800 साल पुराने शनि मंदिर का रहस्य! मोर पंख के झाड़े से दूर होते हैं कष्ट, उमड़ रही भक्तों की भीड़

Last Updated:May 12, 2026, 17:37 IST
Bhilwara News Hindi : भीलवाड़ा के गांधीनगर स्थित जय श्री शनि देव मंदिर में आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलता है. करीब 800 साल पुराने इस मंदिर में मोर पंख का झाड़ा लगाने की परंपरा लोगों के बीच खास विश्वास का केंद्र बनी हुई है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है और कष्ट दूर हो जाते हैं.
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भीलवाड़ा : भीलवाड़ा शहर के गांधीनगर इलाके में स्थित जय श्री शनि देव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यह मंदिर करीब 800 वर्ष पुराना बताया जाता है और अपनी प्राचीनता के साथ-साथ अनोखी परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां रोजाना बड़ी संख्या में भक्त भगवान शनि देव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर में सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती और भक्तों को राहत मिलती है. यही वजह है कि यह मंदिर भीलवाड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी प्रसिद्ध हो चुका है.
श्रद्धालु इस अनोखे स्वरूप के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में आने वाले भक्त खाली हाथ नहीं लौटते. उनकी समस्याओं का समाधान होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है. यही वजह है कि यह मंदिर आज भी लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है और हर दिन यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
मेवाड़ रियासत काल से ही है यह मूर्ति पुजारी हीरालाल जोशी ने बताया कि इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है. उन्होंने कहा कि जब भीलवाड़ा क्षेत्र भीलों का बाड़ा हुआ करता था और महाराणा प्रताप के शासनकाल का समय था, तभी से यहां भगवान शनि देव की प्रतिमा स्थापित है. इस वजह से यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से खास माना जाता है. मंदिर में एक अनोखी परंपरा भी देखने को मिलती है, जो भक्तों के बीच खास विश्वास का कारण बनी हुई है. यहां भगवान शनि देव के दरबार में मोर पंख का झाड़ा लगाया जाता है. मान्यता है कि इस झाड़े से भक्तों की पीड़ा, कष्ट और बीमारियां दूर हो जाती हैं. यही कारण है कि कई श्रद्धालु विशेष रूप से इस झाड़े के लिए मंदिर पहुंचते हैं और इसे अपनी परेशानियों से मुक्ति का माध्यम मानते हैं.
10 पीढियों से पुजारी परिवार कर रहा है सेवामंदिर के मुख्य पुजारी हीरालाल जोशी ने बताया कि इस मंदिर की एक और बड़ी विशेषता इसकी परंपरा है, जिसे पुजारी परिवार कई पीढ़ियों से निभाता आ रहा है. उनके परिवार की करीब 10 पीढ़ियां यहां भगवान शनि देव की पूजा और सेवा कर रही हैं. उन्होंने बताया कि यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से लगातार चली आ रही है, जिससे मंदिर की धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
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Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan



