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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश! अब राजस्थान के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी राजस्थानी भाषा?

Last Updated:May 12, 2026, 17:38 IST

Supreme Court To Rajasthan Government On Rajasthani Language: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा विषय जोड़ी जाए, सितंबर में अनुपालन सुनवाई होगी. यह मामला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया जिसमें स्कूलों और राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी रीट के पाठ्यक्रम में राजस्थानी भाषा को शामिल करने की मांग की गई थी.सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश! राजस्थान के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी राजस्थानी भाषाZoomराजस्थान स्कूलों में राजस्थानी भाषा पढ़ाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

जयपुर. राजस्थान की भाषा और पहचान से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिए हैं कि राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में शामिल करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं. कोर्ट ने साफ कहा कि मातृभाषा आधारित शिक्षा सिर्फ एक भावनात्मक मुद्दा नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़ा मामला भी है.

यह मामला उस याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया जिसमें स्कूलों और राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी रीट के पाठ्यक्रम में राजस्थानी भाषा को शामिल करने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट की पीठ में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता शामिल थे.

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को दिए निर्देशसुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में राजस्थान सरकार को मातृभाषा आधारित शिक्षा के लिए एक व्यापक और उपयुक्त नीति तैयार करनी चाहिए. अदालत ने कहा कि इस दिशा में प्रभावी कदम उठाना जरूरी है. कोर्ट ने यह भी माना कि राजस्थानी भाषा पहले से ही राज्य के कुछ विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है. इसलिए इसकी शैक्षणिक और संस्थागत मान्यता पर सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता. अदालत के मुताबिक जब भाषा को उच्च शिक्षा स्तर पर स्वीकार किया जा चुका है, तो स्कूल स्तर पर उसे नजरअंदाज करना सही नहीं माना जा सकता.

‘मूक दर्शक नहीं रह सकता कोर्ट’सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि नीति बनाना सरकार का काम होता है और अदालत उसकी सीमाओं को समझती है. लेकिन अगर संविधान और कानून में दिए गए अधिकारों का लगातार पालन नहीं हो रहा हो, तो कोर्ट चुप बैठकर सब नहीं देख सकता. अदालत ने कहा कि अगर उचित नीति नहीं बनाई जाती और संविधान में परिकल्पित अधिकार लोगों तक नहीं पहुंचते, तो यह संवैधानिक जिम्मेदारी की अनदेखी होगी. कोर्ट की टिप्पणी को इस मामले में काफी अहम माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस पूरे मुद्दे में लंबे समय से एक स्पष्ट कमी बनी हुई थी और उसी को देखते हुए यह निर्देश देना जरूरी हो गया.

सितंबर में फिर होगी सुनवाईमामले की अगली अनुपालन सुनवाई सितंबर में होगी. तब तक राजस्थान सरकार को इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी कोर्ट को देनी पड़ सकती है. राजस्थानी भाषा को लेकर लंबे समय से अलग-अलग स्तर पर मांग उठती रही है. कई सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन चाहते रहे हैं कि बच्चों को अपनी मातृभाषा में पढ़ाई का मौका मिले. अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है.

याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की थी कि राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा के पाठ्यक्रम में भी राजस्थानी भाषा को शामिल किया जाए. फिलहाल अदालत के निर्देशों के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि राजस्थान सरकार आगे क्या कदम उठाती है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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