Agriculture Tips: भरतपुर में किसानों के लिए बड़ा खतरा! गर्मी बढ़ते ही खेतों में फैल रही दीमक, फसल बचाने के लिए तुरंत करें ये काम

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गर्मी बढ़ते ही खेतों में फैल रही दीमक, फसल बचाने के लिए तुरंत करें ये काम
Last Updated:May 12, 2026, 15:52 IST
Agriculture Tips And Tricks: भरतपुर समेत कई इलाकों में बढ़ती गर्मी के बीच किसानों के सामने अब दीमक का खतरा भी बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है. कृषि विभाग का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर अपनाए गए उपाय फसलों को भारी नुकसान से बचा सकते हैं.
भरतपुर. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही खेतों में सूखापन तेजी से बढ़ने लगता है. यही वजह है कि इस समय दीमक का खतरा भी काफी बढ़ जाता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गर्म और सूखी मिट्टी दीमक के पनपने के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती है. ऐसे में किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. दीमक फसलों की जड़ों और तनों को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती है, जिससे पौधे धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते सही उपाय नहीं किए जाएं तो दीमक पूरी फसल को प्रभावित कर सकती है. इससे बचाव का सबसे आसान तरीका खेत में नमी बनाए रखना है. सूखी जमीन में दीमक तेजी से फैलती है, जबकि नमी रहने पर इसका असर काफी कम हो जाता है. इसके अलावा फसल कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को तुरंत हटाना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि यही अवशेष दीमक के पनपने का मुख्य कारण बनते हैं.
गहरी जुताई से कम होता है खतराविशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करना बेहद फायदेमंद साबित होता है. ट्रैक्टर से की गई गहरी जुताई में मिट्टी पलट जाती है, जिससे जमीन के अंदर छिपे दीमक और अन्य कीट तेज धूप के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं. किसानों के लिए यह तरीका काफी सस्ता और असरदार माना जाता है. खेत को साफ रखने और समय-समय पर जुताई करने से दीमक के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है.
अधपकी खाद बढ़ा सकती है परेशानीकृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खेत में केवल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद का ही इस्तेमाल करें. अधपकी खाद दीमक को आकर्षित करती है और इसका प्रकोप बढ़ा सकती है. इसके अलावा नीम खली और अन्य जैविक उपाय भी दीमक नियंत्रण में काफी मददगार माने जाते हैं. अधिकारियों का कहना है कि रासायनिक दवाओं का उपयोग केवल जरूरत पड़ने पर और विशेषज्ञों की सलाह से ही करना चाहिए. सही समय पर अपनाए गए ये उपाय फसल को सुरक्षित रखने में काफी कारगर साबित हो सकते हैं.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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