंवले के पौधे मंगवाए और अपनी 18 बीघा जमीन में उनका रोपण कर दिया. अब उन्हें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह बागवानी उन्हें बेहतर मुनाफा देगी.
करीब दो साल पहले लगाए गए आंवले के पौधे अब तीसरे साल में प्रवेश कर चुके हैं और अगले साल से इनमें फल आना शुरू हो जाएगा. किसान विजय सिंह अपने पूरे बगीचे की सिंचाई ड्रिप तकनीक से करते हैं, जिससे पानी की काफी बचत होती है और हर पौधे तक बराबर मात्रा में नमी पहुंचती है. इससे पौधों की बढ़त भी बेहतर हो रही है. अच्छी गुणवत्ता और उत्पादन के लिए वे देसी जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं. साथ ही पौधों को दीमक और अन्य बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर दवाइयों का छिड़काव भी किया जाता है.
अब करौली जिले के माढ़ई गांव के किसान विजय सिंह अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी और कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनका कहना है कि बदलते मौसम, पानी की कमी और बढ़ती लागत को देखते हुए किसानों को नई तकनीक और वैकल्पिक खेती अपनानी चाहिए. विजय सिंह अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि आंवले जैसी बागवानी फसलें कम खर्च में बेहतर मुनाफा दे सकती हैं. उनके खेत को देखने के लिए आसपास के कई किसान पहुंच रहे हैं और इस खेती में रुचि दिखा रहे हैं.



