Rajasthan

अरावली की गोद में छिपा 800 साल पुराना चमत्कारी शिवधाम! जहां से दिखता है पूरा भीलवाड़ा शहर

Last Updated:May 12, 2026, 18:09 IST

Bhilwara News Hindi : भीलवाड़ा शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर अरावली की पहाड़ियों में बसा हरणी महादेव मंदिर आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम है. कभी गुप्तेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध यह प्राचीन शिवधाम आज श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है. यहां से पूरे शहर का विहंगम नजारा और प्राचीन मान्यताएं भक्तों को खास आकर्षित करती हैं.

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भीलवाड़ा : भीलवाड़ा जिला मुख्यालय शहर से करीब छह किलोमीटर दूर अरावली पर्वतमाला की पहाड़ी की गोद में बसा हरणी महादेव मंदिर आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है. भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन तीर्थस्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां से दिखने वाला पूरे शहर का विहंगम दृश्य भी श्रद्धालुओं को खास आकर्षित करता है. प्राचीन समय में कभी घने जंगलों के बीच स्थित यह स्थल गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता था, जहां राजा-महाराजा शिकार के लिए आते थे. एक ऐतिहासिक घटना के बाद यहां शिव, पार्वती और गणेश की मूर्तियों की स्थापना हुई और धीरे-धीरे यह स्थान हरणी महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया. आज भी यह मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं और राजस्थानी वास्तुकला की भव्यता के लिए खास पहचान रखता है.

हरनी महादेव मंदिर के पुजारी भगवती प्रसाद ने बताया कि भीलवाड़ा शहर से 6 किलोमीटर दूरी पर स्थित हरणी महादेव मंदिर हैं. हरणी महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित मंदिर है. यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है जो ऊपर से पूरे शहर का विहंगम दृश्य प्रस्तुत करता है. सावन के दौरान बड़ी संख्या में भक्त यहां आते हैं और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम करते हैं. इस मंदिर में एक शिवलिंग स्थित है जिसका अपना धार्मिक महत्व है. मंदिर का नाम हरणी के नाम पर पड़ा. मंदिर वास्तुकला की सच्ची राजस्थानी शैली का एक शानदार उदाहरण है. यहां पर आने के बाद श्रद्धालुओं को प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है क्योंकि यह मंदिर चारों तरफ से गिरा हुआ है और यहां पर एक बावड़ी भी बनी हुई है जो उसके सुंदरता को बढ़ाता है.

गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता था पहले यह मंदिरहरणी महादेव मंदिर कभी गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता था. यहां कभी जंगल हुआ करता था. राजा-महाराजा इस वन में शिकार के लिए आते थे. एक बार राजा को मिट्टी टीले दिखे. इन्हें खोदा तो शिव, पार्वती व गणेश की मूर्तियां दिखाई दी. राजा उन्हें ले जाने लगा, लेकिन सफल नहीं हुए. बाद में भीलवाड़ा के दरक परिवार के सोकरण, रामकरण, पन्ना लाल व छगन लाल ने गुफा में स्थित भगवान की पूजा-अर्चना का दायित्व हरणी गांव के ब्राह्मणों को दिया. हरणी गांव के पास होने से इसका नाम हरणी महादेव हो गया. मंदिर के देख-रेख आज भी दरक परिवार करता है. बाद में भीलवाड़ा के दरक परिवार ने इस गुफा में स्थित भगवान की पूजा-अर्चना का दायित्व हरणी गांव के ब्राह्मणों को सौंप दिया. हरणी गांव के पास होने के कारण ही इस मंदिर का नाम हरणी महादेव पड़ गया. आज भी इस मंदिर की देखरेख का दायित्व दरक परिवार निभाता है.

About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal

A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें

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